(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश में अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर आधारित आर्थिक अपराधों के विरुद्ध पुलिस ने निर्णायक कार्रवाई करते हुए ग्वालियर और कटनी जिलों में सक्रिय गिरोहों का भंडाफोड़ किया है। इस संयुक्त कार्रवाई में 10 लाख 1 हजार रुपये नकद, एटीएम कार्ड, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।
प्रारंभिक जांच में लगभग 3 करोड़ 29 लाख रुपये के ऑनलाइन लेन-देन का खुलासा हुआ है, जो अवैध क्रिकेट सट्टेबाजी से जुड़ा पाया गया है।
ग्वालियर में क्राइम ब्रांच की दबिश
ग्वालियर जिले में क्राइम ब्रांच ने थाना महाराजपुरा क्षेत्र स्थित आदर्श कॉलोनी पिंटो पार्क में मुखबिर सूचना के आधार पर दबिश दी। मौके पर तीन व्यक्ति मोबाइल और लैपटॉप के माध्यम से ऑनलाइन सट्टा संचालित करते पाए गए।
जांच के दौरान निम्न डिजिटल साक्ष्य मिले:
- ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइटों पर सक्रिय आईडी
- यूपीआई क्यूआर कोड
- बैंक खातों से संबंधित ट्रांजेक्शन डाटा
- व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से निर्देश
पुलिस के अनुसार आरोपी कमीशन के आधार पर कार्य करते थे और लोगों को गेमिंग ऐप में जीत का प्रलोभन देकर निवेश कराते थे।
जब्त सामग्री
- 4 लाख 49 हजार रुपये नकद
- 03 लैपटॉप
- 10 मोबाइल फोन
- एटीएम कार्ड व सिम कार्ड
- अन्य सामग्री सहित लगभग 8 लाख 69 हजार रुपये मूल्य
कटनी में फर्जी बैंक खातों का नेटवर्क उजागर
कटनी जिले के थाना माधवनगर क्षेत्र में पुलिस ने एक अन्य ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा नेटवर्क का खुलासा किया। जांच में सामने आया कि कर्मचारियों के नाम पर फर्जी बैंक खाते खुलवाए गए थे, जिनके माध्यम से करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया।
जांच में निम्न बैंकों के खातों से ट्रांजेक्शन की पुष्टि हुई:
- Bandhan Bank
- HDFC Bank
- IDBI Bank
करीब 3 करोड़ 29 लाख रुपये का आर्थिक लेन-देन इन खातों से हुआ।
जब्त सामग्री
- 5 लाख 52 हजार रुपये नकद
- एटीएम कार्ड
- चेकबुक
- मोबाइल फोन
- बैंक दस्तावेज
तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
डिजिटल सट्टेबाजी का बदलता स्वरूप
विशेषज्ञों के अनुसार ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी अब पारंपरिक सट्टा बाजार से हटकर पूरी तरह डिजिटल नेटवर्क में बदल चुकी है।
सामान्य तौर पर अपनाई जाने वाली रणनीतियाँ:
- म्यूल बैंक खातों का उपयोग
- हर ट्रांजेक्शन के लिए अलग खाते
- डिजिटल वॉलेट और यूपीआई चैनल
- सोशल मीडिया व मैसेजिंग ग्रुप से निर्देश
इस मॉडल का उद्देश्य ट्रैकिंग को कठिन बनाना और जांच एजेंसियों से बचना होता है।
आर्थिक अपराध और सामाजिक प्रभाव
ऑनलाइन सट्टेबाजी केवल अवैध गतिविधि नहीं, बल्कि एक गंभीर आर्थिक अपराध है।
इसके प्रमुख दुष्प्रभाव:
- युवाओं में आर्थिक नुकसान
- परिवारों पर कर्ज का बोझ
- साइबर फ्रॉड के मामलों में वृद्धि
- बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग
पुलिस के अनुसार ऐसे नेटवर्क संगठित रूप से कार्य करते हैं और विभिन्न राज्यों तक फैले हो सकते हैं।
प्रशासनिक रुख: जीरो टॉलरेंस नीति
मध्यप्रदेश पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर आधारित आर्थिक अपराधों के विरुद्ध “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई जा रही है।
मुख्य रणनीतियाँ:
- डिजिटल फॉरेंसिक जांच
- बैंक खातों की ट्रैकिंग
- तकनीकी संसाधनों की पहचान
- संगठित गिरोहों के नेटवर्क का विश्लेषण
राज्य स्तर पर साइबर सेल और क्राइम ब्रांच की समन्वित कार्रवाई से बड़े नेटवर्क उजागर हो रहे हैं।
राजनीतिक और कानूनी संदर्भ
ऑनलाइन सट्टेबाजी और अवैध गेमिंग एप्स पर देशभर में निगरानी बढ़ाई जा रही है। कई राज्यों में विधायी स्तर पर कड़े प्रावधान लागू किए गए हैं।
मध्यप्रदेश में भी पुलिस ने स्पष्ट संकेत दिया है कि ऐसे मामलों में कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं के तहत अतिरिक्त जांच संभव है।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया
स्थानीय नागरिकों ने कार्रवाई का स्वागत किया है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन सट्टेबाजी युवाओं को गलत दिशा में ले जा रही है।
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने साइबर जागरूकता अभियान बढ़ाने की आवश्यकता जताई है।
विशेषज्ञों की राय
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि:
- डिजिटल ट्रांजेक्शन की निगरानी और एआई आधारित विश्लेषण आवश्यक है
- बैंकिंग केवाईसी प्रक्रियाओं को और सख्त किया जाना चाहिए
- युवाओं में वित्तीय साक्षरता अभियान जरूरी है
- गेमिंग और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म की नियमित मॉनिटरिंग होनी चाहिए
आगे की जांच और संभावनाएँ
पुलिस अब:
- अन्य राज्यों से जुड़े लिंक की जांच कर रही है
- संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया में है
- डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक विश्लेषण कर रही है
आने वाले समय में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
निष्कर्ष
ग्वालियर और कटनी में हुई यह कार्रवाई दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस साइबर आधारित आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। 3 करोड़ 29 लाख रुपये के लेन-देन का खुलासा और बड़ी मात्रा में नकदी व इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जब्ती यह संकेत देती है कि अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क संगठित और व्यापक है।
जीरो टॉलरेंस नीति, डिजिटल जांच और बैंकिंग समन्वय के माध्यम से ऐसे गिरोहों पर अंकुश लगाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि इसी प्रकार सतत कार्रवाई जारी रही, तो ऑनलाइन आर्थिक अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है और आम नागरिकों की वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है।

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