(बुद्धसेन शर्मा)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और विकास कार्यों की प्रगति को लेकर मंत्रालय में आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्पष्ट संदेश दिया कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान ही सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रशासनिक मशीनरी को इसी लक्ष्य के अनुरूप काम करना होगा।
समयबद्ध लक्ष्य और योजनाओं की प्रभावी निगरानी
बैठक में केंद्र प्रवर्तित योजनाओं और निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हों।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक जिले में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान कर योजना आधारित क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
मुख्य बिंदु:
- लंबित परियोजनाओं की सूची तैयार करें
- लक्ष्य आधारित मॉनिटरिंग प्रणाली लागू करें
- जिलास्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें करें
- कार्य में विलंब के कारणों की जवाबदेही तय करें
ग्रामीण विकास और आदर्श ग्राम की अवधारणा
मुख्यमंत्री वृंदावन ग्राम योजना की समीक्षा करते हुए चयनित गांवों को बुनियादी सुविधाओं, गौपालन और डेयरी विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया गया।
31 मार्च तक विजन डॉक्यूमेंट पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। पंचायत स्तर पर नए राजस्व स्रोत विकसित करने पर भी बल दिया गया, जिससे ग्राम स्वावलंबन को बढ़ावा मिल सके।
यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय रोजगार सृजन में सहायक मानी जा रही है।
जल जीवन मिशन और बुनियादी ढांचा
जल जीवन मिशन के अंतर्गत एकल नल जल योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए रीवा, सिंगरौली, मऊगंज, सीधी, मुरैना और भिंड जिलों को कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
जिला पंचायत और जनपद पंचायत के नवीन भवनों के लिए भूमि उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। यह प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
शिक्षा और स्वास्थ्य: भविष्य की नींव
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि शिक्षा और स्वास्थ्य ऐसे क्षेत्र हैं जो समाज के भविष्य को सीधे प्रभावित करते हैं।
शिक्षा विभाग की समीक्षा में:
- नए सत्र में नामांकन बढ़ाने
- ड्रॉपआउट को शून्य करने
- एजुकेशन पोर्टल 0 में विद्यार्थियों की प्रोफाइल अपडेट बढ़ाने
पर विशेष जोर दिया गया।
जबलपुर संभाग, पन्ना और बालाघाट जिलों की प्रगति की सराहना की गई।
उन्होंने यह भी कहा कि जनगणना अवधि को ध्यान में रखते हुए शैक्षणिक सत्र का संचालन इस प्रकार किया जाए कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
आंगनबाड़ी और प्रारंभिक शिक्षा पर विशेष ध्यान
3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के पंजीयन बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने कहा कि एलिमेंट्री प्री-स्कूल शिक्षा बच्चों के बौद्धिक विकास की आधारशिला है।
इसके लिए:
- ग्राम स्तर पर सैंपलिंग चेकिंग
- पालकों से वन-टू-वन चर्चा
- शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग के समन्वय
को अनिवार्य बताया गया।
महिला सशक्तिकरण और बुनियादी सुविधाएं
8 मार्च महिला दिवस तक सभी शासकीय विद्यालयों में बालिका शौचालय निर्माण पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
जीर्ण-शीर्ण भवनों को डिस्मेंटल कर सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराने पर भी बल दिया गया।
यह पहल न केवल सुरक्षा बल्कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रोजगार, उद्योग और सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
बैठक में विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की गई, जिनमें शामिल हैं:
- प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना
- प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना
- प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना
- अटल पेंशन योजना
सभी पात्र हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाने और प्रकरणों का प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
‘एक जिला-एक उत्पाद’ और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस
‘एक जिला-एक उत्पाद’ योजना के तहत जिला उत्पादों को जीआई टैग दिलाने के प्रयास तेज करने को कहा गया।
मार्केटिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान देने तथा कारीगरों के कौशल संवर्धन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
डिस्ट्रिक्ट बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान के अंतर्गत जिलों में ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस को मजबूत करने पर भी बल दिया गया।
कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में प्राथमिकता
प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि यह योजना प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कलेक्टरों को निर्देश दिए गए कि कृषक कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों को अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जाए।
सुशासन और जवाबदेही
सीएम हेल्पलाइन के समयबद्ध निराकरण, संकल्प से समाधान अभियान और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि सुशासन केवल नीति निर्माण से नहीं, बल्कि धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन से सुनिश्चित होता है।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
इस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से शासन ने जिलास्तर पर जवाबदेही तय करने और कार्य संस्कृति में सुधार का संकेत दिया है।
- विकास कार्यों की गति बढ़ेगी
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं सुदृढ़ होंगी
- शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आएगा
- रोजगार और स्वरोजगार योजनाओं का दायरा बढ़ेगा
विशेषज्ञों का मानना है कि समयबद्ध निगरानी और पारदर्शी क्रियान्वयन से योजनाओं की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
निष्कर्ष
कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा दिए गए निर्देश प्रशासनिक सख्ती और जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का संकेत हैं। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में 100% उपलब्धि सुनिश्चित करने का लक्ष्य शासन की स्पष्ट कार्ययोजना को दर्शाता है।
यदि निर्धारित समय-सीमा में योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ, तो इसका प्रत्यक्ष लाभ आम नागरिकों, किसानों, विद्यार्थियों और उद्यमियों को मिलेगा।
प्रदेश में सुशासन, विकास और सामाजिक सशक्तिकरण की दिशा में यह बैठक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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