(ब्यूरो कार्यालय)
जबलपुर (साई)। एमबीबीएस इंटर्न और छात्र स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग लेकर सड़कों पर उतरे, मध्य प्रदेश में देश के सबसे कम स्टाइपेंड में से एक मिलता है, प्रदर्शन में NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए, छात्रों ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चार प्रमुख मांगें रखीं, इंटर्न चाहते हैं कि स्टाइपेंड 14,337 रुपए से बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपए किया जाए, जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में रविवार को बड़ी संख्या में एमबीबीएस इंटर्न और छात्र सड़कों पर उतरे
स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग
एमबीबीएस इंटर्न और छात्र स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग लेकर सड़कों पर उतरे, मध्य प्रदेश में देश के सबसे कम स्टाइपेंड में से एक मिलता है, छात्रों का कहना है कि डॉक्टर बनने की सबसे कठिन ट्रेनिंग के दौरान उन्हें सम्मानजनक स्टाइपेंड नहीं मिल रहा
छात्रों ने राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर चार प्रमुख मांगें रखीं, इंटर्न चाहते हैं कि स्टाइपेंड 14,337 रुपए से बढ़ाकर कम से कम 30 हजार रुपए किया जाए, जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में रविवार को बड़ी संख्या में एमबीबीएस इंटर्न और छात्र सड़कों पर उतरे
NEET पेपर लीक का मुद्दा
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने NEET पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया, उन्होंने कहा कि लाखों छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं, फिर पेपर लीक जैसी घटनाएं उनके भरोसे को तोड़ देती हैं
छात्रों ने सवाल उठाया कि बार-बार पेपर लीक होने पर जवाबदेही किसकी तय होगी, उनका कहना था कि युवाओं का भविष्य किसी भी व्यवस्था से बड़ा होना चाहिए, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है
स्टाइपेंड बढ़ाने के तर्क
छात्रों ने ज्ञापन में कई राज्यों के स्टाइपेंड का भी उल्लेख किया, उनके मुताबिक ओडिशा में करीब 44 हजार रुपए, पश्चिम बंगाल में 43 हजार रुपए और कर्नाटक में 30 हजार रुपए स्टाइपेंड दिया जाता है, बिहार में 27 हजार रुपए, केरल में 26 हजार रुपए और तमिलनाडु में 25 हजार रुपए मिलते हैं
- ओडिशा में करीब 44 हजार रुपए स्टाइपेंड दिया जाता है
- पश्चिम बंगाल में 43 हजार रुपए स्टाइपेंड दिया जाता है
- कर्नाटक में 30 हजार रुपए स्टाइपेंड दिया जाता है
आगे की रणनीति
छात्रों का कहना है कि प्रदेश में एमबीबीएस की फीस पहले से काफी बढ़ चुकी है, लेकिन स्टाइपेंड उसी रफ्तार से नहीं बढ़ा, इससे पढ़ाई पूरी करने वाले डॉक्टर आर्थिक दबाव महसूस करते हैं
प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं का कहना है कि इंटर्न वार्ड, इमरजेंसी, ऑपरेशन थिएटर, प्रसूति वार्ड और आईसीयू में लगातार काम करते हैं, कई बार उन्हें 24 से 36 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है, एमबीबीएस इंटर्न को सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए, शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है, मेडिकल इंटर्न के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए

आकाश कुमार ने नई दिल्ली में एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद देश की आर्थिक राजधानी में हाथ आजमाने की सोची. लगभग 15 सालों से आकाश पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं और समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के मुंबई ब्यूरो के रूप में लगातार काम कर रहे हैं.
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