(विजय सिंह राजपूत)
इंदौर (साई)।मध्यप्रदेश में सामाजिक सुधार और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की दिशा में सामूहिक विवाह समारोह एक सशक्त माध्यम बनते जा रहे हैं। रविवार 28 दिसंबर 2025 को इंदौर जिले के क्षिप्रा क्षेत्र में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान गंगा सह 251 जोड़ों के सामूहिक विवाह समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाग लेकर इसे सामाजिक समरसता और मितव्यता का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह न केवल फिजूलखर्ची रोकते हैं बल्कि समाज में समानता, भाईचारा और सहयोग की भावना को मजबूत करते हैं।
भारतीय सनातन परंपरा में सोलह संस्कारों का विशेष महत्व है, जिनमें पाणिग्रहण संस्कार को परिवार और समाज की निरंतरता का आधार माना गया है। समय के साथ विवाह समारोहों में अत्यधिक खर्च, दिखावा और सामाजिक प्रतिस्पर्धा बढ़ती गई, जिससे आर्थिक दबाव और सामाजिक विषमता बढ़ी।
इसी संदर्भ में सामूहिक विवाह की परंपरा ने एक विकल्प प्रस्तुत किया जिसमें:
- विवाह सरल और सुलभ बनता है
- जाति और वर्ग के भेद कम होते हैं
- आर्थिक बोझ घटता है
- सामाजिक एकता मजबूत होती है
क्षिप्रा में आयोजित समारोह में 251 जोड़ों का विवाह संतों के सानिध्य में संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नवविवाहित जोड़ों पर पुष्पवर्षा कर आशीर्वाद दिया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं अपने बेटे का विवाह सामूहिक आयोजन में कर समाज को उदाहरण दिया है। यह संदेश स्पष्ट था कि सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत नेतृत्व के आचरण से होती है।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
प्रशासनिक स्तर पर प्रभाव:
- राज्य सरकार सामूहिक विवाह योजनाओं को बढ़ावा दे रही है
- आर्थिक सहायता और व्यवस्थागत सहयोग दिया जा रहा है
- सामाजिक संगठनों के साथ समन्वय बढ़ाया जा रहा है
सामाजिक स्तर पर प्रभाव:
- गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को राहत
- जातीय भेदभाव में कमी
- सामाजिक सौहार्द में वृद्धि
आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण
इस आयोजन के प्रमुख तथ्य:
- 251 जोड़ों का विवाह एक साथ संपन्न
- हजारों की संख्या में परिजन और नागरिक उपस्थित
- संतों और कथावाचकों का मार्गदर्शन
विश्लेषण बताता है कि यदि ऐसे आयोजन नियमित हों तो:
- विवाह व्यय में 50–70% तक की बचत संभव
- सामाजिक समरसता में उल्लेखनीय वृद्धि
- राज्य की सामाजिक योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ेगी
आम जनता पर असर
आम नागरिकों के लिए सामूहिक विवाह:
- आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बनता है
- सामाजिक सम्मान देता है
- बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर निवेश संभव बनाता है
लोगों में यह धारणा मजबूत हो रही है कि सादगी ही वास्तविक गरिमा है।
भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?
आने वाले समय में:
- और अधिक जिलों में ऐसे आयोजन हो सकते हैं
- डिजिटल पंजीकरण और पारदर्शिता बढ़ेगी
- सामाजिक सहभागिता बढ़ेगी
यह मॉडल सामाजिक सुधार की स्थायी दिशा बन सकता है।
🔹 8️⃣ Conclusion / निष्कर्ष
क्षिप्रा में आयोजित 251 जोड़ों का सामूहिक विवाह केवल एक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश स्पष्ट है — मितव्यता, समानता और समरसता ही आधुनिक समाज की वास्तविक पूंजी है। ऐसे आयोजन भविष्य की सामाजिक संरचना को अधिक न्यायपूर्ण और समावेशी बना सकते हैं।

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