पेंशनरों के लिए बड़ी खुशखबरी: अब महंगाई राहत के लिए नहीं करना होगा महीनों इंतजार, 4.5 लाख लोगों को मिलेगा सीधा फायदा

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के करीब 4.5 लाख से अधिक पेंशनरों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अब महंगाई राहत (DR) बढ़ाने के लिए दोनों राज्यों की आपसी सहमति की लंबे समय से चली आ रही बाध्यता समाप्त हो सकती है। इससे पेंशनरों को DR बढ़ोतरी के लिए महीनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और समय पर लाभ मिलने का रास्ता साफ होगा।

25 साल पुरानी व्यवस्था में बदलाव की तैयारी, पेंशनरों को मिलेगी समय पर राहत

(स्वाति खरे)

भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के लाखों पेंशनरों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। पिछले करीब 25 वर्षों से चली आ रही वह व्यवस्था, जिसके कारण महंगाई राहत (Dearness Relief- DR) बढ़ाने में महीनों की देरी होती थी, अब समाप्त हो सकती है।

मध्यप्रदेश सरकार ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए छत्तीसगढ़ सरकार को आधिकारिक प्रस्ताव भेज दिया है। प्रस्ताव में राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49 के तहत लागू उस सहमति व्यवस्था को खत्म करने की मांग की गई है, जिसके चलते दोनों राज्यों को पेंशन संबंधी वित्तीय फैसलों में एक-दूसरे की मंजूरी लेनी पड़ती थी।

यदि दोनों राज्यों के बीच इस प्रस्ताव पर सहमति बन जाती है तो लगभग 4.5 लाख पेंशनरों को महंगाई राहत की बढ़ोतरी समय पर मिल सकेगी और लंबे इंतजार की समस्या खत्म हो जाएगी।

आखिर क्यों लगते थे महंगाई राहत बढ़ने में कई महीने?

महंगाई राहत यानी DR सरकारी पेंशनरों को बढ़ती महंगाई के प्रभाव से बचाने के लिए दी जाती है। केंद्र सरकार समय-समय पर महंगाई राहत की दरों में बदलाव करती है। सामान्य रूप से राज्यों द्वारा भी अपने पेंशनरों को इसी आधार पर लाभ दिया जाता है।

लेकिन मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के मामले में स्थिति अलग रही है। यहां साल 2000 से पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की पेंशन और महंगाई राहत के मामलों में दोनों राज्यों की आर्थिक जिम्मेदारी तय की गई थी। इसलिए DR बढ़ाने से पहले दोनों राज्यों के बीच सहमति बनाना जरूरी था।

इस प्रक्रिया में संबंधित विभागों के बीच पत्राचार होता था, वित्तीय आकलन किया जाता था और सहमति प्राप्त होने में कई बार कई महीने लग जाते थे। इसका सीधा असर पेंशनरों पर पड़ता था, जिन्हें बढ़ी हुई महंगाई राहत का इंतजार करना पड़ता था।

राज्य पुनर्गठन के समय बना था यह नियम

साल 2000 में जब मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुआ था, तब राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत दोनों राज्यों के बीच कई वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाएं तय की गई थीं।

इसी अधिनियम की धारा 49 में यह प्रावधान किया गया था कि कुछ वित्तीय मामलों में दोनों राज्यों की सहमति आवश्यक होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि राज्य विभाजन के बाद किसी एक राज्य पर अचानक अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

पेंशन संबंधी खर्च के लिए भी एक निश्चित अनुपात तय किया गया था। इसके अनुसार पुराने कर्मचारियों की पेंशन और उससे जुड़े खर्च का लगभग 76 प्रतिशत भार मध्यप्रदेश सरकार और 24 प्रतिशत भार छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वहन किया जाना तय हुआ।

उस समय यह व्यवस्था वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए बनाई गई थी, लेकिन समय के साथ यह प्रक्रिया पेंशनरों के लिए देरी का कारण बन गई।

तय फॉर्मूला होने के बावजूद क्यों उठ रहे हैं सवाल?

पेंशन मामलों से जुड़े जानकारों का मानना है कि खर्च बांटने का अनुपात पहले से निर्धारित है। दोनों राज्यों को अपने हिस्से का भुगतान किसी न किसी समय करना ही होता है।

ऐसी स्थिति में हर बार महंगाई राहत बढ़ाने के लिए अलग से सहमति लेने की प्रक्रिया केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता बन गई है। यही कारण है कि पिछले कुछ वर्षों से इस नियम को समाप्त करने की मांग लगातार तेज हो रही है।

पेंशनर संगठनों का भी लंबे समय से कहना रहा है कि केंद्र सरकार द्वारा जिस दिन DR में वृद्धि लागू की जाती है, उसी दिन से राज्यों के पात्र पेंशनरों को भी उसका लाभ मिलना चाहिए।

मध्यप्रदेश वित्त विभाग ने उठाया बड़ा कदम

इस लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान के लिए मध्यप्रदेश वित्त विभाग ने पहल की है। अपर मुख्य सचिव वित्त मनीष रस्तोगी के निर्देश पर विभाग ने छत्तीसगढ़ सरकार को औपचारिक प्रस्ताव भेजा है।

इस प्रस्ताव में धारा 49 के तहत पेंशन महंगाई राहत के लिए आवश्यक आपसी सहमति की बाध्यता समाप्त करने की मांग की गई है।

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों में वर्तमान में एक ही राजनीतिक दल की सरकार होने के कारण इस प्रस्ताव पर सकारात्मक निर्णय की संभावना जताई जा रही है। यदि सहमति बनती है तो लाखों पेंशनरों के लिए यह ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकता है।

पहले भी हो चुकी है नियम बदलने की कोशिश

यह पहला अवसर नहीं है जब इस व्यवस्था में बदलाव की पहल हुई हो। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ के कार्यकाल में भी इस बाध्यता को समाप्त करने की दिशा में प्रयास किए गए थे।

उस समय राज्य मंत्रिमंडल स्तर पर निर्णय भी लिया गया था, लेकिन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसके अलावा कर्मचारी आयोग द्वारा भी इस विषय पर सुझाव दिए जा चुके हैं।

प्रशासनिक स्तर पर कई वरिष्ठ अधिकारी यह मानते रहे हैं कि वर्तमान समय में इस व्यवस्था की उपयोगिता कम हो गई है और इसे सरल बनाना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार भी प्रशासनिक सुधार और प्रक्रियाओं को आसान बनाने की दिशा में काम कर रही है, जिसके चलते इस विषय में नई पहल देखने को मिल रही है।

केंद्र सरकार की राय ने भी बढ़ाई उम्मीद

पेंशनर संगठनों के अनुसार, वर्ष 2025 में जबलपुर हाई कोर्ट में एक याचिका के दौरान केंद्र सरकार ने यह स्पष्ट किया था कि यदि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्य चाहें तो आपसी सहमति की इस बाध्यता को समाप्त किया जा सकता है।

हालांकि इसके लिए भी दोनों राज्यों की सहमति आवश्यक होगी। अब मध्यप्रदेश सरकार अपनी ओर से पहल कर चुकी है और सभी की नजर छत्तीसगढ़ सरकार के निर्णय पर टिकी हुई है।

यदि छत्तीसगढ़ की सहमति मिल जाती है तो लगभग ढाई दशक पुरानी व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव हो जाएगा।

पेंशनरों को क्या होगा सबसे बड़ा फायदा?

इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के उन लाखों पेंशनरों को मिलेगा जो लंबे समय से DR बढ़ोतरी में देरी की समस्या झेल रहे हैं।

मुख्य फायदे इस प्रकार होंगे:

  • महंगाई राहत बढ़ने के बाद महीनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
  • केंद्र सरकार के फैसलों के अनुरूप समय पर DR लागू करने में आसानी होगी।
  • लंबित एरियर के लिए लंबे समय तक प्रतीक्षा कम होगी।
  • प्रशासनिक प्रक्रिया सरल और तेज हो सकेगी।
  • करीब 4.5 लाख से अधिक पेंशनरों को सीधा लाभ मिलेगा।

पेंशनरों की लंबे समय से रही है यह मांग

पेंशनर संगठन कई वर्षों से सरकारों के सामने यह मुद्दा उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी अपनी नियमित आय के रूप में पेंशन पर निर्भर रहते हैं और महंगाई बढ़ने के साथ समय पर महंगाई राहत मिलना उनके लिए आवश्यक है।

DR में देरी होने से पेंशनरों को आर्थिक योजनाएं बनाने में कठिनाई होती है। इसलिए इस प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग लगातार उठती रही है।

अब जब सरकार स्तर पर इस दिशा में ठोस पहल शुरू हो चुकी है तो लाखों पेंशनरों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं।

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के पेंशनरों के लिए महंगाई राहत से जुड़ी 25 वर्ष पुरानी जटिल व्यवस्था जल्द बदल सकती है। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा धारा 49 की सहमति बाध्यता समाप्त करने का प्रस्ताव भेजना एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

यदि दोनों राज्यों के बीच सहमति बन जाती है तो 4.5 लाख से अधिक पेंशनरों को DR बढ़ोतरी के लिए महीनों तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया सरल होगी, बल्कि पेंशनरों को समय पर आर्थिक राहत देने की दिशा में भी एक बड़ा सुधार देखने को मिलेगा।