मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: 11 आईएएस अधिकारियों के तबादले से बदली सत्ता की प्रशासनिक रणनीति

मध्यप्रदेश में 11 वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के तबादले के साथ बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। स्वास्थ्य, वन, ऊर्जा, जनसंपर्क और जिला प्रशासन जैसे अहम विभागों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। शासन के इस निर्णय को सुशासन और विभागीय समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इन बदलावों का असर नीतिगत क्रियान्वयन और विकास योजनाओं पर दिखाई दे सकता है।

(नन्द किशोर)

भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश शासन ने राज्य की प्रशासनिक संरचना में बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 11 वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले और नई पदस्थापनाओं के आदेश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी इस आदेश को वर्ष 2026 का महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय माना जा रहा है।

स्वास्थ्य, वन, ऊर्जा, जनसंपर्क, परिवहन, जेल और कृषि जैसे प्रमुख विभागों में जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। आदेश राज्यपाल के नाम से मुख्य सचिव अनुराग जैन द्वारा जारी किया गया। प्रशासनिक विशेषज्ञ इसे शासन की कार्यक्षमता बढ़ाने और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की दिशा में रणनीतिक कदम मान रहे हैं।

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में बड़ा बदलाव

आईएएस अशोक बर्नवाल (1991 बैच) को अपर मुख्य सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे पहले वन विभाग और कृषि उत्पादन आयुक्त सहित अन्य दायित्व निभा रहे थे।

इसके साथ ही उन्हें भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा जैसे विषयों से जुड़े अनुभव को देखते हुए यह नियुक्ति समन्वित नीति निर्माण की दिशा में अहम मानी जा रही है।

विश्लेषकों का मानना है कि स्वास्थ्य और पर्यावरणीय चुनौतियों के दौर में विभागीय तालमेल को मजबूत करना आवश्यक था।

वन विभाग में नई रणनीतिक नियुक्ति

आईएएस संदीप यादव (2000 बैच) को प्रमुख सचिव, वन विभाग बनाया गया है। वे पूर्व में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यरत थे।

वन संरक्षण, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर राज्य की नीतियों को प्रभावी बनाने के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्हें प्रवासी भारतीय विभाग का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है, जिससे प्रशासनिक दायरे का विस्तार हुआ है।

ऊर्जा क्षेत्र में प्रशासनिक पुनर्संरचना

आईएएस अजय गुप्ता (2009 बैच) को प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड, जबलपुर नियुक्त किया गया है।

ऊर्जा वितरण व्यवस्था में सुधार, राजस्व प्रबंधन और उपभोक्ता सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने की दृष्टि से यह निर्णय अहम है। राज्य में बिजली आपूर्ति की निरंतरता और वितरण तंत्र की दक्षता सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

जनसंपर्क और परिवहन में नई जिम्मेदारी

आईएएस मनीष सिंह (2009 बैच) को आयुक्त, जनसंपर्क मध्यप्रदेश नियुक्त किया गया है। वे परिवहन विभाग और राज्य सड़क परिवहन निगम का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे।

सरकारी योजनाओं की जानकारी आम जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए जनसंपर्क विभाग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में अनुभवी अधिकारी की नियुक्ति को रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

राजस्व और विपणन तंत्र में फेरबदल

आईएएस अभिजीत अग्रवाल (2010 बैच) को प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित, भोपाल नियुक्त किया गया है।

वहीं दीपक कुमार सक्सेना को आबकारी आयुक्त, ग्वालियर की जिम्मेदारी दी गई है।

राजस्व संग्रह, सहकारी विपणन व्यवस्था और आबकारी प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया माना जा रहा है।

जिला स्तर पर प्रशासनिक सशक्तिकरण

राज्य सरकार ने जिला प्रशासन में भी बदलाव किए हैं।

  • उमाशंकर भार्गव को संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास नियुक्त किया गया।
  • सुनील दुबे को राज्यपाल के उप सचिव पद पर पदस्थ किया गया।
  • संघमित्रा गौतम को जिला पंचायत अलीराजपुर का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया।
  • नंदा भलावे कुशरे को राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में अपर परियोजना संचालक नियुक्त किया गया।
  • कमल सोलंकी को जिला पंचायत रायसेन का मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया।

इन बदलावों से पंचायत और ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी एवं क्रियान्वयन में तेजी आने की संभावना जताई जा रही है।

जेल विभाग का अतिरिक्त प्रभार

आईएएस शिवशेखर शुक्ला (1994 बैच), जो गृह और संस्कृति विभाग में अपर मुख्य सचिव हैं, को जेल विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

राज्य में जेल सुधार, सुरक्षा प्रबंधन और पुनर्वास योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने की दिशा में यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रशासनिक प्रभाव और संभावित बदलाव

इस व्यापक फेरबदल के कई संभावित प्रभाव हो सकते हैं:

  • स्वास्थ्य सेवाओं में नीति समन्वय
  • वन एवं पर्यावरण संरक्षण में नई पहल
  • ऊर्जा वितरण में पारदर्शिता
  • जनसंपर्क माध्यमों की मजबूती
  • जिला पंचायतों में योजनाओं की गति

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक पुनर्संरचना से विभागों के बीच समन्वय बढ़ेगा और शासन की प्राथमिकताओं को जमीन पर उतारने में मदद मिलेगी।

आंकड़ों और नीति परिप्रेक्ष्य में निर्णय

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य, ऊर्जा और ग्रामीण विकास पर बड़े बजटीय प्रावधान किए गए हैं। ऐसे में अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति इन विभागों में योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आवश्यक मानी जा रही है।

वन क्षेत्र और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर राज्य सरकार पहले ही कई कार्यक्रम चला रही है। प्रशासनिक फेरबदल से इन योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।

राजनीतिक संदर्भ और प्रशासनिक संदेश

राजनीतिक दृष्टि से भी यह निर्णय महत्वपूर्ण है। शासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जवाबदेही, पारदर्शिता और परिणाम आधारित कार्यप्रणाली को प्राथमिकता दी जाएगी।

आगामी महीनों में विकास योजनाओं की प्रगति और बजट उपयोगिता की समीक्षा के संदर्भ में यह फेरबदल निर्णायक साबित हो सकता है।

जन प्रतिक्रिया और विशेषज्ञ राय

प्रशासनिक हलकों में इस निर्णय को संतुलित और योजनाबद्ध कदम बताया जा रहा है। आम नागरिकों की अपेक्षा है कि स्वास्थ्य, बिजली और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि सही नेतृत्व और स्पष्ट कार्ययोजना से प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।

भविष्य की दिशा

आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि नई जिम्मेदारियां संभालने वाले अधिकारी विभागीय लक्ष्यों को किस प्रकार पूरा करते हैं।

यदि विभागीय समन्वय और निगरानी प्रणाली मजबूत रही, तो राज्य की विकास योजनाओं में तेजी और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित हो सकती हैं।

निष्कर्ष

मध्यप्रदेश में 11 आईएएस अधिकारियों के तबादले के साथ किया गया यह प्रशासनिक फेरबदल शासन की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दर्शाता है। स्वास्थ्य, वन, ऊर्जा और जनसंपर्क जैसे प्रमुख विभागों में नई नियुक्तियों से कार्यप्रणाली में बदलाव की उम्मीद है।

यह निर्णय प्रशासनिक दक्षता, समन्वय और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले महीनों में इन बदलावों का वास्तविक प्रभाव राज्य की विकास योजनाओं और जनसेवाओं में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।