कूनो में इतिहास का नया अध्याय: अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव 3 चीतों को जंगल में छोड़ेंगे

– मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता ‘वीरा’ और उसके दो शावकों को खुले जंगल में छोड़ेंगे। – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए प्रोजेक्ट चीता के परिणामस्वरूप चीतों की संख्या बढ़कर 32 हो गई है। – कार्यक्रम के दौरान 2026 का कूनो कैलेण्डर, ‘फील्ड मैनुअल फॉर क्लीनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-रेंजिंग चीताज़’ का विमोचन भी किया जाएगा। – इस पहल से ईको-टूरिज्म और वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन में नई संभावनाएं खुलेंगी।

(ब्यूरो कार्यालय)

श्योपुर (साई)। मध्यप्रदेश एक बार फिर वैश्विक वाइल्डलाइफ संरक्षण मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाने जा रहा है। अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव श्योपुर जिले के कूनो नेशनल पार्क में तीन चीतों—मादा चीता वीरा और उसके 10माह के दो शावकों—को बड़े बाड़े से खुले जंगल में छोड़ेंगे।

यह घटना न केवल प्रोजेक्ट चीता की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ेगी।

प्रोजेक्ट चीताप्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शी पहल

साल 2022 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने जन्मदिन पर नामीबिया से आए 8 चीतों को कूनो में छोड़कर आधुनिक भारत की सबसे साहसिक वन्यजीव परियोजना की शुरुआत की गई थी।

तीन वर्षों में इस परियोजना ने—

  • 5मादा चीताओं द्वारा
  • 6बार शावकों को जन्म
    देने की उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

आज कूनो-पालपुर और गांधी सागर अभयारण्य में कुल32चीते सुरक्षित और अनुकूलित वातावरण में रह रहे हैं। यह भारतीय वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है।

वीरा और उसके शावकों की जंगल में वापसीक्यों महत्वपूर्ण?

मादा चीता वीरा कूनो परियोजना की सबसे सफल और अनुकूलनीय चीताओं में से एक रही है।

उसके जंगल में छोड़े जाने के महत्व:

  • वीरा ने भारतीय जलवायु को तेजी से अपनाया
  • शिकार क्षमता विकसित की
  • दो स्वस्थ शावकों को जन्म देकर प्रोजेक्ट की सफलता सिद्ध की
  • उसका जंगल में लौटना प्राकृतिक प्रजनन चक्र के लिए आवश्यक

इस रिलीज से यह साबित होता है कि प्रोजेक्ट चीता केवल तकनीकी निगरानी पर निर्भर नहीं, बल्कि प्राकृतिक अनुकूलन और संतुलन की दिशा में बढ़ रहा है।

कार्यक्रम में होगा कैलेंडर और फील्ड मैनुअल का विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम के दौरान—

  • कूनो नेशनल पार्क का2026कैलेंडर
  • फील्ड मैन्युअल फॉर क्लीनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-रेंजिंग चीताज़
    का विमोचन भी करेंगे।

यह फील्ड मैनुअल चीतों की—

  • स्वास्थ्य निगरानी
  • प्राकृतिक व्यवहार की रिकॉर्डिंग
  • क्लीनिकल मैनेजमेंट
  • और संरक्षण तकनीकों
    के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जा रहा है।

सोवेनियर शॉप का लोकार्पणईको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

कूनो नेशनल पार्क में नव-निर्मित सोवेनियर शॉप का उद्घाटन भी मुख्यमंत्री करेंगे।

यहाँ मिलेगा—

  • कूनो थीम आधारित आर्टवर्क
  • वाइल्डलाइफ प्रिंटेड गिफ्ट आइटम
  • चीतों पर आधारित विशेष स्मृति चिह्न
  • स्थानीय जनजातीय कला

स्मारिका दुकान से स्थानीय समुदायों को भी आय का नया स्रोत मिलेगा, जिससे जन-सहभागिता और ईको पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

चीता संरक्षणभारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है ताकि—

  • चीतों की तेजी से घटती जनसंख्या
  • अवैध शिकार
  • आवास विनाश
  • मनुष्यों के साथ संघर्ष
    जैसी समस्याओं के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।

भारत में यह दिवस और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 70 वर्ष पहले देश में चीतों की प्रजाति विलुप्त हो चुकी थी। 2022 में उनकी ऐतिहासिक वापसी ने भारत को विश्व मंच पर एक साहसिक संरक्षण मॉडल के रूप में पुनर्स्थापित किया है।

चीते भारतीय वातावरण में तेजी से अनुकूलितवैज्ञानिक भी प्रभावित

वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार चीतों ने—

  • तापमान
  • घासभूमि
  • शिकार
  • प्राकृतिक ढांचे
    को तेजी से अपनाया है।

रेडियो-ट्रेकिंग सिस्टम और निरंतर मॉनिटरिंग के आधार पर यह पाया गया है कि—

  • चीतों की मूवमेंट स्वस्थ है
  • उनका भोजन-शिकार चक्र सामान्य है
  • नवजात शावकों का जीवित रहना आशाजनक
  • संक्रमण या प्रदूषण का कोई जोखिम दर्ज नहीं

इससे यह संकेत मिलता है कि भारतीय परिदृश्य चीता पुनर्स्थापन के लिए बेहद उपयुक्त है।

उन्नत निगरानी प्रणालीचीता सुरक्षा की रीढ़

एपीसीसीएफ एवं निदेशक, लॉयन प्रोजेक्ट मध्यप्रदेश के अनुसार—
चीतों की सुरक्षा के लिए 24×7 उन्नत निगरानी सुनिश्चित की गई है।

इसमें शामिल हैं:

  • हाई-टेक रेडियो कॉलर और GPS सिस्टम
  • विशेष प्रशिक्षित ट्रैकिंग टीम
  • क्लीनिकल मॉनिटरिंग यूनिट
  • फॉरेस्ट गार्ड की समर्पित गश्त टीम
  • हेल्थ चेकअप और भोजन व्यवहार रिपोर्ट

यह व्यवस्था प्राकृतिक परिवेश में चीतों की अनुकूलन प्रक्रिया को सुचारु और सुरक्षित बनाए रखती है।

कूनो क्यों चुना गयाभूगोल,वनक्षेत्र और जैव विविधता सर्वाधिक उपयुक्त

कूनो नेशनल पार्क का भौगोलिक और पारिस्थितिक ढांचा चीतों के लिए अत्यधिक अनुकूल माना जाता है।

कूनो की विशेषताएं:

  • विशाल घासभूमि (Grasslands)
  • समृद्ध शिकार प्रजातियाँ
  • कम मानवीय हस्तक्षेप
  • प्राकृतिक जलस्रोत
  • सुरक्षित चारागाह क्षेत्र

इन्हीं कारणों से वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने कूनो को अफ्रीकी चीतों के लिए सबसे उपयुक्त स्थान माना।

ईको-टूरिज्म में भारी बढ़ोतरी की संभावना

परोंड वन क्षेत्र में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम से कूनो में ईको-टूरिज्म को नई गति मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार—

  • चीता देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी
  • स्थानीय गाइड और होटल व्यवसाय को लाभ मिलेगा
  • पार्क के आसपास नई आर्थिक गतिविधियाँ विकसित होंगी
  • ‘चीता सफारी’ भविष्य में बड़ा आकर्षण बन सकती है

माना जा रहा है कि आगामी वर्षों में कूनो मध्यप्रदेश के पर्यटन मानचित्र का प्रमुख केंद्र बनेगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादवसंरक्षण में सक्रिय नेतृत्व

प्रोजेक्ट चीता को हाल ही में इनोवेटिव इनिशिएटिव्स अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, जो मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संरक्षण प्रयासों की सफलता दर्शाता है।

डॉ. यादव ने स्पष्ट कहा है—

चीता परियोजना केवल वन्यजीव संरक्षण नहीं,बल्कि भारत की प्राकृतिक विरासत को पुनर्स्थापित करने का राष्ट्रीय संकल्प है।

चीता परिवार की जंगल में मौजूदगीजन-सहभागिता और रुचि में वृद्धि

परोंड क्षेत्र निर्धारित पर्यटन जोन है। यहां वीरा और उसके शावकों की मौजूदगी—

  • आम नागरिकों
  • वन्यजीव प्रेमियों
  • शोधकर्ताओं
  • और स्कूल–कॉलेज समूहों
    के बीच रुचि बढ़ाएगी।

इससे वन संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता मजबूत होगी और समाज वन्यजीव संरक्षण का सहभागी बनेगा।

निष्कर्ष

कूनो नेशनल पार्क में अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस पर तीन चीतों का जंगल में छोड़ा जाना भारत के वन्यजीव संरक्षण इतिहास की एक अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है।

यह न केवल प्रोजेक्ट चीता की शानदार सफलता का प्रमाण है, बल्कि मध्यप्रदेश को विश्व स्तर पर संरक्षण नेतृत्व के रूप में स्थापित करता है।
वीरा और उसके दो शावकों की जंगल में वापसी प्राकृतिक चक्र को पुनर्स्थापित करेगी और कूनो को ईको-टूरिज्म के नए युग में प्रवेश दिलाएगी।

मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में चीता कंज़र्वेशन और पर्यावरण संरक्षण का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ चुका है—और यह शुरुआत है एक नए, उज्ज्वल अध्याय की।