500 CCTV फुटेज से दो आरोपी गिरफ्तार
(ब्यूरो कार्यालय)
खण्डवा (साई)। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले में पुलिस ने एक ऐसी आपराधिक साजिश का पर्दाफाश किया है, जिसने आम नागरिकों की सुरक्षा भावना को झकझोर कर रख दिया था। नकली पुलिसकर्मी बनकर राहगीरों को लूटने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के दो शातिर सदस्यों को गिरफ्तार कर खंडवा पुलिस ने न केवल एक गंभीर अपराध का खुलासा किया, बल्कि यह भी साबित किया कि तकनीकी दक्षता और सतत निगरानी से अपराधियों को कानून के शिकंजे में लाया जा सकता है।
यह मामला बुधवार, 17 दिसंबर 2025 को सामने आया, जब पुलिस ने 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण कर इस गिरोह तक पहुंच बनाई।
12नवंबर 2025 को थाना पदमनगर क्षेत्र निवासी हसमतराय गुरवानी (65वर्ष) ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि दो अज्ञात बाइक सवारों ने खुद को पुलिसकर्मी बताते हुए उनसे सोने की चेन और दो अंगूठियां उतरवा लीं। आरोपियों ने यह कहकर डराया कि आसपास लूट की घटना हुई है और सुरक्षा जांच जरूरी है।
जब फरियादी ने विरोध किया, तो आरोपियों ने हमला कर दिया और मौके से फरार हो गए। इस घटना ने न केवल इलाके में सनसनी फैलाई, बल्कि वरिष्ठ नागरिकों और अकेले राहगीरों में भय का माहौल पैदा कर दिया।
वर्तमान स्थिति / Latest Developments
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार राय के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया।
इस टीम में शामिल थे:
- अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) महेन्द्र तारनेकर
- सीएसपी खंडवा अभिनव कुमार बारंगे
- थाना प्रभारी निरीक्षक प्रवीण आर्य (टीम लीडर)
टीम ने शहर के प्रमुख मार्गों, कॉलोनियों और प्रवेश-निकास बिंदुओं पर लगे 500से अधिक सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। कड़ी मेहनत और तकनीकी विश्लेषण के बाद तीन संदिग्धों की पहचान की गई।
सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जांच की भूमिका
पुलिस की इस कार्रवाई में तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही।
सीसीटीवी फुटेज से निम्न तथ्य सामने आए:
- संदिग्ध एक ही तरह की मोटरसाइकिल का उपयोग कर रहे थे
- वारदात का समय और तरीका लगभग समान था
- आरोपी अक्सर बुजुर्ग या अकेले व्यक्तियों को निशाना बनाते थे
15 दिसंबर को इन संदिग्धों के फुटेज अन्य जिलों में भेजे गए, जिसके बाद एक महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा।
अंतरजिला समन्वय से बड़ी सफलता
विश्वसनीय मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी नर्मदापुरम जिले के ईरानी गैंग से जुड़े हो सकते हैं।
इसके बाद पदमनगर पुलिस की टीम नर्मदापुरम रवाना हुई, जहां तकनीकी साक्ष्य और स्थानीय मुखबिरों की मदद से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपी:
- गटरा उर्फ अप्पा हुसैन उर्फ अयान
- उम्र: 25 वर्ष
- निवासी: ईदगाह मोहल्ला, नर्मदापुरम
- कासिम, पिता अफसर सैय्यद
- उम्र: 30 वर्ष
- मूल निवासी: कल्याण, मुंबई (महाराष्ट्र)
पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अपने साथी इकबाल हुसैन के साथ मिलकर वारदात को अंजाम देते थे।
लूटा गया माल वे अपने साथी को सौंप देते थे, जो आगे इसकी बिक्री या छिपाने का काम करता था।
आरोपियों ने यह भी कबूल किया कि उन्होंने:
- महाराष्ट्र के नागपुर और अमरावती
- मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के शाहगंज क्षेत्र
में भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दिया है।
अपराध का तरीका / Modus Operandi
गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित और मनोवैज्ञानिक दबाव पर आधारित था:
- खुद को पुलिसकर्मी बताना
- हालिया अपराध या चेकिंग का हवाला देना
- पीड़ित को डराकर भरोसे में लेना
- सुरक्षा जांच के बहाने गहने उतरवाना
- गहनों को कागज में रखने का नाटक
- मौका मिलते ही मोटरसाइकिल से फरार होना
यह तरीका खासतौर पर बुजुर्गों और अकेले राहगीरों के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता था।
पुलिस की कार्रवाई और बरामदगी
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से:
- वारदात में प्रयुक्त मोटरसाइकिल
- अन्य तकनीकी साक्ष्य
जप्त किए हैं। आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश कर पुलिस अभिरक्षा में लिया गया है।
फिलहाल गिरोह के अन्य सदस्यों और लूटे गए आभूषणों की तलाश जारी है।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
इस कार्रवाई का व्यापक प्रभाव देखने को मिला है:
- नागरिकों में पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ा
- नकली वेशधारी अपराधियों के खिलाफ सतर्कता बढ़ी
- अन्य जिलों में भी ऐसे मामलों की पुनः जांच शुरू हुई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह केस अंतरजिला अपराध नियंत्रण के लिए एक मॉडल उदाहरण है।
आम जनता पर असर
इस घटना के बाद पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि:
- किसी भी संदिग्ध व्यक्ति पर तुरंत ध्यान दें
- बिना पहचान पत्र किसी को भी पुलिस न मानें
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना डायल 112 या नजदीकी थाने में दें
वरिष्ठ नागरिकों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?
पुलिस का फोकस अब:
- फरार आरोपी इकबाल हुसैन की गिरफ्तारी
- लूटे गए आभूषणों की बरामदगी
- अन्य राज्यों में दर्ज मामलों से कनेक्शन
पर केंद्रित है। संभावना है कि आने वाले दिनों में इस गिरोह से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं।
🧾 Conclusion / निष्कर्ष
खंडवा पुलिस द्वारा नकली पुलिस बनकर लूट करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ी सफलता है। 500 से अधिक सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण, तकनीकी दक्षता और अंतरजिला समन्वय ने यह साबित कर दिया कि अपराध चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून से बच नहीं सकता।
यह कार्रवाई न केवल अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी यह संदेश देती है कि सतर्कता और सहयोग से समाज को सुरक्षित बनाया जा सकता है। खंडवा पुलिस की यह पहल निश्चित रूप से प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ करेगी।

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