सिवनी के वरिष्ठ शिक्षाविद ‘रोही मासब’ का 87 वर्ष की आयु में निधन, शिक्षा जगत में शोक की लहर

सिवनी नगर के प्रतिष्ठित नागरिक एवं वरिष्ठ शिक्षाविद श्री जयदेव रोही का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। शिक्षा जगत में उनके योगदान को सदैव स्मरण किया जाएगा। उनकी अंतिम यात्रा बुधवार को कटंगी नाका मोक्षधाम के लिए रवाना होगी।

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)। मध्यप्रदेश के सिवनी नगर से आज एक अत्यंत दुखद समाचार सामने आया है। नगर के प्रतिष्ठित नागरिक, वरिष्ठ शिक्षाविद एवं आदरणीय व्यक्तित्व श्री जयदेव रोही का आज शाम 5बजकर 45मिनट पर 87वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे सिवनी नगर में शोक की लहर दौड़ गई। शिक्षा, संस्कार और अनुशासन के प्रतीक माने जाने वाले जयदेव रोही को लोग स्नेहपूर्वक रोही मासब” के नाम से जानते थे।

शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान केवल एक नौकरी तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने पीढ़ियों को दिशा देने का कार्य किया। उनके निधन को सिवनी नगर के सामाजिक और शैक्षणिक इतिहास की एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।

श्री जयदेव रोही का जीवन सादगी, अनुशासन और सेवा का प्रतीक रहा। वर्ष 1964 में जब सिवनी नगर में शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना हुई, तब वे इस महाविद्यालय में प्रथम शिक्षाविद के रूप में सेवारत रहे। उस समय संसाधनों की कमी थी, लेकिन रोही मासब की प्रतिबद्धता और समर्पण ने कॉलेज को एक मजबूत आधार प्रदान किया।

उन्होंने तकनीकी शिक्षा के महत्व को उस दौर में समझा, जब समाज में इसकी सीमित स्वीकार्यता थी। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए वे केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहे, बल्कि नैतिक मूल्यों, अनुशासन और जीवन कौशल पर भी विशेष बल देते थे।

श्री जयदेव रोही का नाम सिवनी के उन शिक्षकों में लिया जाता है, जिन्होंने शिक्षा को केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि समाज निर्माण का माध्यम माना। उनके शिक्षण जीवन की प्रमुख विशेषताएं थीं—

  • विद्यार्थियों के प्रति अपनत्व और मार्गदर्शन
  • तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता पर जोर
  • समय पालन और अनुशासन का कठोर पालन
  • कमजोर छात्रों के लिए विशेष सहयोग

उनके पढ़ाए हुए अनेक विद्यार्थी आज विभिन्न शासकीय एवं निजी संस्थानों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं और अपने शिक्षक को श्रद्धा के साथ स्मरण करते हैं।

परिवार से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री जयदेव रोही का निधन आज शाम शांतिपूर्वक हुआ। वे कुछ समय से वृद्धावस्था से संबंधित समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही रिश्तेदारों, परिचितों, पूर्व विद्यार्थियों और शहर के गणमान्य नागरिकों का उनके निवास पर तांता लग गया।

उनकी अंतिम यात्रा बुधवार, 24दिसंबर को अपरान्ह 12बजे उनके पालीटेक्निक कॉलेज के पीछे स्थित निज निवास से प्रारंभ होकर कटंगी नाका मोक्षधाम के लिए रवाना होगी।

श्री जयदेव रोही अपने पीछे भरा-पूरा और शिक्षित परिवार छोड़ गए हैं। वे—

  • शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में सेवारत श्री विजय रोही के पिताजी
  • कलेक्टर कार्यालय में सेवारत श्री संजय रोही के पिताजी

परिवार में उनका स्थान एक मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत और अनुशासनप्रिय अभिभावक के रूप में था।

श्री जयदेव रोही का निधन केवल एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे सिवनी नगर की सामाजिक और शैक्षणिक क्षति है। नगर के शिक्षकों, पूर्व छात्रों, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों ने इसे शिक्षा जगत के लिए एक अपूरणीय रिक्तता बताया है।

उनकी सेवाओं के कारण—

  • पॉलिटेक्निक कॉलेज को मजबूत पहचान मिली
  • तकनीकी शिक्षा को सामाजिक स्वीकार्यता मिली
  • शिक्षा में अनुशासन और गुणवत्ता का मानक स्थापित हुआ

आज भी उनके द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्कार संस्थान की कार्यप्रणाली में परिलक्षित होते हैं।

यदि सिवनी के शिक्षा इतिहास पर नजर डालें तो—

  • 1960 के दशक में तकनीकी शिक्षा संस्थानों की संख्या अत्यंत सीमित थी
  • शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज की स्थापना ने जिले में तकनीकी शिक्षा का द्वार खोला
  • प्रथम शिक्षाविद के रूप में जयदेव रोही की भूमिका निर्णायक रही

विश्लेषण यह दर्शाता है कि यदि उस समय रोही मासब जैसे समर्पित शिक्षक न होते, तो आज सिवनी तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में जिस मुकाम पर है, वहां पहुंचना कठिन होता।

उनके निधन से विशेष रूप से—

  • पुराने विद्यार्थी भावुक और शोकाकुल हैं
  • शिक्षा जगत से जुड़े लोग उन्हें एक युग का अंत मान रहे हैं
  • युवा शिक्षकों को एक आदर्श मार्गदर्शक की कमी खलेगी

सामान्य नागरिकों के लिए भी रोही मासब एक ऐसे व्यक्तित्व थे, जिनसे मिलने मात्र से अनुशासन और सादगी की प्रेरणा मिलती थी।

जयदेव रोही भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, शिक्षण शैली और मूल्य सदैव जीवित रहेंगे। आवश्यकता इस बात की है कि—

  • उनकी स्मृति में शैक्षणिक पहल की जाए
  • युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए
  • शिक्षा को सेवा और संस्कार से जोड़ने की परंपरा को आगे बढ़ाया जाए

इससे उनका जीवन और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा।

श्री जयदेव रोही का निधन सिवनी नगर के लिए एक गहरी और अपूरणीय क्षति है। वे केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि एक संस्था, एक विचार और एक संस्कार थे। शिक्षा जगत में उनके योगदान को सदैव श्रद्धा और सम्मान के साथ स्मरण किया जाएगा।

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया और दैनिक हिन्द गजट परिवार इस दुख की घड़ी में शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है और ईश्वर से प्रार्थना करता है कि दिवंगत आत्मा को चिरशांति तथा परिजनों को यह अथाह दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान हो।