(बुद्धसेन शर्मा)
भोपाल (साई)। पुलिस सेवा को देश की सबसे सम्मानीय और चुनौतीपूर्ण सेवाओं में गिना जाता है। यह केवल कानून-व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के सबसे कमजोर और अंतिम व्यक्ति तक सुरक्षा और न्याय पहुँचाने का संकल्प भी है। इसी मूल्य-आधारित सेवा को मजबूत करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश के राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने 77वें आरआर बैच के प्रशिक्षु भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों को संबोधित किया।
राज्यपाल ने स्पष्ट कहा—“पुलिस सेवा जनसेवा की प्रथम पंक्ति है। सहानुभूति, समानुभूति और जन विश्वास को अपने व्यवहार में शामिल करिए—यही आपकी वास्तविक पहचान बनेगी।”
उनके संबोधन ने न सिर्फ प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रेरित किया बल्कि यह भी संकेत दिया कि आधुनिक पुलिसिंग केवल तकनीकी नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी परिपक्व होनी चाहिए।
🌟 राज्यपाल का मुख्य संदेश: जनसेवा का आधार है सहानुभूति
राज्यपाल ने अपने संवाद में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया। उनका स्पष्ट मत था कि एक पुलिस अधिकारी को न केवल कानून का पालन कराना है बल्कि नागरिकों की भावनाओं को समझते हुए उनके लिए सुरक्षा की भावना भी निर्मित करनी है।
✔ 1.कथनी और करनी में समानता—नेतृत्व का मूल आधार
राज्यपाल ने कहा कि एक अधिकारी के व्यक्तित्व और कार्यशैली में पारदर्शिता तथा ईमानदारी बेहद आवश्यक है।
उनके शब्दों में—
“जनहित और राष्ट्रहित के कार्य हमेशा आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। नेतृत्व तभी सार्थक है जब आपकी बात और आपके आचरण में समानता हो।”
✔ 2.जनविश्वास—पुलिस की असली परीक्षा
उन्होंने बताया कि पुलिस के प्रति जनता का भरोसा तभी बढ़ता है जब अधिकारी उनके साथ सम्मान और संवेदनशीलता से व्यवहार करते हैं।
“जनसेवा की वास्तविक कसौटी है जनविश्वास। इस पर खरा उतरना ही आपको सच्चा अधिकारी बनाता है।”
✔ 3.पुलिस सेवा: लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव का साधन
राज्यपाल ने कहा कि एक पुलिस अधिकारी प्रतिदिन अनगिनत जीवनों के संपर्क में आता है। उसका एक निर्णय, एक व्यवहार, एक कार्रवाई किसी के जीवन को बदल सकती है।
इसलिए उन्होंने जोर दिया—
“विश्वास और सहयोग की भावना के साथ कार्य करने से ही एक सक्षम पुलिस व्यवस्था बनती है।”
🚓 प्रशिक्षुIPSअधिकारियों के लिए मार्गदर्शन
राज्यपाल ने आधुनिक पुलिसिंग की जरूरतों को समझाते हुए अधिकारियों को कई प्रेरणादायक सुझाव दिए:
🔹 1.निरंतर फील्ड भ्रमण—जमीनी हकीकत जानने का सर्वोत्तम तरीका
उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र का नियमित भ्रमण करें और तीन माह में एक बार पूरा क्षेत्र जरूर देखें। इससे उन्हें जनता की समस्याओं, सुरक्षा जरूरतों और सामाजिक चुनौतियों की सटीक जानकारी मिल सकेगी।
🔹 2.नवाचार और तकनीकी दक्षता पर जोर
आधुनिक चुनौतियों से निपटने के लिए पुलिसिंग का तकनीकी और प्रशासनिक रूप से सक्षम होना जरूरी है।
राज्यपाल ने प्रशिक्षुओं से कहा कि वे अपनी “प्रतिभा और मेधा का उपयोग नवाचारों के लिए करें”।
🔹 3.नागरिक केंद्रित पुलिस व्यवस्था विकसित करें
उन्होंने बताया कि पुलिस की उपस्थिति हर नागरिक में विश्वास जगानी चाहिए, न कि भय।
कहा—
“आप संविधान और कानून की शक्ति हैं, और यह शक्ति समाज के अंतिम व्यक्ति की रक्षा के लिए है।”
🏫 मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी की प्रशिक्षण रूपरेखा
राजभवन की इस मुलाकात में मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के निदेशक श्री मोहम्मद शाहिद अबसार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि—
- 29सप्ताह का प्रशिक्षण 24 नवंबर 2025 से प्रारंभ हुआ है।
- इसमें विधिक प्रशिक्षण, तकनीकी शिक्षा, शारीरिक दक्षता और फील्ड अनुभव शामिल हैं।
- प्रशिक्षुओं को पुलिस की विभिन्न इकाइयों और शाखाओं का प्रत्यक्ष अनुभव कराया जाएगा।
IPS प्रशिक्षु अधिकारी श्री आलोक कुमार वर्मा ने कहा कि अब तक की प्रशिक्षण यात्रा ने उनके व्यक्तित्व में “अभूतपूर्व, अमूल्य और बहुआयामी विकास” किया है।
🌐 संवेदनशील व आधुनिक पुलिसिंग की दिशा में एक कदम
राज्यपाल का यह संवाद केवल औपचारिकता नहीं बल्कि एक दिशा-निर्देश है जो भविष्य की पुलिस व्यवस्था को अधिक मानवीय, पारदर्शी, तकनीकी और जवाबदेह बना सकता है।
आज जब सूचना का प्रवाह तेज है और समाज की अपेक्षाएँ बढ़ रही हैं, पुलिस को भी अपने कामकाज में संवेदनशीलता और पेशेवर दक्षता दोनों को संतुलित रखना होगा।
🏁 Conclusion (निष्कर्ष)
इस मुलाकात का समग्र संदेश यही था कि—
- सहानुभूति पुलिस का सबसे मजबूत हथियार है।
- जनविश्वास ही पुलिस की वास्तविक उपलब्धि है।
- अधिकारी अपने आचरण से ही जनता का सम्मान व भरोसा जीतते हैं।
- नवाचार,तकनीक और मैदानी अनुभव आधुनिक पुलिसिंग की अनिवार्य जरूरतें हैं।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल का यह संदेश न केवल प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों बल्कि संपूर्ण पुलिस बल के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होता है, जो आने वाले समय में मध्यप्रदेश की पुलिस व्यवस्था को और भी मजबूत, संवेदनशील और जनकेंद्रित बनाने की दिशा में प्रेरित करेगा।

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