इधर,दशहरे पर धू धू कर जल उठा रावण,पर स्वास्थ्य विभाग की नहीं टूटी कुंभकर्णीय निंद्रा!
कोल्डरिफ सीरप से9 बच्चों की मौत,छिंदवाड़ा सहित अनेक राज्यों में बैन,पर सिवनी के सीएमएचओ को नहीं इसकी परवाह!
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)। मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की लापरवाही ने एक बार फिर मासूम ज़िंदगियाँ निगल ली हैं। छिंदवाड़ा जिले के परासिया ब्लॉक में कोल्ड्रिफ सिरप(Coldrif Cough Syrup) पीने से 9 मासूम बच्चों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया। राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस सिरप और कंपनी के अन्य उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया।
लेकिन दुखद पहलू यह है कि पड़ोसी जिले सिवनी में, जहाँ घटना के सबक को सबसे पहले लागू किया जाना चाहिए था, वहां स्वास्थ्य विभाग और सीएमएचओ अब भी कुंभकर्णीय निंद्रा में डूबे हुए हैं। दशहरे पर रावण तो धू-धू कर जल गया, पर स्वास्थ्य अमले की ‘रावणी प्रवृत्तियाँ’ अब भी जस की तस बनी हुई हैं।
⚡छिंदवाड़ा का कोल्ड्रिफ कांड–मासूमों की मौत से टूटा मातम
छिंदवाड़ा जिले के परासिया ब्लॉक में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से 9 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। कई बच्चे अब भी अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं।
- सिरप में नॉन-फार्माकोपिया ग्रेड प्रोपीलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल हुआ था।
- यह तत्व कथित रूप से डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) और एथिलीन ग्लाइकॉल जैसे जहरीले पदार्थों से दूषित पाया गया।
- दोनों ही तत्व किडनी को नष्ट करने वाले और जानलेवा साबित होते हैं।
📑 तमिलनाडु जांच रिपोर्ट का खुलासा
यह सिरप तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित श्रीसन फार्मा कंपनी में बनाया जाता है।
- परीक्षण में पाया गया कि सिरप में 48.6%डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) मौजूद था।
- यह मात्रा सामान्य मानक से कई गुना अधिक है।
- रिपोर्ट ने स्पष्ट किया कि यही मासूमों की मौत का मुख्य कारण रहा।
तमिलनाडु सरकार ने इसे तुरंत “Not of Standard Quality (NSQ)” घोषित किया और राज्यभर में बिक्री पर रोक लगा दी।
🏛️मुख्यमंत्री का बयान– “दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा”

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा:
“छिंदवाड़ा में मासूम बच्चों की मौत अत्यंत दुखद है। हमने तुरंत इस सिरप और कंपनी के अन्य उत्पादों पर प्रदेशव्यापी प्रतिबंध लगाया है। दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”
सीएम ने बताया कि तमिलनाडु सरकार से प्राप्त रिपोर्ट में खतरनाक रसायन की पुष्टि के बाद ही प्रतिबंध लागू किया गया।
🏥 केंद्र सरकार भी सक्रिय
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी इस मामले में बयान जारी किया।
- तमिलनाडु एफडीए ने कंपनी के उत्पादन केंद्र से नमूने लिए।
- परीक्षण में DEG की मात्रा अनुमेय सीमा से अधिक पाई गई।
- इसके बाद NIV, ICMR, NEERI, CDSCOऔरAIIMSनागपुर की संयुक्त टीमें छिंदवाड़ा पहुँचीं।
- इन टीमों ने पीड़ित परिवारों, अस्पतालों और सिरप के बैचों का गहन परीक्षण किया।
🚨 दवा कंपनी पर कार्रवाई
तमिलनाडु सरकार ने कंपनी के खिलाफ कड़े कदम उठाए:
- उत्पादन रोकने का आदेश (Stop Production Order)।
- मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया।
- स्टॉक जब्त और दुकानों से सीलिंग।
- कंपनी को शो-कॉज नोटिस जारी।
❌सिवनी स्वास्थ्य विभाग की कुंभकर्णीय निंद्रा
जहाँ छिंदवाड़ा और पूरे प्रदेश में हड़कंप मचा हुआ है, वहीं सिवनी जिले का स्वास्थ्य अमला मौन है।
- सीएमएचओ कार्यालय की ओर से अब तक कोई विशेष पहल नहीं।
- मेडिकल स्टोर्स पर अब भी पुराने स्टॉक उपलब्ध होने की आशंका।
- जनता को सचेत करने के लिए कोई जागरूकता अभियान तक नहीं चलाया गया।
⚡ स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप
- शिकायतकर्ता बताते हैं कि वर्षों से क्लीनिकल एस्टेबलिशमेंट एक्ट का उल्लंघन हो रहा है।
- झोलाछाप और नियम विरुद्ध चिकित्सा करने वाले डॉक्टरों से 15–20सौ रुपये की घूस लेकर उन्हें छूट दी जाती रही।
- सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायतें फोर्स क्लोज कर दी जाती हैं।
🔎 स्थानीय स्तर पर नाराजगी
सिवनी के नागरिकों का कहना है कि—
- “जब पड़ोसी जिले में इतने बड़े हादसे के बाद सरकार ने बैन लगाया, तो सिवनी स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत एक्शन क्यों नहीं लिया?”
- “क्या हमारे बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं?”
स्थानीय सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
🔎क्या सिवनी नहीं आया यह सीरप,अगर आया तो क्या करता रहा औषधि प्रशासन अमला!
यक्ष प्रश्न यही खड़ा हुआ है कि जिस तरह की बातें स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताई हैं उसके अनुसार यह सीरप जबलपुर के वितरक के माध्यम से छिंदवाड़ा पहुंचा था, निश्चित तौर पर यह सिवनी से होकर ही गुजरा होगा, पर क्या यह सिवनी के बायपास से होकर गुजरा जो सिवनी की दवा दुकानों में यह उपलब्ध नहीं है!
- क्या सिवनी के दवा विक्रेताओं ने इस सीरप को नहीं बुलाया और वे धड़ल्ले से इसे बेच नहीं रहे हैं!
- अगर बुलाया और बेचा जा रहा है सीएमएचओ जिनके पास उप संचालक औषधि प्रशासन का जिम्मा भी होता है उनके अधीन कार्यरत अमला आखिर क्या करता है!
- दोपहर 12 बजे तक जिला चिकित्सालय के प्रथम तल पर स्थिति औषधि प्रशासन के कार्यालय में अलीगढ़ के ताले ही झूलते नजर आते हैं!
📢 जिला कलेक्टर का बयान

सिवनी की नवनियुक्त कलेक्टर सुश्री शीतला पटले ने कहा—
“आपने हमारे संज्ञान में यह बात लाई है। हमने सीएमएचओ को बुलाया है और उनके साथ चर्चा की जा रही है। बहुत जल्द इस मामले में कठोर कार्रवाई होगी।”
📊 स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
यह पूरा मामला केवल कोल्ड्रिफ सिरप तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता है।
- दवा निगरानी प्रणाली की विफलता।
- सीएमएचओ स्तर पर सुस्ती और लापरवाही।
- शिकायतों पर “मौन” रहने की परंपरा।
- और जनता को उनके हाल पर छोड़ देना।
⚖️कानूनी पहलू
इस मामले में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कार्रवाई की जा रही है।
- दोषी पाए जाने पर कंपनी और जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर दंड हो सकता है।
- लापरवाही साबित होने पर संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई संभव है।
🙏 निष्कर्ष
छिंदवाड़ा का यह हादसा केवल 9 बच्चों की मौत नहीं, बल्कि प्रशासनिक सुस्ती और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का काला सच है।
👉 एक ओर मुख्यमंत्री और राज्य सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दवा पर प्रतिबंध लगा दिया, वहीं दूसरी ओर सिवनी का स्वास्थ्य अमला अब भी गहरी नींद में सोया है।
👉 सवाल यह है कि क्या सिवनी के स्वास्थ्य अधिकारी किसी और मौत का इंतजार कर रहे हैं?
👉 अब जनता उम्मीद कर रही है कि सरकार केवल बयानबाज़ी से आगे बढ़कर दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई करेगी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

लगभग 16 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के सिवनी ब्यूरो के रूप में लगभग 12 सालों से कार्यरत हैं.
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