(जाग्रति बरूआ)
गुवहाटी (साई)।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार, 8 जनवरी 2026 को असम प्रवास के दौरान गुवाहाटी के समीप स्थित सुआलकुची का दौरा किया। ‘सिल्क विलेज’ के नाम से विख्यात यह स्थान असमिया संस्कृति और विश्व प्रसिद्ध मूगा रेशम बुनाई के लिए जाना जाता है। मुख्यमंत्री ने बुनाई प्रक्रिया, हाथकरघा तकनीक और स्थानीय बुनकरों की कला का समीप से अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री ने बुनकरों से संवाद कर उनकी मेहनत और कौशल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पारंपरिक कला न केवल सांस्कृतिक धरोहर है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है।
सुआलकुची को ‘पूर्व का मैनचेस्टर’ कहा जाता है और यह गाँव गुवाहाटी से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ मुख्य रूप से तीन प्रकार के रेशम का उत्पादन होता है:
- मूगा (सुनहरा रेशम)
- पैट (सफेद रेशम,हाथीदांत जैसा)
- एरी (हल्का बेज रेशम)
यह क्षेत्र हाथकरघा बुनाई और पारंपरिक वस्त्र निर्माण के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। लगभग हर घर में बुनाई की जाती है और बुनकर परिवार पीढ़ियों से इस कला को आगे बढ़ा रहे हैं।
वर्तमान स्थिति
मुख्यमंत्री ने बुनकरों के कार्यशालाओं और घरों का निरीक्षण किया। उन्होंने देखा कि किस तरह हर परिवार अपनी विरासत को बनाए रखते हुए रेशमी वस्त्र तैयार करता है। बुनकरों की बारीक तकनीक, धागों का चयन और रंगों की विविधता मुख्यमंत्री को विशेष रूप से प्रभावित कर गई।
सुआलकुची में मुख्य रूप से तैयार होने वाले वस्त्र हैं:
- मेखला चादर
- साड़ियाँ
- कुर्ते
- गमछे
इनकी गुणवत्ता और डिज़ाइन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त है।
संग्रहालय और वस्त्र कला का अवलोकन
मुख्यमंत्री ने ‘बस्त्रा उद्यान’ और ‘आमार सुआलकुची’ संग्रहालय का दौरा किया। संग्रहालय में रेशम बुनाई की प्रक्रिया, चरणबद्ध तकनीक और ऐतिहासिक कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगी थी।
मुख्यमंत्री ने संग्रहालय में प्रदर्शित वस्त्रों के निर्माण पद्धति को समझा और बुनाई की जटिल तकनीकों पर गहन ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि यह अनुभव अन्य राज्यों के शिल्प क्षेत्र के लिए मार्गदर्शन और प्रेरणा का काम करेगा।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
मुख्यमंत्री का उद्देश्य केवल भ्रमण नहीं था। यह यात्रा मध्यप्रदेश के शिल्प क्षेत्र और कुटीर उद्योग के विकास के लिए भी मार्गदर्शक है। उनके अनुभव और संवाद से:
- पारंपरिक कला के संरक्षण की दिशा में नई योजनाएँ बनाई जा सकती हैं।
- मध्यप्रदेश के शिल्पकारों को सुआलकुची के मॉडल से प्रशिक्षण और तकनीकी ज्ञान प्राप्त होगा।
- स्थानीय अर्थव्यवस्था और कुटीर उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण
सुआलकुची में प्रतिवर्ष हजारों रेशमी वस्त्र तैयार होते हैं। यहाँ लगभग 10,000 परिवार सीधे-सीधे बुनाई से जुड़े हुए हैं। यह क्षेत्र असमिया संस्कृति के संरक्षण और रोजगार सृजन का भी महत्वपूर्ण केंद्र है।
मुख्यमंत्री ने बुनकरों के कार्य और उत्पादन प्रणाली का अवलोकन कर यह समझा कि किस तरह छोटे-छोटे हाथकरघे पूरे उद्योग की नींव रखते हैं।
आम जनता पर असर
इस भ्रमण से आम जनता और शिल्पकार दोनों को लाभ होगा:
- बुनकरों का कौशल और मेहनत सम्मानित होगी।
- कुटीर उद्योग के लिए नई रणनीतियाँ तैयार की जा सकेंगी।
- स्थानीय कला और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सकेगी।
भविष्य की संभावनाएं
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इस भ्रमण से मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों में शिल्प उद्योग को सुदृढ़ करने के लिए कई अवसर खुलेंगे।
- पारंपरिक और आधुनिक तकनीक का समन्वय कर नई वस्त्र श्रृंखला तैयार की जा सकती है।
- युवा बुनकरों के लिए प्रशिक्षण और विकास के अवसर बढ़ेंगे।
- सांस्कृतिक पर्यटन और आर्थिक विकास के क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सुआलकुची का अनुभव मध्यप्रदेश के शिल्प क्षेत्र को नई दिशा देने में मददगार साबित होगा।
8️⃣ निष्कर्ष
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सुआलकुची सिल्क विलेज भ्रमण केवल एक औपचारिक दौरा नहीं, बल्कि पारंपरिक कला, बुनाई कौशल और स्थानीय अर्थव्यवस्था की समझ का अवसर था। इस यात्रा से यह स्पष्ट हुआ कि हाथकरघा बुनाई न केवल सांस्कृतिक विरासत है, बल्कि रोजगार और कुटीर उद्योग की रीढ़ भी है।
अन्य राज्यों के श्रेष्ठ अनुभवों से मध्यप्रदेश अपने शिल्प क्षेत्र को और सशक्त कर सकता है। यह भ्रमण भविष्य में प्रदेश के पारंपरिक कला और वस्त्र उद्योग के विकास में मार्गदर्शक और प्रेरक सिद्ध होगा।

आशीष कौशल का नाम महाराष्ट्र के विदर्भ में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 30 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय आशीष कौशल वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के नागपुर ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
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