सोनीपत में 20 रुपये के नकली सिक्कों की फैक्ट्री का दावा, 70 करोड़ के सिक्के बाजार में चलाने की बात; 5 गिरफ्तार

(सचिन धीमान)

सराहनपुर (साई)। हरियाणा के सोनीपत में 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने वाली कथित फैक्ट्री से जुड़े एक गिरोह का मामला सामने आया है। उत्तर प्रदेश की सहारनपुर पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी सहारनपुर में भी नकली सिक्के बनाने की फैक्ट्री शुरू करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस कार्रवाई में गिरोह का खुलासा हुआ।

मामले में सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली बात छह महीने में 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में चलाने के कथित दावे से जुड़ी है। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने यह बात बताई है। हालांकि, इस रकम और बाजार में चलाए गए सिक्कों की वास्तविक मात्रा की स्वतंत्र पुष्टि जांच के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने सोनीपत के बड़ी इंडस्ट्री एरिया में मशीन और डाई की मदद से 20 रुपये के सिक्के तैयार करने की व्यवस्था कर रखी थी। यहां प्रतिदिन हजारों सिक्के बनाने की क्षमता बताई गई है।

सहारनपुर पुलिस की कार्रवाई से सामने आया मामला

सहारनपुर पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य जिले में नई फैक्ट्री लगाने की तैयारी कर रहे थे। जमीन और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर गतिविधियां चल रही थीं। पुलिस को इसकी जानकारी मिलने के बाद कार्रवाई की गई और पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

सहारनपुर के SSP अभिनंदन सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गिरोह के बारे में जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क का कथित सरगना पंजाब के जीरकपुर निवासी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह है।

जांच में पुलिस ने उसके पुराने आपराधिक नेटवर्क और नकली सिक्के बनाने के कथित काम से जुड़े संपर्कों को भी खंगालना शुरू किया है।

कौन है गिरोह का कथित सरगना?

पुलिस के अनुसार उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह शुरुआत में सुनार का काम करता था। बताया गया है कि वह चांदी के सिक्के बनाने का काम करता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से हुई, जिनके संपर्क में आने के बाद उसने नकली सिक्के बनाने का काम शुरू किया।

पुलिस का दावा है कि इस काम से मुनाफा मिलने के बाद उसने धीरे-धीरे अपना नेटवर्क बढ़ाया। इसके बाद दूसरे लोगों को भी इस गतिविधि में शामिल किया गया।

पुलिस के मुताबिक, उपकार पहले जेल भी जा चुका है। तिहाड़ जेल समेत अन्य जेलों में रहने के दौरान उसकी कुछ लोगों से मुलाकात हुई थी। जांच एजेंसियों के अनुसार, बाद में इनमें से कुछ लोग उसके नेटवर्क का हिस्सा बन गए।

यह पहलू जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे कथित नेटवर्क की अवधि और उसके विस्तार के बारे में जानकारी हासिल करने में मदद मिल सकती है।

सोनीपत में रोजाना 10 से 12 हजार सिक्के बनाने की क्षमता

पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह ने सोनीपत के बड़ी इंडस्ट्री एरिया में नकली सिक्के तैयार करने के लिए फैक्ट्री स्थापित की थी। यहां मशीनों और डाई की मदद से 20 रुपये के सिक्के बनाए जाने की बात सामने आई है।

फैक्ट्री की कथित क्षमता प्रतिदिन करीब 10 से 12 हजार सिक्के तैयार करने की बताई गई है। इसका अर्थ है कि यदि यह क्षमता लगातार इस्तेमाल की जाती थी तो कम समय में बड़ी संख्या में सिक्कों का उत्पादन संभव था।

पुलिस का कहना है कि सिक्कों की फिनिशिंग पर भी विशेष ध्यान दिया जाता था। कथित तौर पर इस तरह तैयार किया जाता था कि पहली नजर में उनके नकली होने का पता लगाना मुश्किल हो।

हालांकि, नकली सिक्कों की गुणवत्ता, उनकी वास्तविक संख्या और बाजार में उनकी पहुंच को लेकर विस्तृत जानकारी जांच पूरी होने के बाद सामने आ सकती है।

मशीन और डाई का इस्तेमाल

सिक्के तैयार करने के लिए मशीन और डाई का इस्तेमाल किए जाने की बात जांच में बताई गई है। इससे संकेत मिलता है कि कथित तौर पर यह काम किसी छोटे स्तर की घरेलू गतिविधि के बजाय व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था।

यदि पुलिस जांच में फैक्ट्री से संबंधित सभी आरोपों की पुष्टि होती है तो यह मामला नकली मुद्रा और आर्थिक अपराध के दृष्टिकोण से गंभीर माना जाएगा।

छोटे दुकानदारों से लेकर शराब ठेकों और टोल तक पहुंचाने का दावा

सहारनपुर पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि तैयार नकली सिक्कों को अलग-अलग स्थानों पर चलाया जाता था।

पुलिस के अनुसार, इसमें छोटे दुकानदारों के अलावा सरकारी शराब ठेके और टोल टैक्स से जुड़े स्थान भी शामिल बताए गए हैं।

यह दावा जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि सिक्कों को फैक्ट्री से बाहर निकालने के बाद किन लोगों के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचाया जाता था।

साथ ही यह भी जांच का विषय है कि कथित नेटवर्क केवल हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक सीमित था या इसकी पहुंच अन्य राज्यों तक भी थी।

सप्लाई नेटवर्क की जांच

पुलिस के सामने अब कई महत्वपूर्ण सवाल हैं—

  • नकली सिक्के किन लोगों को दिए जाते थे?
  • उन्हें बाजार तक पहुंचाने का तरीका क्या था?
  • किन शहरों और राज्यों में इनकी सप्लाई हुई?
  • नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे?
  • कथित तौर पर तैयार किए गए सिक्कों में से कितने बाजार में पहुंचे?
  • 70 करोड़ रुपये के दावे का वास्तविक आधार क्या है?

इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

छह महीने में 70 करोड़ के सिक्के चलाने का कथित दावा

मामले में सामने आए सबसे बड़े दावों में से एक छह महीने में 70 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नकली सिक्के बाजार में चलाने से जुड़ा है।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ के दौरान यह दावा किया। लेकिन यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि आरोपियों द्वारा पूछताछ में कही गई बात और जांच में प्रमाणित तथ्य एक ही चीज नहीं होते।

70 करोड़ रुपये की रकम की वास्तविकता जानने के लिए पुलिस को कथित उत्पादन, बरामदगी, सप्लाई चैन, लेनदेन और बाजार में पहुंच से जुड़े साक्ष्यों की जांच करनी होगी।

अगर छह महीने की अवधि को आधार माना जाए तो 70 करोड़ रुपये की राशि काफी बड़ी है। ऐसे में जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि इतनी बड़ी मात्रा में कथित नकली सिक्कों को कहां और किस नेटवर्क के जरिए खपाया गया।

रोजाना उत्पादन क्षमता से जुड़े आंकड़े भी महत्वपूर्ण

पुलिस के अनुसार फैक्ट्री में रोजाना करीब 10 से 12 हजार सिक्के तैयार करने की क्षमता थी। यह आंकड़ा उत्पादन क्षमता को दर्शाता है, जरूरी नहीं कि वास्तव में हर दिन इतनी ही संख्या में सिक्के बनाए गए हों।

यही वजह है कि क्षमता और वास्तविक उत्पादन के बीच अंतर की जांच जरूरी होगी।

मसलन, मशीन की क्षमता अधिक होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसे लगातार पूरी क्षमता पर चलाया गया। इसके लिए कच्चे माल, मशीन संचालन, बिजली या अन्य संसाधनों, तैयार सिक्कों, वितरण और बरामदगी से संबंधित साक्ष्यों को देखा जाना आवश्यक होगा।

इसलिए 70 करोड़ रुपये के कथित आंकड़े को फिलहाल पुलिस जांच में सामने आए दावे के रूप में देखना अधिक उचित है।

सहारनपुर में नई फैक्ट्री लगाने की तैयारी

पुलिस के अनुसार, गिरोह सोनीपत के अलावा सहारनपुर में भी नकली सिक्के बनाने की नई फैक्ट्री शुरू करने की तैयारी कर रहा था।

इसके लिए जमीन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की तलाश किए जाने की बात सामने आई है। पुलिस की कार्रवाई के कारण कथित तौर पर यह योजना शुरू होने से पहले ही गिरोह पकड़ में आ गया।

सहारनपुर में नई फैक्ट्री लगाने की योजना सामने आने के बाद जांच का दायरा भी बढ़ गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जमीन की तलाश से लेकर मशीनों और अन्य संसाधनों की व्यवस्था तक कौन-कौन लोग संपर्क में थे।

नई फैक्ट्री का उद्देश्य क्या था?

अगर पुलिस के आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो सहारनपुर में नई फैक्ट्री लगाने का उद्देश्य कथित नेटवर्क का विस्तार करना हो सकता है। इससे यह भी पता लगाया जा सकता है कि गिरोह अलग-अलग स्थानों पर उत्पादन केंद्र स्थापित कर अपनी गतिविधियों को फैलाने की योजना बना रहा था या नहीं।

इस पहलू की जांच से नेटवर्क की संरचना और भविष्य की कथित योजना को समझने में मदद मिल सकती है।

सोनीपत पुलिस ने अलग जानकारी होने की बात कही

इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू सोनीपत पुलिस से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सोनीपत पुलिस ने कहा कि उसे सहारनपुर पुलिस की इस कार्रवाई के बारे में जानकारी नहीं थी।

सोनीपत पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि जिस फैक्ट्री में नकली सिक्के बनाए जाने का दावा किया गया है, वह वास्तव में कहां संचालित हो रही थी, इसकी जानकारी भी उसे नहीं थी।

इस स्थिति के कारण अब दोनों राज्यों की पुलिस के बीच जांच और सूचनाओं के आदान-प्रदान की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

कथित फैक्ट्री की सही जगह, वहां की गतिविधियां, मशीनों की उपलब्धता और उत्पादन से जुड़े साक्ष्यों की जांच मामले को आगे बढ़ाने में अहम होगी।

बाजार और आम लोगों पर संभावित असर

नकली सिक्कों की कथित सप्लाई का मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल आम लोगों और कारोबारियों की सुरक्षा से जुड़ता है। यदि बड़ी मात्रा में नकली सिक्के बाजार में पहुंचे हैं, तो दुकानदारों और ग्राहकों के लिए उनकी पहचान करना चुनौती बन सकता है।

छोटे कारोबारियों के लिए यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है, क्योंकि रोजाना बड़ी संख्या में नकद लेनदेन होता है। किसी सिक्के को नकली मानकर स्वीकार न करने या गलती से नकली सिक्का स्वीकार कर लेने की स्थिति में आर्थिक नुकसान हो सकता है।

इसीलिए ऐसे मामलों में पुलिस जांच के साथ जागरूकता भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

कारोबारियों के लिए सावधानी जरूरी

नकद लेनदेन करने वाले कारोबारियों को संदिग्ध सिक्कों को लेकर सतर्क रहना चाहिए। यदि किसी सिक्के को लेकर संदेह हो तो उसे सामान्य लेनदेन में आगे बढ़ाने के बजाय संबंधित बैंक या सक्षम संस्था से उसकी जांच कराना उचित है।

किसी भी संदिग्ध सिक्के को जानबूझकर बाजार में चलाने की कोशिश करना कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।

पुलिस के सामने अब आगे की बड़ी चुनौती

पांच आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहने वाली है। सबसे महत्वपूर्ण काम कथित नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का पता लगाना होगा।

जांच में यह पता लगाया जाना जरूरी है कि उत्पादन से लेकर वितरण तक कौन-कौन लोग सक्रिय थे। साथ ही यह भी पता लगाना होगा कि कथित नकली सिक्कों को बाजार में कहां-कहां खपाया गया।

पुलिस के लिए संभावित रूप से महत्वपूर्ण जांच बिंदु हैं:

  • कथित फैक्ट्री का पूरा पता और संचालन व्यवस्था।
  • मशीन और डाई की खरीद एवं उपयोग से जुड़े रिकॉर्ड।
  • तैयार सिक्कों की वास्तविक संख्या।
  • सिक्कों की सप्लाई से जुड़े लोग।
  • अलग-अलग राज्यों में संभावित नेटवर्क।
  • सहारनपुर में प्रस्तावित फैक्ट्री से जुड़े संपर्क।
  • 70 करोड़ रुपये के कथित दावे से जुड़े साक्ष्य।

मामले का राजनीतिक पहलू सीमित, आर्थिक अपराध का कोण अहम

इस मामले में फिलहाल किसी राजनीतिक दल या राजनीतिक गतिविधि से सीधे जुड़ा पहलू सामने नहीं आया है। इसलिए इसका मुख्य संदर्भ आर्थिक अपराध, नकली मुद्रा जैसे मामलों की जांच और बाजार में नकली सिक्कों की संभावित पहुंच से जुड़ा है।

हालांकि, यदि जांच में कई राज्यों में फैले नेटवर्क या बड़े स्तर पर आर्थिक नुकसान के प्रमाण मिलते हैं तो मामला व्यापक आर्थिक अपराध की जांच का रूप ले सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस द्वारा और गिरफ्तारियां किए जाने, कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने और फैक्ट्री से संबंधित साक्ष्य जुटाने की संभावना रहेगी।

सबसे अहम बात यह होगी कि 70 करोड़ रुपये के कथित आंकड़े की पुष्टि किस तरह होती है। इसके लिए पुलिस को आरोपियों के बयान के अलावा भौतिक साक्ष्य, बरामदगी, उत्पादन क्षमता, कथित सप्लाई चैन और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड को आपस में मिलाना होगा।

यदि जांच में बड़े नेटवर्क की पुष्टि होती है तो अलग-अलग राज्यों में इसके संपर्कों की जांच भी आगे बढ़ सकती है।

हरियाणा के सोनीपत में 20 रुपये के नकली सिक्के बनाने वाली कथित फैक्ट्री और सहारनपुर में नई फैक्ट्री लगाने की तैयारी से जुड़ा यह मामला नकली मुद्रा नेटवर्क की संभावित कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सहारनपुर पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और कथित सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह के पुराने नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

मामले में छह महीने के दौरान 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में चलाने का दावा सामने आया है, लेकिन इस आंकड़े को फिलहाल आरोपियों के कथित बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। इसकी वास्तविक पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी।

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती कथित उत्पादन केंद्र, सप्लाई नेटवर्क, अन्य संभावित आरोपियों और बाजार में पहुंचाए गए सिक्कों की वास्तविक मात्रा का पता लगाना है। साथ ही सोनीपत पुलिस और सहारनपुर पुलिस के बीच सूचनाओं का समन्वय भी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

आम लोगों और कारोबारियों के लिए भी यह मामला सतर्क रहने का संकेत है। नकद लेनदेन के दौरान संदिग्ध सिक्कों की पहचान और उचित माध्यम से उनकी जांच कराना जरूरी है। वहीं, पूरे मामले की तस्वीर जांच पूरी होने और ठोस साक्ष्य सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।