भीलवाड़ा से दिया विकास का संदेश
(ब्यूरो कार्यालय)
भीलवाड़ा (साई)।राजस्थान की वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में आयोजित ‘इन्टरैक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटीज इन एमपी’ कार्यक्रम में डॉ. मोहन यादव ने निवेशकों को संबोधित करते हुए मध्यप्रदेश को देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे राज्यों में अग्रणी बताया। उन्होंने कहा कि “भारत के दिल से जुड़िए, मध्यप्रदेश के साथ आगे बढ़िए”, क्योंकि राज्य भौगोलिक, संसाधन और नीतिगत दृष्टि से निवेश के लिए आदर्श केंद्र बन चुका है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि निवेश, नवाचार और विकास की साझेदारी केवल अल्पकालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक और स्थायी होगी।
रणनीतिक स्थिति: देश के मध्य का लाभ
मध्यप्रदेश का भौगोलिक स्थान देश के केंद्र में होने के कारण इसे लॉजिस्टिक्स और निर्यात के लिए विशेष बढ़त प्रदान करता है। उत्तर, पश्चिम, पूर्व और दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी राज्य को औद्योगिक हब में परिवर्तित कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि:
- प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता
- विस्तृत भूमि बैंक
- बेहतर सड़क एवं रेल नेटवर्क
- ऊर्जा में आत्मनिर्भरता
- पारदर्शी प्रशासन
इन सभी तत्वों ने मध्यप्रदेश को निवेश के लिए विश्वसनीय गंतव्य बना दिया है।
राजस्थान और मध्यप्रदेश: ऐतिहासिक औद्योगिक संबंध
मुख्यमंत्री ने दोनों राज्यों के सहोदर संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापार और संस्कृति का यह रिश्ता सदियों पुराना है।
राजस्थान के उद्योग जगत की उद्यमशीलता का उदाहरण देते हुए उन्होंने पद्म विभूषण सम्मानित घनश्याम दास बिड़ला का उल्लेख किया, जिन्होंने उज्जैन जिले के नागदा में Grasim Industries Limited की स्थापना की थी।
यह ऐतिहासिक उदाहरण दर्शाता है कि दोनों राज्यों के बीच औद्योगिक सहयोग की परंपरा पहले से मौजूद है, जिसे अब आधुनिक नीतियों और वैश्विक अवसरों के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।
टेक्सटाइल सेक्टर: नई संभावनाओं का द्वार
भीलवाड़ा, जिसे टेक्सटाइल सिटी के नाम से जाना जाता है, वहां से टेक्सटाइल उद्योग को लेकर विशेष संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेश की अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने जानकारी दी कि देश के पहले और सबसे बड़े पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन मध्यप्रदेश में हो चुका है। यह पहल केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत टेक्सटाइल उद्योग को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करेगी।
टेक्निकल टेक्सटाइल, गारमेंटिंग, निर्यात आधारित उत्पादन और मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में राज्य नई संभावनाओं का केंद्र बन सकता है।
उद्योग-अनुकूल नीतियां और रियायतें
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वयं उद्योग विभाग की जिम्मेदारी संभाली है, ताकि निवेश प्रस्तावों में अनावश्यक विलंब न हो।
राज्य सरकार द्वारा लागू 18 नई उद्योग-अनुकूल नीतियों के प्रमुख बिंदु:
- सिंगल विंडो सिस्टम
- त्वरित स्वीकृति प्रक्रिया
- बड़े निवेश प्रस्तावों पर विशेष रियायत
- एमएसएमई को प्रोत्साहन
- रोजगार सृजन आधारित प्रोत्साहन
सरकार का दावा है कि बड़े निवेश प्रस्तावों को विशेष पैकेज दिया जाएगा, जिससे राज्य में औद्योगीकरण की रफ्तार और तेज होगी।
जल, ऊर्जा और ग्रीन ग्रोथ पर फोकस
मुख्यमंत्री ने पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना के समझौते का उल्लेख करते हुए बताया कि इससे दोनों राज्यों के नागरिकों को जल उपलब्धता में लाभ मिलेगा।
मध्यप्रदेश ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर होने की दिशा में अग्रसर है। नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन, विशेषकर सौर ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी, राज्य को भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप तैयार कर रहे हैं।
ऊर्जा उपलब्धता किसी भी उद्योग की रीढ़ होती है, और इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता निवेशकों के लिए विश्वास का आधार बनती है।
उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
कार्यक्रम में विभिन्न औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे।
संगम ग्रुप के चेयरमैन डॉ. एसएन मोदानी ने कहा कि भीलवाड़ा की पहचान टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग से है तथा यह संवाद निवेशकों को नई संभावनाओं से परिचित कराएगा।
मेवाड़ चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीति को सकारात्मक बताते हुए सीमावर्ती जिलों में निवेश बढ़ने का उल्लेख किया।
नीमच के पास टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क की मांग भी सामने आई, जिससे क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश
यह आयोजन केवल निवेश आकर्षित करने तक सीमित नहीं था, बल्कि यह राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय का संकेत भी था।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उद्योग प्रोत्साहन के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ सहयोग की भावना भी व्यक्त की गई, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि प्रतिस्पर्धा के साथ सहयोग की नीति अपनाई जा रही है।
निवेश का सामाजिक प्रभाव
औद्योगिक निवेश का सीधा प्रभाव रोजगार सृजन पर पड़ता है।
- स्थानीय युवाओं को रोजगार
- कौशल विकास में वृद्धि
- सहायक उद्योगों का विकास
- क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में गति
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टेक्सटाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े निवेश आते हैं, तो मध्यप्रदेश का जीएसडीपी ग्रोथ रेट और मजबूत हो सकता है।
वैश्विक व्यापार और निर्यात संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने यूरोप के साथ टेक्सटाइल व्यापार की संभावनाओं का उल्लेख किया। वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए टेक्नोलॉजी, गुणवत्ता और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करना आवश्यक है।
मध्यप्रदेश की केंद्रीय स्थिति और बेहतर कनेक्टिविटी इसे निर्यात-उन्मुख उद्योगों के लिए आकर्षक बनाती है।
भविष्य की दिशा
आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की औद्योगिक रणनीति निम्न बिंदुओं पर केंद्रित रहने की संभावना है:
- टेक्निकल टेक्सटाइल विस्तार
- ग्रीन इंडस्ट्रियल कॉरिडोर
- निर्यात आधारित उत्पादन
- कौशल आधारित रोजगार मॉडल
- राज्यों के बीच सहयोगी विकास
यदि घोषित नीतियां प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो मध्यप्रदेश निवेश मानचित्र पर और अधिक सशक्त उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
️⃣ निष्कर्ष
भीलवाड़ा में आयोजित निवेश संवाद कार्यक्रम ने स्पष्ट संकेत दिया है कि मध्यप्रदेश अब पारंपरिक कृषि राज्य की छवि से आगे बढ़कर औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में उभरना चाहता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का “भारत के दिल से जुड़िए” आह्वान केवल एक नारा नहीं, बल्कि रणनीतिक विकास दृष्टि का प्रतीक है।
टेक्सटाइल सेक्टर, उद्योग-अनुकूल नीतियां, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और अंतरराज्यीय सहयोग के माध्यम से राज्य दीर्घकालिक औद्योगिक साझेदारी का मार्ग प्रशस्त कर रहा है। आने वाले समय में इन पहलों का वास्तविक प्रभाव निवेश, रोजगार और आर्थिक विकास के आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

आकाश कुमार ने नई दिल्ली में एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से मास्टर्स की डिग्री लेने के बाद देश की आर्थिक राजधानी में हाथ आजमाने की सोची. लगभग 15 सालों से आकाश पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं और समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के मुंबई ब्यूरो के रूप में लगातार काम कर रहे हैं.
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