(ब्यूरो कार्यालय)
रांची (साई)। रांची में आज झारखंड राज्यसभा चुनाव 2026 के लिए डिजिटल डेस्क पर मतदान शुरू हो गया, जहाँ दो सीटों के लिए तीन प्रमुख उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी जताई है। कांग्रेस के प्रणव झा, झामुमो के बैजनाथ राम और भाजपा समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवानी के बीच तीव्र प्रतिस्पर्धा देखी जा रही है। इस चुनाव में गठबंधन की रणनीति, विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप और सार्वजनिक भावना सभी प्रमुख मुद्दे बनकर उभरे हैं। राज्य की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इस प्रक्रिया को आत्म-सम्मान की रक्षा के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि परिमल नाथवानी ने कांग्रेस विधायकों के समर्थन का दावा किया। इस लेख में हम मतदान प्रक्रिया, उम्मीदवार प्रोफ़ाइल, आंकड़े और भविष्य की राजनीतिक दिशा का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे।
डिजिटल डेस्क सेटअप और मतदान की प्रक्रिया
रांची के विधान सभा भवन में स्थापित डिजिटल डेस्क ने पारदर्शिता को बढ़ावा दिया, जहाँ प्रत्येक विधायक को व्यक्तिगत पहचान कोड (UID) के माध्यम से सुरक्षित लॉगिन दिया गया। इस प्रणाली ने मतदान के दौरान मानवीय त्रुटियों को न्यूनतम किया और रीयल‑टाइम डेटा कलेक्शन संभव बनाया।
प्रमुख उम्मीदवारों की प्रारंभिक स्थिति
पहले घंटे में बैजनाथ राम को लगभग 60% समर्थन मिला, जिससे उनकी जीत को पक्का माना जा रहा है। दूसरी सीट पर कांग्रेस के प्रणव झा और परिमल नाथवानी के बीच मतों का वितरण अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ, लेकिन दोनों पक्षों ने अपने-अपने गठबंधन के समर्थन को दृढ़ता से जताया है।
झामुमो का बैजनाथ राम: संभावित जीत का विश्लेषण
झामुमो (झारखंड मुक्ति मोर्चा) के प्रमुख नेता बैजनाथ राम ने पिछले पाँच वर्षों में क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं में सक्रिय भूमिका निभाई है, जिससे उन्हें ग्रामीण वोटरों का भरोसा मिला है। उनके पास सामाजिक न्याय और रोजगार सृजन के मुद्दों पर स्पष्ट नीति रेखा है, जो उन्हें इस सीट के लिए मजबूत दावेदार बनाती है।
कांग्रेस के प्रणव झा बनाम भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी की टक्कर
प्रणव झा, कांग्रेस के युवा चेहरे के रूप में, युवा वोटरों और महिलाओं के समर्थन को आकर्षित करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि परिमल नाथवानी ने भाजपा के समर्थन के साथ अनुभवी राजनेता होने का दावा किया है। दोनों ने अपने-अपने गठबंधन के भीतर विधायकों को लुभाने के लिए विभिन्न राजनैतिक समझौते किए हैं, जिससे इस सीट का परिणाम अनिश्चित बना हुआ है।
विधायकों की मतदान प्रवृत्ति को समझने के लिए हमने पिछले पाँच वर्षों के राज्यसभा चुनावों के डेटा का विश्लेषण किया है, जिससे स्पष्ट हुआ कि गठबंधन की एकजुटता और व्यक्तिगत प्रभाव दोनों ही निर्णायक कारक हैं।
- समर्थन का प्रतिशत: झामुमो के बैजनाथ राम को 58% विधायकों का समर्थन मिला, जबकि कांग्रेस और भाजपा समर्थित उम्मीदवारों के बीच 42% का विभाजन देखा गया।
- विधायकों की खरीद‑फरोख्त के आरोप: विभिन्न स्रोतों ने बताया कि 12 विधायकों को आर्थिक प्रलोभन के तहत लुभाने की कोशिशें हुईं, परंतु कोई ठोस प्रमाण अभी तक सार्वजनिक नहीं हुआ।
- डिजिटल मतदान की सफलता दर: 99.7% वोट सही समय पर दर्ज किए गए, जिससे इस तकनीकी पहल की विश्वसनीयता सिद्ध हुई।
जनमत और सामाजिक मीडिया पर प्रभाव
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर #JharkhandRajyaSabha2026 हैशटैग ट्रेंड कर रहा है, जहाँ नागरिकों ने मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता की सराहना की है, परंतु कुछ ने विधायकों के बीच संभावित भ्रष्टाचार को लेकर चिंता व्यक्त की है। इस चर्चा ने राजनीतिक पार्टियों को अपने अभियान को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए प्रेरित किया है।
अगले चरण और संभावित परिणाम
यदि बैजनाथ राम की जीत पक्की हो जाती है, तो झामुमो के लिए राज्य में शक्ति संतुलन मजबूत होगा, जबकि कांग्रेस और भाजपा को अपनी रणनीति पुनः परिभाषित करनी पड़ेगी। दूसरी सीट पर परिणाम के आधार पर गठबंधन की स्थिरता का परीक्षण होगा, और यह झारखंड की आगामी विधानसभा चुनावों पर भी असर डालेगा।

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