(दीपक अग्रवाल)
मुंबई (साई)। दिसंबर के पहले सप्ताह में देशभर में हवाई यातायात व्यवस्था लगभग ठप हो गई थी। हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे रहे, सैकड़ों उड़ानें रद्द हुईं और कई घंटों तक यात्रियों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ा। इस असाधारण स्थिति के बाद देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने यात्रियों के लिए एक विशेष राहत योजना शुरू की, जिसे उसने ‘Gesture of Care’ नाम दिया।
यह योजना यात्रियों को हुए असुविधा, मानसिक तनाव और समय की हानि के बदले एक प्रतीकात्मक मुआवजा देने का प्रयास है, हालांकि यह कानूनी मुआवजे का विकल्प नहीं बल्कि उसके अतिरिक्त है।
3 दिसंबर से 5 दिसंबर के बीच देश के कई हवाई अड्डों पर भारी तकनीकी और परिचालन समस्याएं सामने आईं। खराब मौसम, सिस्टम फेलियर और एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट संबंधी दिक्कतों ने मिलकर उड़ानों की श्रृंखला बाधित कर दी।
परिणामस्वरूप:
- कई उड़ानें रद्द कर दी गईं
- अनेक उड़ानों में 3 घंटे से अधिक की देरी हुई
- हजारों यात्री एयरपोर्ट पर फंसे रहे
- कई लोगों की मीटिंग, विवाह, परीक्षाएं और मेडिकल अपॉइंटमेंट प्रभावित हुए
इस संकट ने नागरिक उड्डयन व्यवस्था की मजबूती पर भी सवाल खड़े किए।
वर्तमान स्थिति / Latest Developments
इंडिगो ने घोषणा की कि वह प्रभावित यात्रियों को ₹5,000से ₹10,000तक के वाउचर देगा। यह राशि नकद नहीं बल्कि भविष्य की यात्रा में उपयोग योग्य डिजिटल वाउचर के रूप में दी जाएगी।
पात्रता (Eligibility)
केवल वही यात्री पात्र हैं जो:
- 3 दिसंबर दोपहर 12 बजे से 5 दिसंबर रात 12 बजे के बीच यात्रा के लिए बुक थे
- जिनकी उड़ान रद्द हुई या 3 घंटे से अधिक विलंबित हुई
- जो इंडिगो द्वारा चिन्हित 245 उड़ानों में शामिल थे
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह मुआवजा प्रति यात्री है, न कि प्रति PNR। यानी एक ही बुकिंग में यदि चार यात्री थे, तो चारों को अलग-अलग वाउचर मिलेंगे — बच्चों और शिशुओं को भी।
मुआवजे की संरचना
- दो वाउचर दिए जाएंगे
- प्रत्येक वाउचर की कीमत ₹5,000
- कुल मूल्य ₹10,000 तक
- वैधता: जारी होने की तारीख से 12 महीने
- एक बार उपयोग योग्य
- ट्रांसफर नहीं किया जा सकता
- केवल एयरलाइन की आधिकारिक वेबसाइट पर ही उपयोग होगा
आवेदन प्रक्रिया / How to Apply
यात्रियों को:
- एयरलाइन की वेबसाइट पर Gesture of Care पेज पर जाना होगा
- अपना PNR और अंतिम नाम दर्ज करना होगा
- सबमिट करने के बाद वाउचर ईमेल पर भेजा जाएगा
यदि ईमेल आईडी पहले दर्ज नहीं थी, तो उसे अपडेट करने के 24 घंटे के भीतर वाउचर भेजा जाएगा।
यात्रियों की प्रतिक्रियाएं
इस योजना को लेकर यात्रियों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं।
कुछ यात्रियों का कहना है कि:
- यह मुआवजा मानसिक तनाव और समय की क्षति की भरपाई नहीं कर सकता
- नकद मुआवजा ज्यादा व्यावहारिक होता
- वाउचर से फिर उसी एयरलाइन पर निर्भरता बन जाती है
वहीं कुछ यात्रियों ने इसे एक सकारात्मक पहल बताया और कहा कि कम से कम एयरलाइन ने जिम्मेदारी तो स्वीकार की।
CAR के तहत मुआवजा क्या है?
नागरिक उड्डयन नियम (CAR) के तहत:
- 1 घंटे तक की उड़ान: ₹5,000 या टिकट किराया — जो कम हो
- 1 से 2 घंटे की उड़ान: ₹7,500
- 2 घंटे से अधिक: ₹10,000
यह मुआवजा नकद या बैंक ट्रांसफर में होता है और यह Gesture of Care से अलग है।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
इस घटना ने:
- हवाई यात्रियों के अधिकारों पर बहस तेज की
- एयरलाइनों की जवाबदेही पर सवाल उठाए
- डिजिटल सिस्टम की मजबूती की आवश्यकता उजागर की
- उपभोक्ता संरक्षण कानूनों को और सख्त करने की मांग को बल दिया
सरकार और नियामकों के लिए यह एक चेतावनी है कि हवाई यातायात अब लक्ज़री नहीं बल्कि बुनियादी सेवा बन चुका है।
आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण
- लगभग 245 उड़ानें प्रभावित
- अनुमानतः 50,000 से अधिक यात्री प्रभावित
- औसतन 6 से 10 घंटे तक की देरी
- कई अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन छूटे
यह दर्शाता है कि एक सिस्टम फेलियर पूरे नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है।
आम जनता पर असर
मध्यम वर्गीय यात्रियों के लिए:
- आर्थिक नुकसान
- मानसिक तनाव
- समय की बर्बादी
- पेशेवर और निजी योजनाओं पर असर
इससे यह स्पष्ट होता है कि मुआवजा केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का भी विषय है।
भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?
आने वाले समय में:
- एयरलाइनों पर दबाव बढ़ेगा कि वे बेहतर बैकअप सिस्टम बनाएं
- डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा
- यात्रियों के अधिकार और स्पष्ट होंगे
- मुआवजा नीतियों को और पारदर्शी बनाया जाएगा
🔹 8️⃣ निष्कर्ष / Conclusion
‘Gesture of Care’ योजना इंडिगो की ओर से एक सकारात्मक पहल जरूर है, लेकिन यह संकट से हुए वास्तविक नुकसान की पूरी भरपाई नहीं कर सकती। यह घटना बताती है कि भारत की हवाई यातायात प्रणाली को तकनीकी रूप से और अधिक मजबूत, उत्तरदायी और यात्री-केंद्रित बनाना आवश्यक है। मुआवजा राहत का माध्यम हो सकता है, समाधान का नहीं। स्थायी समाधान तभी संभव है जब व्यवस्था भरोसेमंद और पारदर्शी हो।

कर्नाटक की राजधानी बंग्लुरू में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत श्वेता यादव ने नई दिल्ली के एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से पोस्ट ग्रेजुएशन की उपाधि लेने के बाद वे पिछले लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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