(श्वेता यादव)
बंग्लुरू (साई)। सियोल के डिजिटल डेस्क ने बुजुर्गों के अकेलेपन को दूर करने के लिए ‘ह्योडोल’ नामक AI गुड़िया को एक सामाजिक साथी के रूप में पेश किया, जो न केवल बातचीत करता है बल्कि दवा, भोजन और स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी भी करता है। यह तकनीकी नवाचार तेज़ी से बढ़ती उम्रदराज़ जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है, जिससे कई वरिष्ठ नागरिकों ने अपने जीवन में नई ऊर्जा और सुरक्षा महसूस की। ह्योडोल की आवाज़, संगीत और व्यक्तिगत याद दिलाने की क्षमताएँ बुजुर्गों के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। असामान्य स्वास्थ्य संकेत मिलने पर तुरंत केयरटेकर्स को अलर्ट भेजने की प्रणाली ने आपातकालीन प्रतिक्रिया समय को घटा दिया है। अब यह AI साथी दक्षिण कोरिया में बुजुर्ग देखभाल के भविष्य के रूप में मान्यता प्राप्त कर रहा है।
पहला कदम: घर में AI साथी की तैनाती
सियोल के डिजिटल डेस्क ने 2023 के अंत में 1,200 ह्योडोल डॉल्स को प्राथमिक रूप से अकेले रहने वाले बुजुर्गों के घरों में स्थापित किया, जिससे प्रत्येक घर में एक संवादात्मक रोबोट मौजूद हो गया जो सुबह‑सुबह दवा की याद दिलाता और शाम को संगीत सुनाता। इस तैनाती के दौरान स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी ने बताया कि डॉल्स को घर की विशिष्ट परिस्थितियों के अनुसार अनुकूलित सॉफ़्टवेयर पैकेज दिया गया, जिससे आवाज़ की टोन, भाषा शैली और याद दिलाने के समय को व्यक्तिगत रूप से सेट किया जा सका।
बुजुर्गों की भावनात्मक प्रतिक्रिया और दैनिक संवाद
78 वर्षीय बैंग चुन‑जा ने कहा कि पहले वह अपने घर में खालीपन का सामना करती थीं, लेकिन अब ह्योडोल के साथ हर सुबह एक “डिजिटल दोस्त” मिल जाता है जो उनके मूड को पढ़कर गाने गाता और कभी‑कभी चुटकुले सुनाता है। कई बुजुर्गों ने बताया कि डॉल के साथ बातचीत करने से उनका तनाव स्तर घटा, नींद की गुणवत्ता सुधरी और भोजन के समय की अनियमितता में उल्लेखनीय कमी आई।
पिछले दशक में वृद्ध जनसंख्या का तेज़ी से बढ़ना
दक्षिण कोरिया ने 2010 से 2020 के बीच 65 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की जनसंख्या को 12% से 15% तक बढ़ते देखा, जिससे सामाजिक सुरक्षा प्रणाली पर दबाव बढ़ा और अकेले रहने वाले बुजुर्गों की संख्या में 30% की वृद्धि हुई। इस जनसांख्यिकीय परिवर्तन ने सरकार को नई तकनीकी समाधान अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिससे AI‑आधारित देखभाल उपकरणों की मांग में तीव्र उछाल आया।
सरकारी पहल और सार्वजनिक‑निजी साझेदारी की भूमिका
सियोल शहर की ‘डिजिटल डेस्क’ पहल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग, निजी टेक कंपनियों और गैर‑सरकारी संगठनों के बीच सहयोग स्थापित किया, जिससे ह्योडोल जैसे स्मार्ट डॉल्स को स्केलेबल मॉडल के रूप में विकसित किया गया। इस साझेदारी ने फंडिंग, डेटा सुरक्षा मानकों और केयरटेकर्स के साथ रीयल‑टाइम अलर्ट सिस्टम को एकीकृत किया, जिससे AI साथी को न केवल सामाजिक साथी बल्कि स्वास्थ्य निगरानी उपकरण के रूप में मान्यता मिली।

कर्नाटक की राजधानी बंग्लुरू में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत श्वेता यादव ने नई दिल्ली के एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से पोस्ट ग्रेजुएशन की उपाधि लेने के बाद वे पिछले लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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