गाँव के थानेदार ने रविवार की सुबह चोरों के कब्जे से बरामद सामान दिखाने का प्लान बनाया। पूरा चौक भरा हुआ था लोग और एक छोटे से हॉल में सामान।
संवाद1 (थानेदार-व्यक्ति):
- थानेदार: “हमने चोरों के कब्जे से काफी सामान बरामद किया है। क्या आप अपना सामान पहचान सकते हैं?”
- व्यक्ति (गंभीर मुद्रा में): “क्यों नहीं, वह जो कोने में रुमाल पड़ा है, वह मेरा है। उस पर बी लिखा है।”
थानेदार ने नोट किया, लेकिन हँसी रोक पाना मुश्किल हो गया।
संवाद2 (थानेदार-व्यक्ति):
- थानेदार: “यह कोई सबूत नहीं हुआ।”
- व्यक्ति: “माफ कीजिएगा, मेरे पास भी एक रुमाल है जिस पर बी लिखा है। मेरे 2 रुमाल चोरी हुए थे।”
सभी लोग हँसी से लोटपोट हो गए। चोरों के बरामद सामान में रुमाल की कहानी ने पूरे थाने में हँसी की लहर दौड़ा दी।
हास्य के पलों में:
- बच्चा: “अंकल, रुमाल पर नाम लिखना भी चोरी से बचने का तरीका है क्या?”
- अंकल: “बिलकुल बेटा, चोरी भी हो जाए तो हँसी के साथ!”
- दोस्त-दोस्त संवाद:
- दोस्त 1: “रुमाल पर बी लिखा, और मालिक बोले यह मेरा!”
- दोस्त 2: “अच्छा, अब अगली बार चोर भी रुमाल पर अपना नाम लिखेगा!”
मज़ेदार तथ्य:
- पुलिस और रुमाल की जोड़ी, हँसी की गारंटी।
- चोरी का सामान और मालिक की बौद्धिक चाल, गाँव के लोगों को हँसाने के लिए पर्याप्त।
Conclusion /निष्कर्ष:
थानेदार की मेहनत और मालिक की दिमागी चाल ने हँसी का मेला लगा दिया।
- पंचलाइन 1: “रुमाल पर बी लिखा, और हँसी का बी बढ़ गया!”
- पंचलाइन 2: “चोरों ने चोरी की, लेकिन हँसी की संपत्ति बढ़ा दी!”
साई फीचर्स के इस फनी जोक ने साबित किया कि छोटी-छोटी चीज़ें भी हँसी के बवंडर का कारण बन सकती हैं।
थानेदार ने कहा- चोरों के कब्जे से हमने काफी सामान बरामद किया है।
क्या आप इन चीजों में से अपना सामान पहचान सकते हैं?
क्यों नहीं,वह जो कोने में रुमाल पड़ा है,वह मेरा है। उस पर बी लिखा है।
यह कोई सबूत न हुआ। मेरे पास भी एक रुमाल है जिस पर बी लिखा है।
माफ कीजिएगा,मेरे 2 रुमाल चोरी हुए थे।
(साई फीचर्स)

मूलतः प्रयागराज निवासी, पिछले लगभग 25 वर्षों से अधिक समय से नई दिल्ली में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय विनीत खरे किसी पहचान को मोहताज नहीं हैं.
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