कड़ाके की ठंड ने बढ़ाई परेशानी: बीते 24 घंटों का तापमान रिकॉर्ड, जनजीवन प्रभावित

सिवनी जिले में बुधवार 24 दिसंबर 2025 को बीते 24 घंटों के दौरान ठंड का प्रभाव और तेज होता नजर आया। न्यूनतम तापमान में गिरावट से शीतलहर जैसी स्थिति बनी रही। आम जनजीवन, कृषि, स्वास्थ्य और यातायात पर इसका सीधा असर देखा गया।

(ब्यूरो कार्यालय)

सिवनी (साई)। सिवनी जिले में आज बुधवार 24 दिसंबर 2025 की शाम तक रिकार्ड किया गया पिछले 24 घंटों का तापमान इस प्रकार रहा . . .

सिवनी, बुधवार 24 दिसंबर 2025
अधिकतमन्यूनतमआद्रता
सुबह16.21258
शाम25.21538
वर्षा0मिली मीटर

सिवनी जिले में दिसंबर के अंतिम सप्ताह के साथ ही ठंड ने अपने तेवर और तीखे कर लिए हैं। बुधवार 24 दिसंबर 2025 की शाम तक दर्ज किए गए बीते 24 घंटों के तापमान ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस वर्ष की सर्दी सामान्य से अधिक असर डाल रही है। न्यूनतम तापमान में लगातार गिरावट और सुबह-शाम की शीतलहर ने लोगों को घरों में सिमटने पर मजबूर कर दिया है।

शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी ठंड का व्यापक प्रभाव देखा जा रहा है। बाजारों की रौनक घट गई है, स्कूलों में उपस्थिति कम हुई है और अस्पतालों में सर्दी से जुड़ी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

दिसंबर माह परंपरागत रूप से सिवनी जिले में ठंड लेकर आता है, लेकिन इस वर्ष पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर भारत में बने ठंडे हवाओं के दबाव के चलते ठंड का स्तर और गहरा हो गया है। पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार न्यूनतम तापमान में अपेक्षाकृत तेज गिरावट दर्ज की गई है।

पिछले सप्ताह तक मौसम सामान्य ठंडा था, लेकिन 20 दिसंबर के बाद से शीतलहर जैसी परिस्थितियां बनने लगीं। रात के समय तापमान तेजी से नीचे गया, जिससे कोहरा, ओस और ठंडी हवाओं का असर लगातार बढ़ता गया।

वर्तमान स्थिति / Latest Developments

📍 बीते24घंटों का तापमान (रिकॉर्डसिवनी जिला)

  • अधिकतम तापमान: लगभग 23°C
  • न्यूनतम तापमान: लगभग 7°C
  • सुबह के समय आर्द्रता: अधिक
  • हवा की गति: हल्की से मध्यम
  • दृश्यता: सुबह कोहरे के कारण कम

सुबह के समय हल्का कोहरा छाया रहा और सड़कों पर दृश्यता कम हो गई। दोपहर में हल्की धूप निकली लेकिन उसमें भी ठंड का असर बना रहा। शाम होते ही तापमान फिर से तेजी से गिरने लगा।

प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक प्रभाव

🏛 प्रशासनिक प्रभाव

  • नगर पालिका और जिला प्रशासन ने रैन बसेरों और आश्रय स्थलों को सक्रिय किया।
  • खुले में रहने वाले लोगों के लिए कंबल वितरण की व्यवस्था की गई।
  • स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट मोड पर रखा गया है।

👥 सामाजिक प्रभाव

  • सुबह-शाम लोग अनावश्यक बाहर निकलने से बच रहे हैं।
  • बाजारों में भीड़ कम हुई है।
  • स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति घट गई है।

💼 आर्थिक प्रभाव

  • फुटपाथ व्यवसाय और खुले बाजार प्रभावित हुए हैं।
  • मजदूरी आधारित कार्यों की गति धीमी हुई है।
  • परिवहन और लॉजिस्टिक्स में सुबह के समय देरी हो रही है।

आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण

पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों से तुलना करें तो दिसंबर 2025 का न्यूनतम तापमान औसतन 1 से 1.5 डिग्री कम दर्ज किया जा रहा है। यह संकेत देता है कि इस बार ठंड अधिक तीव्र और लंबी हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता
  • उत्तरी भारत से आने वाली ठंडी हवाएं
  • कम बादल और साफ आसमान

इन तीनों कारणों से रात में तापमान तेजी से गिरता है।

आम जनता पर असर

🚶‍♂️ दैनिक जीवन

  • सुबह की सैर करने वालों की संख्या घटी।
  • बुजुर्ग और बच्चे अधिक प्रभावित हुए।
  • लोग अलाव और हीटर का सहारा ले रहे हैं।

🌾 कृषि क्षेत्र

  • फसलों पर ओस का असर बढ़ा।
  • सब्जियों और चने की फसल को ठंड से नुकसान की आशंका।
  • सिंचाई और कटाई के समय में बदलाव किया गया।

🏥 स्वास्थ्य

  • सर्दी, खांसी, जुकाम, दमा और हृदय रोगियों की समस्याएं बढ़ीं।
  • अस्पतालों में ओपीडी में वृद्धि देखी गई।

भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अगले 3–4 दिनों तक ठंड बनी रहने की संभावना है। न्यूनतम तापमान और गिर सकता है और शीतलहर का असर बढ़ सकता है। सुबह के समय कोहरा भी घना हो सकता है जिससे सड़क और रेल यातायात प्रभावित हो सकता है।

प्रशासन को सतर्क रहने और आम जनता को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।

निष्कर्ष / Conclusion

सिवनी जिले में 24 दिसंबर 2025 को दर्ज किया गया बीते 24 घंटों का तापमान यह स्पष्ट करता है कि इस वर्ष की ठंड सामान्य से अधिक तीव्र है। इसका प्रभाव जनजीवन, स्वास्थ्य, कृषि और प्रशासनिक व्यवस्था पर साफ दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ने की संभावना को देखते हुए सतर्कता, सावधानी और प्रशासनिक सक्रियता बेहद आवश्यक हो गई है।

यह मौसम न केवल एक प्राकृतिक परिवर्तन है बल्कि यह समाज के हर वर्ग को प्रभावित करने वाला कारक बन चुका है — और इसके प्रति जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा समाधान है।