(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)।सिवनी जिले में गौवंश तस्करी के खिलाफ पुलिस ने एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए 30 गौवंश को सुरक्षित मुक्त कराया है। कोतवाली थाना पुलिस द्वारा छिंदवाड़ा रोड बायपास ब्रिज पर की गई इस कार्रवाई में एक आईसर ट्रक को जब्त किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में गौवंशों को कथित रूप से क्रूरता पूर्वक भरकर ले जाया जा रहा था। पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में पशु संरक्षण और अवैध तस्करी पर अंकुश लगाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मामले में आरोपी मौके से फरार हो गए हैं, जिनकी तलाश पुलिस द्वारा लगातार की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह मामला गौवंश अधिनियम और पशु क्रूरता से संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज किया गया है।

मुखबिर की सूचना पर हुई घेराबंदी
जानकारी के अनुसार दिनांक 08 जून 2026 को कोतवाली पुलिस को मुखबिर के माध्यम से सूचना प्राप्त हुई थी कि एक आईसर ट्रक में बड़ी संख्या में गौवंशों को भरकर ले जाया जा रहा है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई।
छिंदवाड़ा रोड बायपास ब्रिज पर पुलिस टीम द्वारा घेराबंदी की गई। कुछ समय बाद वाहन क्रमांक MH29BE6477 को रोका गया। वाहन की जांच करने पर पुलिस को बड़ी संख्या में गौवंश मिले, जिन्हें अत्यंत संकुचित और अमानवीय परिस्थितियों में रखा गया था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार वाहन में कुल 30 गौवंश पाए गए, जिनमें 22 गाय एवं 8 नाटे शामिल थे।
अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हुए आरोपी
पुलिस जैसे ही ट्रक के पास पहुंची, वाहन में मौजूद आरोपी अंधेरे और रात्रि के समय का फायदा उठाकर मौके से भाग निकले। पुलिस ने आरोपियों को पकड़ने का प्रयास किया, लेकिन वे फरार होने में सफल रहे।
फिलहाल पुलिस वाहन के स्वामित्व, परिवहन मार्ग तथा इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। वाहन से प्राप्त दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की प्रक्रिया जारी है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि फरार आरोपियों तक जल्द पहुंचने के लिए विभिन्न स्तरों पर जांच की जा रही है।
पशु चिकित्सकीय परीक्षण के बाद गौशाला भेजे गए गौवंश
कार्रवाई के बाद पुलिस ने सभी गौवंशों को सुरक्षित कब्जे में लिया। पशुओं की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया।
पशु चिकित्सकों द्वारा परीक्षण के बाद सभी 30 गौवंशों को सुरक्षित रूप से दयोदय गौशाला, बीझावाड़ा में सुपुर्द किया गया। गौशाला प्रबंधन को पशुओं की देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी दूरी तक अत्यधिक भीड़भाड़ वाली स्थिति में पशुओं को ले जाना उनके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे मामलों में समय पर बचाव कार्रवाई पशुओं के जीवन की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में हुई कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक कृष्ण लालचंदानी के निर्देशन में संचालित की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दीपक मिश्रा तथा एसडीओपी सिवनी सचिन परते के मार्गदर्शन में कोतवाली पुलिस टीम ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया।
जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। इसी क्रम में गौवंश तस्करी के विरुद्ध विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
पुलिस विभाग का कहना है कि अवैध पशु परिवहन और पशु क्रूरता के मामलों में भविष्य में भी कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
कार्रवाई में शामिल रही पुलिस टीम
इस महत्वपूर्ण कार्रवाई में कोतवाली थाना पुलिस के कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने सक्रिय भूमिका निभाई।
कार्रवाई में शामिल प्रमुख अधिकारी एवं कर्मचारी:
- थाना प्रभारी सतीश तिवारी
- एसआई राजेश शर्मा
- एएसआई देवेंद्र जायसवाल (साइबर सेल)
- आरक्षक प्रतीक बघेल
- रविंद्र सिंह
- सौरभ सिंह
- लोकेश
- संतोष साहू
- रत्नेश
पुलिस टीम की तत्परता और समन्वित प्रयासों के कारण यह कार्रवाई सफल हो सकी।
जिले में गौवंश तस्करी पर बढ़ती निगरानी
पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न जिलों में अवैध पशु परिवहन और गौवंश तस्करी के मामलों को लेकर प्रशासन की सक्रियता बढ़ी है। पुलिस और प्रशासनिक एजेंसियां लगातार ऐसे नेटवर्क पर निगरानी रख रही हैं।
विशेष रूप से राज्य और अंतरराज्यीय सीमाओं से जुड़े मार्गों पर वाहनों की जांच बढ़ाई गई है। कई मामलों में मुखबिर तंत्र की सहायता से बड़ी कार्रवाइयां संभव हो पाई हैं।
सिवनी जिला भी महत्वपूर्ण परिवहन मार्गों से जुड़ा होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों की विशेष निगरानी में रहता है। ऐसे में पुलिस की यह कार्रवाई अवैध गतिविधियों के विरुद्ध सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।
सामाजिक और प्रशासनिक महत्व
गौवंश संरक्षण का विषय लंबे समय से सामाजिक, धार्मिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। पशु क्रूरता से जुड़े मामलों पर समाज में संवेदनशील प्रतिक्रिया देखने को मिलती है।
प्रशासनिक स्तर पर भी पशु संरक्षण कानूनों का पालन सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को दर्शाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध पशु परिवहन को रोकने के लिए केवल कार्रवाई ही नहीं बल्कि लगातार निगरानी, जन-जागरूकता और सूचना तंत्र को भी मजबूत करना आवश्यक है।
जांच के सामने प्रमुख चुनौतियां
फरार आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। हालांकि जब्त वाहन और उपलब्ध दस्तावेज जांच में महत्वपूर्ण सुराग प्रदान कर सकते हैं।
जांच एजेंसियां निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दे रही हैं:
- वाहन मालिक की पहचान
- परिवहन के वास्तविक गंतव्य की जानकारी
- नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका
- पशुओं के स्रोत की जांच
- संभावित अंतरराज्यीय कनेक्शन
इन सभी पहलुओं की जांच के बाद मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई
कोतवाली पुलिस की इस कार्रवाई की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में इसकी व्यापक चर्चा हो रही है। स्थानीय नागरिकों ने पशुओं को सुरक्षित बचाए जाने पर संतोष व्यक्त किया है।
सामाजिक संगठनों और पशु संरक्षण से जुड़े लोगों का मानना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ मजबूत संदेश जाता है। साथ ही यह कानून के प्रति विश्वास को भी मजबूत करती है।
आगे क्या हो सकता है?
पुलिस द्वारा फरार आरोपियों की तलाश जारी है। तकनीकी जांच, वाहन संबंधी रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
आने वाले दिनों में:
- आरोपियों की पहचान उजागर हो सकती है।
- गिरफ्तारियां होने की संभावना है।
- नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
- गौवंश तस्करी से संबंधित अतिरिक्त जानकारी सामने आ सकती है।
जांच की प्रगति पर प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की नजर बनी हुई है।
सिवनी कोतवाली पुलिस द्वारा 30 गौवंशों को मुक्त कराना जिले में पशु संरक्षण और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है। समय पर मिली सूचना, त्वरित पुलिस कार्रवाई और समन्वित प्रयासों के कारण बड़ी संख्या में गौवंशों को सुरक्षित बचाया जा सका। हालांकि आरोपी अभी फरार हैं, लेकिन पुलिस की जांच जारी है और जल्द ही मामले में महत्वपूर्ण प्रगति की उम्मीद की जा रही है। यह कार्रवाई स्पष्ट संकेत देती है कि अवैध पशु परिवहन और पशु क्रूरता जैसे मामलों के खिलाफ प्रशासन सख्त रुख अपनाए हुए है।

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