एक बड़े से मंच पर माइक संभाले खड़े थे हमारे अपने संता।
भीड़ ध्यान से सुन रही थी, क्योंकि विषय था—गंभीर।
संता पूरे जोश में बोले—
“आत्महत्या करना बहुत गलत बात है,ये पाप है,कमजोरी है और कायरता है।”
लोग सिर हिलाने लगे—वाह, आज तो संता बहुत समझदार लग रहा है।
फिर संता ने आगे जो कहा,
वो सुनकर पंडाल में बैठे लोग एक-दूसरे का मुंह देखने लगे—
“आत्महत्या करने से तो अच्छा है कि इंसान…”
संता रुके, गला खंखारा और बोले—
“…अरे छोड़ो! रहने दो,बात समझ ही नहीं आई तो भाषण भी यहीं खत्म!”
यही होता है संता का ज्ञान—
शुरुआत गंभीर,
और अंत पूरा गोल!
😄 अब कुछ और हल्के-फुल्के जोक्स
पति–पत्नी जोक
पति: आज तुम बहुत सुंदर लग रही हो।
पत्नी: सच?
पति: हां, आज चश्मा नहीं पहना है।
दोस्त–दोस्त जोक
दोस्त: यार दिमाग काम नहीं कर रहा।
दूसरा दोस्त: कोई बात नहीं, वारंटी में तो नहीं आता।
टीचर–स्टूडेंट जोक
टीचर: सबसे ज्यादा खुश कौन रहता है?
स्टूडेंट: सर, वो जो होमवर्क भूल जाता है।
बॉस–कर्मचारी जोक
बॉस: देर से क्यों आए?
कर्मचारी: सर, घड़ी आगे चल रही थी, मैं पीछे।
😂 हंसी बढ़ाने वाले बुलेट पॉइंट
- संता का ज्ञान = 100% कन्फ्यूजन
- भाषण छोटा, असर ज़बरदस्त
- लॉजिक ऐसा कि दिमाग भी छुट्टी ले ले
- देसी हास्य जो दिल से हंसाता है
8️⃣ Conclusion /निष्कर्ष
संता के जोक्स हमें यही सिखाते हैं कि
हर बात को ज़्यादा गंभीर लेने की ज़रूरत नहीं।
कभी-कभी उल्टा-सीधा लॉजिक ही
सबसे बड़ी हंसी की वजह बन जाता है।
आख़िरी पंचलाइन:
“जब बात समझ न आए,
तो समझदार बनकर चुप हो जाना भी एक कला है…
संता से सीखिए!” 😄
एक मंच पे संता आत्महत्या के उपर भाषण दे रहा था।
संता : आत्महत्या करना पाप है,बुझदिली है,कायरता है और बहुत बड़ा गुनाह है।
आत्महत्या करने से तो अच्छा है की इंसान अपने आप को गोली मार ले।
(साई फीचर्स)

मौसम विभाग पर जमकर पकड़, लगभग दो दशकों से मौसम का सटीक पूर्वानुमान जारी करने के लिए पहचाने जाते हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 20 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय महेश रावलानी वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
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