(अशोक सोनी)
सिवनी (साई)। मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में स्वास्थ्य विभाग ने मेलिओइडोसिस (Melioidosis) बीमारी के खतरे को देखते हुए विशेष एडवाइजरी जारी की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जयपाल सिंह ठाकुर ने जानकारी दी कि यह गंभीर संक्रामक रोग है, जो Burkholderia pseudomallei नामक जीवाणु के कारण फैलता है। यह जीवाणु सामान्यतः मिट्टी और पानी में पाया जाता है और वर्षा ऋतु में इसका खतरा अधिक बढ़ जाता है।
मेलिओइडोसिस बीमारी की खासियत यह है कि इसका संक्रमण धीरे-धीरे फैलता है, लेकिन लापरवाही बरतने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। किसानों, मजदूरों और उन लोगों में इसका खतरा अधिक है जो सीधे मिट्टी और गंदे पानी से संपर्क में रहते हैं।
✦ मेलिओइडोसिस क्या है?
मेलिओइडोसिस (Melioidosis) एक बैक्टीरियल संक्रामक रोग है जो मुख्यतः:
- मिट्टी (Soil)
- गंदे या दूषित पानी (Contaminated Water)
के संपर्क से फैलता है। Burkholderia pseudomallei नामक जीवाणु इसका मुख्य कारण है।
यह रोग किसी भी आयु वर्ग के लोगों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन मधुमेह,गुर्दे और फेफड़े के रोगियों के लिए यह अत्यंत खतरनाक माना जाता है।
✦ भारत में मेलिओइडोसिस का खतरा क्यों?
- भारत की पर्यावरणीय परिस्थितियाँ (गर्म और आर्द्र जलवायु) इस जीवाणु के पनपने के लिए अनुकूल हैं।
- देश में मधुमेह रोगियों की संख्या अधिक होने से यह बीमारी तेजी से फैल सकती है।
- वर्षा ऋतु और धान की खेती वाले इलाकों में यह रोग अधिक सक्रिय रहता है।
एम्स भोपाल द्वारा किए गए अध्ययन में यह पाया गया कि धान के खेतों में कार्यरत किसान संक्रमित मिट्टी और पानी के संपर्क से मेलिओइडोसिस के शिकार हो सकते हैं।
✦ मेलिओइडोसिस के लक्षण
यह बीमारी अलग-अलग रूपों में सामने आती है। इसके कुछ सामान्य लक्षण हैं:
- लगातार तेज बुखार।
- फेफड़ों का संक्रमण, खाँसी और सांस लेने में तकलीफ।
- शरीर पर फोड़े-फुंसी या घाव का ठीक न होना।
- कमजोरी और थकान।
- कभी-कभी सेप्सिस (रक्त संक्रमण) जैसी गंभीर स्थिति।
✦ संक्रमण का तरीका (Mode of Transmission)
- संक्रमित मिट्टी या पानी के संपर्क में आने से।
- खेतों में नंगे पैर चलने पर।
- खुले घाव से बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
- दूषित पानी पीने से।
✦ जोखिम वाले समूह (High-Risk Groups)
- किसान और खेतिहर मजदूर – धान की खेती और गीले खेतों में काम करने वाले।
- मधुमेह रोगी – संक्रमण का खतरा अधिक।
- गुर्दा और फेफड़े के रोगी।
- कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग।
✦ स्वास्थ्य विभाग की सलाह
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने आम जनता और विशेष रूप से किसानों को यह सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- खेतों में कार्य करते समय रबड़ के जूते और दस्ताने पहनें।
- केवल उबला हुआ या क्लोरीन युक्त पानी ही पिएं।
- शरीर पर घाव या चोट होने पर उसे ढकें और गंदे पानी से बचें।
- लगातार बुखार, फेफड़ों में संक्रमण या फोड़े-फुंसी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
- उच्च जोखिम वाले किसान और मजदूर व्यावसायिक सुरक्षा उपायों का पालन करें।
✦ रोकथाम के उपाय
- सुरक्षित पानी का उपयोग – केवल साफ, उबला हुआ और फिल्टर किया गया पानी पिएं।
- पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) – खेतों में काम करते समय बूट, दस्ताने और मास्क का इस्तेमाल।
- घाव की देखभाल – यदि शरीर पर कोई घाव है तो तुरंत सफाई और पट्टी करें।
- जागरूकता अभियान – ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को इस बीमारी के बारे में शिक्षित करना।
- स्वास्थ्य जांच – संदिग्ध लक्षण होने पर तत्काल जांच और इलाज कराना।
✦ मेलिओइडोसिस का उपचार
- मेलिओइडोसिस का इलाज एंटीबायोटिक दवाओं से संभव है, लेकिन यह लंबे समय तक चल सकता है।
- शुरुआती पहचान और इलाज से इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
- देर से इलाज कराने पर यह रोग गंभीर रूप ले लेता है।
✦ सिवनी स्वास्थ्य विभाग की भूमिका
सिवनी जिला स्वास्थ्य विभाग ने यह कदम उठाया है:
- ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जागरूकता फैलाना।
- किसानों को सुरक्षा उपायों के प्रति प्रेरित करना।
- प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों को सतर्क करना।
- एडवाइजरी के माध्यम से जनजागरण करना।
✦ सामाजिक महत्व
यह एडवाइजरी केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि समाज को सुरक्षित रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। किसानों और मजदूरों को स्वास्थ्य सुरक्षा का महत्व समझाने से उनकी जिंदगी और उत्पादकता दोनों सुरक्षित रह सकती हैं।
✅निष्कर्ष
मेलिओइडोसिस एक गंभीर लेकिन रोकथाम योग्य संक्रामक रोग है। यह मिट्टी और दूषित पानी से फैलता है और विशेष रूप से किसानों तथा मधुमेह रोगियों के लिए खतरा पैदा करता है। सिवनी स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी न केवल इस रोग की जानकारी देती है बल्कि आम जनता को सुरक्षित जीवनशैली अपनाने की भी प्रेरणा देती है।
यदि लोग सुरक्षित पानी,व्यक्तिगत स्वच्छता और खेतों में काम करते समय सुरक्षा साधनों का उपयोग करें तो इस रोग से बचाव संभव है। समय रहते लक्षणों की पहचान और चिकित्सकीय परामर्श ही इसका सबसे बड़ा उपचार है।

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया में फोटोज, वीडियोज, ग्राफिक्स आदि को सफलता पूर्वक हेंडल करने वाले अशोक सोनी, नगर ब्यूरो में कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 20 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय अशोक सोनी वर्तमान में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत हैं .
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