भारतीय घरों में पालतू जानवर सिर्फ जानवर नहीं होते,
वो पूरे घर की दिनचर्या का हिस्सा बन जाते हैं।
कहीं कुत्ता चौकीदार बन जाता है,
तो कहीं बिल्ली दूध की निगरानी करती नजर आती है।
एक ऐसे ही घर में अचानक पालतू बिल्ली का देहांत हो गया।
घर में मातम का माहौल था,
लेकिन सबसे ज़्यादा रो-रोकर बुरा हाल नौकर का था।
आँसू ऐसे बह रहे थे जैसे कोई अपना बिछुड़ गया हो।
मालिक से रहा नहीं गया और उसने पूछ ही लिया—
मालिक: अरे! बिल्ली के लिए तुम इतना क्यों रो रहे हो?
नौकर: क्या कहूँ साहब, मैं तो लुट गया…
अब सारा दूध पीने के बाद मैं किसका नाम लगाऊँगा!
बस फिर क्या था…
मालिक समझ गया कि घर की बिल्ली सिर्फ पालतू नहीं थी,
बल्कि दूध “मैनेजमेंट सिस्टम” की रीढ़ थी। 😄
दरअसल, देसी घरों में ऐसे किस्से आम हैं।
जहाँ गलती का ठीकरा किसी और के सिर फोड़ना
एक कला की तरह सीखी जाती है।
कुछ और रोज़मर्रा के मजेदार डायलॉग—
पति-पत्नी जोक:
पत्नी: दूध आधा क्यों है?
पति: बिल्ली ने पी लिया होगा।
बिल्ली (मन में): मुझे बदनाम मत करो!
दोस्त-दोस्त जोक:
दोस्त1: तेरे घर दूध जल्दी खत्म क्यों हो जाता है?
दोस्त2: हमारी बिल्ली बहुत हेल्दी है।
टीचर-स्टूडेंट जोक:
टीचर: होमवर्क क्यों नहीं किया?
स्टूडेंट: सर, बिल्ली कॉपी पर सो गई थी।
बॉस-कर्मचारी जोक:
बॉस: काम अधूरा क्यों है?
कर्मचारी: सर, सिस्टम डाउन था… बिल्ली की वजह से।
इस पूरे मामले से कुछ “घरैलू सच” सामने आते हैं—
- बिल्ली सिर्फ पालतू नहीं, बहाना भी होती है
- दूध कम हो तो शक हमेशा उसी पर
- असली खिलाड़ी चुपचाप खेल जाता है
- और पकड़ा वही जाता है जो बोलता है
यही तो है देसी कॉमेडी की खूबसूरती।
छोटी-सी बात, लेकिन हँसी का बड़ा कारण।
- Conclusion (निष्कर्ष)
अंत में यही कहा जा सकता है कि बिल्ली भले चली गई,
लेकिन उसकी यादें और “दूध कांड” अमर हो गए।
और सीख यही है—
जहाँ दूध गायब हो,वहाँ बिल्ली नहीं…दिमाग तलाशिए!😂
घर की पालतू बिल्ली के अचानक मर जाने पर नौकर जोर-जोर से रो रहा था।
उसे देखकर मालिक ने पूछा,अरे! बिल्ली के लिए तुम इतना क्यों रो रहे हो?
नौकर – क्या कहूं साहब,मैं तो लुट गया। अब सारा दूध पीने के बाद मैं किसका नाम लगाऊंगा।
(साई फीचर्स)

लगभग 16 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के सिवनी ब्यूरो के रूप में लगभग 12 सालों से कार्यरत हैं.
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