घर के आंगन में दादा जी बैठे थे। अचानक उन्हें प्यास लगी।
उन्होंने प्यार से आवाज लगाई,
“अरे बेटा, ज़रा पानी ले आओ।”
पहला पोता मोबाइल पर गेम खेल रहा था। बिना सिर उठाए बोला,
“नहीं दादा जी, अभी मैं गेम खेल रहा हूं। आप किसी और को कह दो।”
दादा जी ने सोचा, चलो दूसरे से उम्मीद रखते हैं।
दूसरे पोते से बोले,
“बेटा, तू ही पानी ला दे।”
दूसरा पोता बड़े ज्ञान के साथ बोला,
“अरे छोड़ो दादा जी, ये तो बदतमीज है।
आप खुद ही जाकर ले लो!”
दादा जी मन ही मन बोले—
हमारे ज़माने में बच्चे पैर दबाते थे,आज सलाह देते हैं।
😂 अब कुछ और पारिवारिक और रोजमर्रा के ठहाके
पति-पत्नी जोक
पति: आज खाना जल्दी क्यों बना लिया?
पत्नी: ताकि तुम जल्दी खाकर चुप हो जाओ।
दोस्त-दोस्त जोक
दोस्त: यार तू इतना परेशान क्यों रहता है?
दूसरा दोस्त: क्योंकि मैं सिंगल हूं।
दोस्त: तो खुश रहना चाहिए!
दूसरा दोस्त: तभी तो परेशान हूं, लोग जलते हैं।
टीचर-स्टूडेंट जोक
टीचर: बताओ, सबसे बड़ा हथियार क्या है?
स्टूडेंट: मोबाइल का अलार्म, सर…
नींद भी तोड़ देता है!
बॉस-कर्मचारी जोक
बॉस: काम में मन क्यों नहीं लगता?
कर्मचारी: सर, तनख्वाह दिल से नहीं मिलती।
😄 हंसी बढ़ाने वाले बुलेट पॉइंट
- आजकल बच्चे पानी कम, सलाह ज्यादा देते हैं
- मोबाइल गेम के सामने दादा जी भी वेटिंग लिस्ट में
- बदतमीज कौन है, ये तय करने का हक सबको है
- बुजुर्गों का धैर्य, WiFi से भी ज्यादा मजबूत होता है
8️⃣ Conclusion /निष्कर्ष
दादा जी और पोतों की यह मासूम नोकझोंक आज के बदलते पारिवारिक माहौल की मजेदार तस्वीर पेश करती है।
जहां पहले सेवा होती थी, अब सुझाव मिलते हैं—वो भी पूरे आत्मविश्वास के साथ।
आखिरी पंचलाइन:
“दादा जी ने आखिर पानी खुद ही पी लिया,
लेकिन पोतों की बातें सुनकर हंसी फ्री में मिल गई!” 😄
दादा जी को प्यास लगती है और वो अपने पोतो से पानी मांगते है।
पहला पोता : नहीं दादा जी अभी में गेम खेल रहा हूँ आप किसी और को कह दो।
दूसरा पोता : अरे छोड़ो दादा जी ये तो बदतमीज है,आप खुद ही जाके ले लो।
(साई फीचर्स)

लगभग 20 वर्षों से पत्रकारिता क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं। दैनिक हिन्द गजट के संपादक हैं, एवं समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के लिए लेखन का कार्य करते हैं . . .
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