दबे व सधे पांव बहुत करीने से आगे बढ़ते दिख रहे शिवराज सिंह चौहान

इस बैठक के बारे में पुष्टि करते हुए संघ के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि दिल्ली के झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय केशव कुंज में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से लगभग 50 मिनिट तक वन टू वन चर्चा की है।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए दिख रहा शिवराज का नाम सबसे आगे
(लिमटी खरे)
45 सालों में भारतीय जनता पार्टी का बारहवां अध्यक्ष कौन बनेगा, इसे लेकर सभी दिल थामकर ही बैठे हैं। अब तक हुए 11 अध्यक्षों में दो अध्यक्ष देश के हृदय प्रदेश के द्वारा दिए गए हैं। इनमें पहले थे 1980 से 1986 तक भाजपा की कमान संभालने वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और दूसरे थे 1998 से 2000 तक भाजपाध्यक्ष रहे कुशाभाऊ ठाकरे। हालात देखकर यही लगने लगा है कि भाजपा को अब तीसरा राष्ट्रीय अध्यक्ष भी मध्य प्रदेश से मिल सकता है।
भाजपा के अध्यक्ष को लेकर सुगबुगाहट कभी थमी रहती है तो कभी एकाएक सरगर्मियां बढ़ जाती हैं। जब भी भाजपा के अध्यक्ष की चर्चाएं देश की राजनैतिक राजधानी में चलतीं हैं तब एक नए नाम का सियासी परिदृश्य में उदय होता है और कुछ समय बाद वह नाम ठण्डे बस्ते के हवाले ही हो जाता है।
फिलहाल, जिस तरह से पार्टी अध्यक्ष के लिए चर्चाओं का बाजार गर्माया है वह अकारण तो नहीं ही माना जा सकता है। इस बार चर्चाओं के केंद्र में हैं मध्य प्रदेश के निजाम रह चुके शिवराज सिंह चौहान। उनका नाम इसलिए भी चर्चाओं में आया क्योंकि हाल ही में शिवराज सिंह चौहान के द्वारा संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ वन टू वन चर्चा की है।
इस बैठक के बारे में पुष्टि करते हुए संघ के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि दिल्ली के झंडेवालान स्थित संघ मुख्यालय केशव कुंज में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत से लगभग 50 मिनिट तक वन टू वन चर्चा की है।
सूत्रों ने इस बात के संकेत भी दिए हैं कि शिवराज सिंह चौहान की संघ प्रमुख से यह भेंट इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है क्योंकि वे लगभग दो सालों के उपरांत संघ प्रमुख से मिले हैं। यह भी हो सकता है शिवराज सिंह चौहान के पुराने ट्रेक रिकार्ड को देखते हुए संघ उन्हें किसी नए दायित्व को सौंपने की मंशा रख रहा हो।
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि शिवराज सिंह चौहान का शुमार संघ के प्रिय नेताओं में है। यही कारण है कि शिवराज सिंह चौहान लगभग 16 सालों तक बिना किसी विध्न के मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज रहे। एमपी में उन्हें पदच्युत करने की न जाने कितनी चर्चाएं चलीं पर उनके विरोधियों की हर तिकड़म को उन्होंने विफल कर दिया था, यही कारण था कि उनकी कुर्सी के चारों पायों में से एक भी पाया खिसकाने का जतन उनके विरोधी नहीं कर पाए।
आपको याद होगा कि 2023 में हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद शिवराज सिंह चौहान को हटाकर डॉ. मोहन यादव को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था। उस समय भी शिवराज सिंह चौहान का नाम भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए तेजी से चलने लगा था। यद्यपि 2024 में हुए लोकसभा चुनावों के चलते भाजपा के अध्यक्ष जे.पी. नड्डा का कार्यकाल बढ़ाते हुए अध्यक्ष के चुनाव का फैसला कुछ समय के लिए टाल दिया गया था।
इसके उपरांत अभी तक जे.पी. नड्डा भाजपाध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज हैं। भाजपा के उच्च पदस्थ सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इसके पीछे यही वजह है कि अध्यक्ष के लिए नरेंद्र मोदी और संघ के बीच किसी भी नाम पर सहमति अब तक नहीं बन पाई है। सूत्रों का कहना है कि भले ही अध्यक्ष के नाम का ऐलान चुनाव के उपरांत पार्टी के द्वारा औपचारिक तौर पर किया जाता हो पर इसमें अंतिम मुहर संघ की ही लगती है उसके बाद ही नाम की घोषणा संभव हो पाती है।
सूत्रों का यह भी कहना है कि जे.पी. नड्डा के चुनाव के वक्त यह परंपरा आंशिक रूप से टूट गई थी, क्योंकि नरेंद्र मोदी के द्वारा केंद्र में पहली बार पूर्ण बहुमत में सरकार का गठन कराया गया था, पर हाल ही में 2024 में हुए चुनावों के दौरान नरेंद्र मोदी पूर्ण बहुमत लाने से चूक गए हैं। यही कारण है कि अब अध्यक्ष के मामले में संघ का दखल बढ़ता दिख रहा है, ताकि पुरानी परंपरा को पुर्नस्थापित किया जा सके।
वहीं, सियासी बियावान में चल रही चर्चाओं पर अगर यकीन किया जाए तो इस महीने की 09 तारीख को जयदीप धनकड़ के त्यागपत्र के बाद रिक्त हुए उपराष्ट्रपति पद के चुनावों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किसी भी क्षण भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जा सकती है . . .
(साई फीचर्स)