पूर्व सांसदों को कितनी पेंशन और कौन-कौन सी सुविधाएं मिलती हैं? MP Pension Rules पर पूरी रिपोर्ट

भारत में पूर्व सांसदों को मिलने वाली पेंशन और सुविधाएं लंबे समय से सार्वजनिक चर्चा का विषय रही हैं। कानून के तहत सांसद बनने के बाद न्यूनतम सेवा अवधि पूरी करने पर पेंशन और कुछ आजीवन लाभ दिए जाते हैं। जहां सरकार इसे सम्मान और अनुभव का प्रतिफल मानती है, वहीं समाज का एक वर्ग इसे असमानता से जोड़कर देखता है। यह रिपोर्ट पूर्व सांसदों की पेंशन, सुविधाओं, सुरक्षा और उस पर हो रही बहस का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है।

भारतीय लोकतंत्र में संसद सदस्य का पद न केवल राजनीतिक बल्कि संवैधानिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। संसद में देश की नीतियां तय होती हैं और जनहित से जुड़े कानून बनाए जाते हैं। इसी भूमिका को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने सांसदों के लिए वेतन, भत्ते और पेंशन की व्यवस्था की है। हालांकि, जब बात पूर्व सांसदों को मिलने वाली सुविधाओं की आती है, तो यह विषय अक्सर सार्वजनिक बहस और आलोचना के केंद्र में आ जाता है।

पृष्ठभूमि: सांसद पेंशन व्यवस्था की शुरुआत

भारत में सांसदों की पेंशन व्यवस्था संसद सदस्य वेतन, भत्ता और पेंशन अधिनियम, 1954 के अंतर्गत आती है। इस कानून का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि संसद में सेवा देने के बाद जनप्रतिनिधियों को आर्थिक असुरक्षा का सामना न करना पड़े। समय-समय पर इसमें संशोधन भी किए गए हैं, जिससे पेंशन राशि और नियमों में बदलाव हुआ है।

पूर्व सांसदों की मूल पेंशन: नियम और गणना

कानून के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कम से कम 5वर्ष तक लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य रहा है, तो वह पेंशन का पात्र होता है।

  • मूल पेंशन: ₹25,000 प्रति माह
  • यह राशि पूरी तरह वैधानिक है और केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित है।

यदि सांसद का कार्यकाल 5 वर्ष से अधिक रहा है, तो अतिरिक्त वर्षों के लिए अतिरिक्त पेंशन का प्रावधान है।

  • प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष पर: ₹2,000 प्रति माह

उदाहरण के तौर पर:
यदि कोई सांसद 10 वर्ष तक संसद का सदस्य रहा—

  • मूल पेंशन: ₹25,000
  • अतिरिक्त 5 वर्ष × ₹2,000 = ₹10,000
  • कुल पेंशन: ₹35,000 प्रति माह

यात्रा सुविधाएं: आजीवन रेल पास

पूर्व सांसदों को मिलने वाली सबसे चर्चित सुविधाओं में से एक है आजीवन रेल यात्रा पास

  • फर्स्ट क्लास या एसी-2 टियर में यात्रा
  • भारत के किसी भी हिस्से में यात्रा की अनुमति
  • पास की वैधता जीवनपर्यंत

यह सुविधा इसलिए आलोचना का विषय बनती है क्योंकि इसमें आय सीमा या आवश्यकता आधारित कोई जांच नहीं होती, जबकि आम नागरिकों को ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं है।

चिकित्सा सुविधाएं:CGHSके तहत लाभ

पूर्व सांसदों को चिकित्सा के क्षेत्र में भी सरकारी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। ये सुविधाएं मुख्य रूप से Central Government Health Scheme (CGHS) के अंतर्गत आती हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • सरकारी अस्पतालों में निःशुल्क या रियायती इलाज
  • CGHS से मान्यता प्राप्त निजी अस्पतालों में उपचार
  • दवाइयों की प्रतिपूर्ति
  • स्वयं के साथ-साथ जीवनसाथी के लिए चिकित्सा लाभ

टेलीफोन और संचार सुविधाएं

पूर्व सांसदों को कुछ सीमित संचार सुविधाएं भी मिल सकती हैं, हालांकि यह सक्रिय सांसदों जितनी व्यापक नहीं होती।

  • सीमित अवधि के लिए टेलीफोन सुविधा
  • सरकारी अतिथि गृहों में संचार व्यवस्था
  • संसद भवन और उससे जुड़ी सुविधाओं में प्रवेश पास

सरकारी आवास: क्या मिलता है और क्या नहीं

सामान्य नियमों के अनुसार—

  • पूर्व सांसदों को नियमित सरकारी आवास नहीं मिलता
  • कार्यकाल समाप्त होने के 1 महीने के भीतर आवास खाली करना अनिवार्य होता है

हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में अल्पकालिक विस्तार या विशेष अनुमति दी जा सकती है, खासकर यदि व्यक्ति किसी संवैधानिक पद पर रह चुका हो।

कार्यालय और स्टाफ सुविधा

यह स्पष्ट नियम है कि पूर्व सांसदों को—

  • कोई स्थायी कार्यालय
  • निजी स्टाफ
  • सरकारी सचिवालय सहायता

नहीं मिलती। ये सुविधाएं केवल वर्तमान सांसदों तक सीमित रहती हैं।

एक से अधिक पेंशन का नियम

यदि कोई व्यक्ति—

  • पूर्व सांसद रहा हो
  • और साथ ही विधायक, मंत्री या मुख्यमंत्री भी रहा हो

तो उसे केवल एक पेंशन चुनने का अधिकार होता है। दो पेंशन एक साथ लेने की अनुमति नहीं है।

सरकारी खर्च और आर्थिक बोझ

सरकारी आंकड़ों के अनुसार—

  • हर वर्ष पूर्व सांसदों की पेंशन और सुविधाओं पर कई सौ करोड़ रुपये खर्च होते हैं
  • समय के साथ यह राशि बढ़ रही है, क्योंकि पूर्व सांसदों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है

यही कारण है कि यह मुद्दा वित्तीय पारदर्शिता और सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ जाता है।

आलोचना और सार्वजनिक बहस

पूर्व सांसदों को मिलने वाली सुविधाओं को लेकर समाज में कई सवाल उठते हैं:

  • आम नागरिक को जीवनभर पेंशन नहीं
  • एक ही कार्यकाल के बाद पेंशन
  • महंगाई से स्वतः जुड़ा संशोधन
  • निजी क्षेत्र के कर्मचारियों से तुलना

कई अर्थशास्त्रियों और सामाजिक संगठनों का मानना है कि पेंशन को सेवा अवधि,आय और वास्तविक आवश्यकता से जोड़ा जाना चाहिए।

सरकार का पक्ष

सरकार का तर्क अलग है। उसके अनुसार—

  • सांसद राष्ट्र की सेवा करते हैं
  • निजी जीवन और पेशे में कई त्याग करने पड़ते हैं
  • राजनीतिक जीवन अनिश्चित होता है
  • पेंशन अनुभव और योगदान का सम्मान है

सरकार इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती से जोड़कर देखती है।

पूर्व सांसदों की सुरक्षा: कानूनी स्थिति

एक आम धारणा के विपरीत, किसी भी पूर्व सांसद को आजीवन सुरक्षा या गनमैन का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।

  • सुरक्षा कोई अधिकार नहीं
  • यह केवल Threat Perception यानी खतरे के आकलन पर आधारित प्रशासनिक सुविधा है

सुरक्षा देने का आधार क्या है

सरकारी सुरक्षा इन आधारों पर तय होती है:

  • खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट
  • पुलिस का खतरा आकलन
  • वास्तविक जान का खतरा
  • आतंकवाद, उग्रवाद या संगठित अपराध से जोखिम

मध्य प्रदेश में सुरक्षा निर्णय की प्रक्रिया

राज्य स्तर पर निर्णय इनकी संयुक्त रिपोर्ट से होता है:

  • गृह विभाग, मध्य प्रदेश
  • पुलिस मुख्यालय (PHQ)
  • जिला पुलिस अधीक्षक (SP)

सुरक्षा स्तर और उसकी समीक्षा

यदि खतरा प्रमाणित हो जाए, तो—

  • 1 या 2 सुरक्षा कर्मी
  • कार्यक्रम या यात्रा के दौरान सुरक्षा
  • स्थायी सुरक्षा केवल अत्यंत दुर्लभ मामलों में

यह सुरक्षा समय-समय पर समीक्षा के बाद हटाई भी जा सकती है।

न्यायालयों का दृष्टिकोण

अदालतों ने कई मामलों में स्पष्ट किया है कि—

“सरकारी सुरक्षा कोई विशेषाधिकार नहीं है, यह केवल वास्तविक खतरे की स्थिति में दी जा सकती है।”

8 निष्कर्ष

भारत में पूर्व संसद सदस्यों को मिलने वाली पेंशन और सुविधाएं पूरी तरह कानूनसम्मत और संस्थागत रूप से स्वीकृत हैं। हालांकि, बदलते समय में इन पर पुनर्विचार, पारदर्शिता और संतुलन की मांग भी तेज हो रही है। लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि जनप्रतिनिधियों को सम्मान मिले, लेकिन साथ ही सार्वजनिक धन के उपयोग में न्यायसंगत संतुलन भी बना रहे। आने वाले समय में यही संतुलन इस व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

(साई फीचर्स)