उत्पादन, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए एक परिवर्तनकारी पहल
प्रमुख बिंदु
पीएलआई योजना ने 14 प्रमुख क्षेत्रों में ₹1.76 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित किया है।
पीएलआई लाभार्थियों की कुल बिक्री ₹16.5 लाख करोड़ को पार कर चुकी है।
इस योजना ने 12 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।
परिचय: भारत की विकास गाथा में एक नया अध्याय
भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर एक मौन क्रांति से गुजर रहा है, जिसके केंद्र में उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना है। ₹1.97 लाख करोड़ के परिव्यय के साथ, यह योजना सिर्फ एक आर्थिक पैकेज नहीं, बल्कि भारत को दुनिया की शीर्ष औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनाने की एक रणनीतिक पहल है। 14 क्षेत्रों में 806 अनुमोदित आवेदनों के साथ, यह योजना उद्योग के विश्वास को दर्शाती है।
यह योजना ‘आत्मनिर्भर भारत‘ और ‘मेक इन इंडिया‘ जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों को आगे बढ़ाती है। यह घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को पुनर्जीवित करती है और मोबाइल फोन व इलेक्ट्रॉनिक्स के स्थानीय उत्पादन को बढ़ाकर ‘डिजिटल इंडिया‘ को सशक्त बनाती है। इसके अलावा, यह भारत सेमीकंडक्टर मिशन के साथ मिलकर ₹76,000 करोड़ के पैकेज के तहत सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देती है।
पृष्ठभूमि: पीएलआई योजना की शुरुआत
भारत की अर्थव्यवस्था लंबे समय से सेवा क्षेत्र पर निर्भर रही है, जो जीडीपी में 50% से अधिक का योगदान देता है। इस असंतुलन को दूर करने के लिए, सरकार ने 2020 में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पीएलआई योजना शुरू की।
इस योजना की शुरुआत अप्रैल 2020 में मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक घटकों और चिकित्सा उपकरणों से हुई थी। इसकी सफलता को देखते हुए, इसे 13 और प्रमुख क्षेत्रों में विस्तारित किया गया, जिनमें फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, श्वेत वस्तुएं और विशेष स्टील शामिल हैं। नवंबर 2024 तक, योजना के तहत प्रतिबद्ध निवेश ₹1.61 लाख करोड़ तक पहुँच गया था, जो मार्च 2025 तक बढ़कर ₹1.76 लाख करोड़ हो गया।
क्षेत्र-आधारित कवरेज: चिप से लेकर केमिकल तक
पीएलआई योजना 14 महत्वपूर्ण क्षेत्रों को कवर करती है, जिनमें से कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं:
- इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग:
यह क्षेत्र पीएलआई की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक है। इसकी वजह से उत्पादन में 146% की वृद्धि हुई है, जो वित्त वर्ष 2020-21 में ₹2.13 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में ₹5.25 लाख करोड़ हो गया है। पीएलआई ने प्रमुख स्मार्टफोन कंपनियों को अपना उत्पादन भारत में स्थानांतरित करने के लिए प्रोत्साहित किया है, जिससे भारत एक प्रमुख मोबाइल फोन विनिर्माण देश बन गया है।
- ऑटोमोबाइल और ऑटो घटक:
इस क्षेत्र में ₹67,690 करोड़ के निवेश की प्रतिबद्धता मिली है। मार्च 2024 तक, ₹14,043 करोड़ का निवेश हो चुका है, जिससे 28,884 से अधिक रोजगार सृजित हुए हैं। यह योजना भारत को वैश्विक ईवी (इलेक्ट्रिक वाहन) और स्वच्छ-तकनीक केंद्र बनाने का लक्ष्य रखती है।
- खाद्य प्रसंस्करण:
अक्टूबर 2024 तक इस क्षेत्र में ₹8,910 करोड़ से अधिक का निवेश हुआ है। यह योजना भारतीय खाद्य उत्पादों की ब्रांडिंग को बेहतर बनाने और निर्यात बढ़ाने में सहायक है।
- फार्मास्यूटिकल दवाएं:
एक समय कच्चे माल के आयात पर निर्भर रहने वाला यह क्षेत्र अब आत्मनिर्भर बन रहा है। भारत थोक दवाओं का शुद्ध आयातक (वित्त वर्ष 2021-22 में ₹1,930 करोड़ का घाटा) से शुद्ध निर्यातक (वित्त वर्ष 2024-25 में ₹2,280 करोड़ का अधिशेष) बन गया है।
- सौर पीवी मॉड्यूल:
इस योजना का उद्देश्य 48 गीगावाट की एकीकृत विनिर्माण क्षमता का निर्माण करना है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी। ₹48,120 करोड़ के निवेश के साथ, 30 जून 2025 तक लगभग 38,500 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
. सेमीकंडक्टर:
भारत सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) के तहत, छह सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को मंजूरी मिली है। इससे 2,034 कुशल पेशेवरों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने और व्यापक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
- कपड़ा:
कपड़ा उद्योग को आकार और प्रतिस्पर्धात्मकता देने के लिए ₹10,683 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इससे तकनीकी वस्त्रों और मानव निर्मित रेशे (एमएमएफ) का निर्यात बढ़ा है।
- श्वेत वस्तुएं (एसी और एलईडी लाइटें):
₹6,238 करोड़ के परिव्यय वाली यह योजना भारत को एक असेंबली हब से उच्च-मूल्य वाले विनिर्माण आधार में बदल रही है, जिसका लक्ष्य 2028-29 तक घरेलू मूल्यवर्धन को 75-80% तक बढ़ाना है।
अब तक का प्रदर्शन और प्रभाव
नवंबर 2024 तक, इस योजना ने ₹1.61 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित किया, जो मार्च 2025 तक ₹1.76 लाख करोड़ तक पहुंच गया। पीएलआई प्रतिभागियों की कुल बिक्री ₹16.5 लाख करोड़ से अधिक रही है।
इस योजना ने 12 लाख से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा किए हैं। इसने भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की एक नई लहर को भी उत्प्रेरित किया है। सरकार ने 2025-26 में पीएलआई योजना के लिए बजट आवंटन में भारी बढ़ोतरी की है, जो घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
निष्कर्ष
पीएलआई योजना ने भारत की औद्योगिक यात्रा को एक महत्वपूर्ण मोड़ दिया है। ₹1.76 लाख करोड़ से अधिक के निवेश और उत्पादन, निर्यात और रोजगार निर्माण में वास्तविक लाभ के साथ, यह योजना एक परिवर्तनकारी उत्प्रेरक के रूप में उभरी है। यह न केवल कारखानों को नया रूप दे रही है, बल्कि भारत की अर्थव्यवस्था के भविष्य को भी आकार दे रही है, जिससे भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग में एक प्रमुख दावेदार बन रहा है।
(साई फीचर्स)