नगरीय निकाय चुनाव से पहले भाजपा का बड़ा दांव, एल्डरमैन नियुक्तियों से साधेगी संगठन और सियासी समीकरण

मध्यप्रदेश भाजपा ने अगले वर्ष प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनावों की तैयारियां अभी से तेज कर दी हैं। पार्टी की नजर अब प्रदेश के विभिन्न नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषदों में होने वाली एल्डरमैन नियुक्तियों पर है। भाजपा इन नियुक्तियों को केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि संगठन को मजबूत करने और चुनावी नेटवर्क तैयार करने की बड़ी रणनीति के रूप में देख रही है। अगले कुछ दिनों में शेष नगरीय निकायों में एल्डरमैनों की नियुक्ति की घोषणा हो सकती है।

चुनावी तैयारी में जुटी भाजपा, अब एल्डरमैन नियुक्तियों पर फोकस

(स्वाति खरे)

भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश में अगले वर्ष होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अभी से अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। प्रदेश कार्यसमिति और विभिन्न मोर्चों की नियुक्तियों के बाद अब पार्टी की निगाह प्रदेश के नगरीय निकायों में होने वाली एल्डरमैन नियुक्तियों पर टिक गई है।

राजनीतिक गलियारों में इन नियुक्तियों को केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आगामी चुनावों की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा समझा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच इस विषय पर कई दौर की चर्चा हो चुकी है।

पार्टी अगले एक सप्ताह के भीतर शेष नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्तियों की घोषणा कर सकती है।

भाजपा के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं एल्डरमैन पद

भाजपा के लिए एल्डरमैन नियुक्तियां कई राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने का माध्यम बन सकती हैं। हाल ही में प्रदेश संगठन, मोर्चों और प्रकोष्ठों में हुई नियुक्तियों के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं और पुराने कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी नहीं मिल सकी थी।

पार्टी अब इन नेताओं और कार्यकर्ताओं को सम्मानजनक भूमिका देकर संगठन में संभावित असंतोष को कम करना चाहती है।

विशेष रूप से ऐसे कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता मिलने की चर्चा है जिन्होंने विधानसभा और लोकसभा चुनावों में संगठन के लिए सक्रिय भूमिका निभाई थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा एक साथ दो लक्ष्य साधने की कोशिश कर रही है—

  • संगठनात्मक संतुलन बनाए रखना।
  • आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना।

16 नगर निगमों पर सबसे ज्यादा नजर

प्रदेश के 16 नगर निगमों में 12-12 एल्डरमैन नियुक्त किए जाने हैं। इनमें शामिल हैं—

  • भोपाल
  • इंदौर
  • ग्वालियर
  • जबलपुर
  • उज्जैन
  • सागर
  • रीवा
  • सतना
  • सिंगरौली
  • मुरैना
  • छिंदवाड़ा
  • देवास
  • कटनी
  • रतलाम
  • खंडवा
  • बुरहानपुर

इन नगर निगमों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां सबसे अधिक तेज हैं क्योंकि बड़े शहरों में संगठन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं के बीच संतुलन बनाना किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनौती माना जाता है।

जिला स्तर के कोर ग्रुप संभावित नाम पहले ही प्रदेश नेतृत्व को भेज चुके हैं और अंतिम सहमति की प्रक्रिया जारी है।

चुनावी नेटवर्क तैयार करने की बड़ी रणनीति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इन नियुक्तियों के जरिए स्थानीय स्तर पर अपना चुनावी नेटवर्क मजबूत करना चाहती है।

एल्डरमैन भले ही परिषद में मतदान का अधिकार नहीं रखते, लेकिन स्थानीय राजनीति में उनकी भूमिका प्रभावशाली मानी जाती है। वे स्थानीय समस्याओं, जनप्रतिनिधियों और संगठन के बीच समन्वय का काम करते हैं।

इसी कारण भाजपा उन्हें आगामी नगरीय निकाय चुनावों के लिए संभावित “ग्राउंड मैनेजर” के रूप में तैयार कर रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी दृष्टि से यह रणनीति पार्टी को वार्ड और नगर स्तर पर मजबूत पकड़ बनाने में मदद कर सकती है।

ओरछा में होगा चुनावी रोडमैप का मंथन

भाजपा अपनी नई प्रदेश कार्यसमिति की पहली बैठक राजधानी भोपाल से बाहर आयोजित करने जा रही है।

15 और 16 जुलाई को धार्मिक एवं पर्यटन नगरी ओरछा में दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक आयोजित होगी।

इस बैठक में शामिल होंगे—

  • सांसद
  • विधायक
  • प्रदेश पदाधिकारी
  • मोर्चा प्रमुख
  • प्रदेश कार्यसमिति सदस्य

सूत्रों के अनुसार बैठक में निम्न विषयों पर चर्चा होगी—

  • नगरीय निकाय चुनावों की रणनीति
  • पंचायत स्तर तक संगठन विस्तार
  • सरकार की योजनाओं का प्रचार
  • बदलते राजनीतिक समीकरण
  • बूथ स्तर की तैयारियां

संगठन से सरकार तक चुनावी तैयारी

भाजपा नेतृत्व मानता है कि नगरीय निकाय चुनाव केवल स्थानीय चुनाव नहीं होते, बल्कि यह जनता के मूड का सबसे बड़ा संकेत भी होते हैं।

राजनीतिक दृष्टि से ये चुनाव आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इसी वजह से पार्टी अभी से—

  • बूथ स्तर की तैयारी,
  • वार्ड स्तर की सक्रियता,
  • संगठनात्मक विस्तार,
  • स्थानीय नेतृत्व निर्माण,

जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम कर रही है।

मार्च में हो चुकी हैं बड़ी नियुक्तियां

मार्च 2026 में मध्यप्रदेश सरकार ने 169 नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्ति के आदेश जारी किए थे।

इनमें प्रमुख रूप से नगर परिषद और नगर पालिकाएं शामिल थीं।

नगर परिषदों की स्थिति

  • प्रदेश में कुल 299 नगर परिषद हैं।
  • 123 नगर परिषदों में नियुक्तियां हुईं।
  • प्रत्येक नगर परिषद में 4-4 एल्डरमैन नियुक्त किए गए।
  • कुल 492 एल्डरमैन मनोनीत किए गए।

अब भी 176 नगर परिषदों में नियुक्तियां होना बाकी हैं।

नगर पालिकाओं की स्थिति

  • प्रदेश में कुल 98 नगर पालिका परिषद हैं।
  • इनमें 46 नगर पालिकाओं में नियुक्तियां हुईं।
  • प्रत्येक नगर पालिका में 6-6 एल्डरमैन नियुक्त किए गए।
  • कुल 276 एल्डरमैन मनोनीत हुए।

अब भी 52 नगर पालिकाओं में नियुक्तियां शेष हैं।

कुल 768 एल्डरमैन की नियुक्ति हो चुकी

नगर परिषद और नगर पालिका दोनों को मिलाकर मार्च में कुल 768 एल्डरमैनों की नियुक्ति की गई थी।

हालांकि उस समय बुंदेलखंड और चंबल संभाग के कई निकायों की सूची सहमति नहीं बन पाने के कारण रोक दी गई थी।

अब पार्टी शेष निकायों में नियुक्तियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।

राजनीतिक संदेश भी छिपा है

विशेषज्ञों के अनुसार एल्डरमैन नियुक्तियां केवल पद वितरण की प्रक्रिया नहीं हैं। इनके जरिए पार्टी कई राजनीतिक संदेश देना चाहती है—

  • पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान।
  • स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारी।
  • संगठनात्मक असंतोष कम करना।
  • चुनावी कार्यकर्ताओं को प्रोत्साहित करना।
  • नए नेतृत्व को तैयार करना।

इन नियुक्तियों से यह भी स्पष्ट होगा कि भाजपा आने वाले वर्षों में किन स्थानीय चेहरों को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है।

क्या होगा राजनीतिक असर

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा इन नियुक्तियों के माध्यम से संगठनात्मक संतुलन बनाने में सफल रहती है, तो आगामी नगरीय निकाय चुनावों में उसे लाभ मिल सकता है।

इसके अलावा यह प्रक्रिया पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर मजबूत चुनावी ढांचा तैयार करने में भी मददगार साबित हो सकती है।

मध्यप्रदेश भाजपा की एल्डरमैन नियुक्तियां केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि व्यापक राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बनती दिखाई दे रही हैं। नगरीय निकाय चुनाव से पहले पार्टी संगठन, सरकार और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। ओरछा में होने वाला मंथन, लंबित नियुक्तियां और स्थानीय स्तर पर सक्रियता यह संकेत दे रही है कि भाजपा ने चुनावी तैयारियों का बिगुल अभी से बजा दिया है। आने वाले दिनों में होने वाली नियुक्तियां यह तय करेंगी कि प्रदेश की स्थानीय राजनीति में कौन से चेहरे आगे की भूमिका निभाने वाले हैं।