बुनियादी ढांचे और जनकल्याण को गति देने की दिशा में बड़ा निर्णय
(स्वाति खरे)
भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के समग्र विकास को नई गति देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में आयोजित मंत्रि-परिषद की बैठक में बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं, वन संरक्षण, शिक्षा, श्रमिक कल्याण, रोजगार सृजन और वित्तीय प्रबंधन से संबंधित विभिन्न योजनाओं के लिए कुल 24 हजार 200 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति प्रदान की गई।
इन निर्णयों का उद्देश्य आने वाले वर्षों में प्रदेश के विकास मॉडल को अधिक मजबूत बनाना, आम नागरिकों तक बेहतर सुविधाएं पहुंचाना तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवश्यक सेवाओं की गुणवत्ता को सुधारना है।
इंदौर मेट्रो परियोजना को मिला सबसे बड़ा वित्तीय समर्थन
मंत्रि-परिषद के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के पुनरीक्षित बजट और अतिरिक्त वित्त पोषण को मंजूरी देना शामिल है। राज्य सरकार ने इस परियोजना के लिए कुल 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है।
पहले इंदौर मेट्रो परियोजना की मूल लागत 7 हजार 500 करोड़ 80 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। निर्माण कार्यों की आवश्यकता और विभिन्न तकनीकी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इसमें 5 हजार 388 करोड़ 58 लाख रुपये की अतिरिक्त लागत शामिल की गई, जिसके बाद परियोजना की संशोधित लागत 12 हजार 889 करोड़ 38 लाख रुपये हो गई।
इसके अतिरिक्त पीपीपी मॉडल, आंतरिक ऋण और अन्य वित्तीय व्यवस्थाओं को मिलाकर 6 हजार 582 करोड़ 91 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय व्यवस्था को भी मंजूरी दी गई। इससे परियोजना के निर्माण कार्यों को गति मिलने और इंदौर में आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े बदलाव की तैयारी
प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 के प्रस्ताव पर अध्ययन के लिए पांच सदस्यीय मंत्रिमंडलीय उप समिति गठित की गई है।
इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में विश्वस्तरीय तृतीयक एवं सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों की स्थापना को प्रोत्साहन देना है। इसके माध्यम से चिकित्सा शिक्षा को विस्तार मिलेगा, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ेगी तथा गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए लोगों की दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जाएगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत रीवा, देवास और गुना जिले के चयनित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स प्रणाली से संचालित करने के पायलट प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई है।
रीवा, देवास और गुना में स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई दिशा
प्रदेश के कई ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सकों के रिक्त पदों की समस्या लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने तीन जिलों में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन के लिए पायलट मॉडल अपनाने का निर्णय लिया है।
इस व्यवस्था के अंतर्गत निजी विशेषज्ञता और प्रशासनिक निगरानी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने का प्रयास किया जाएगा। यदि पांच वर्षों के मूल्यांकन में इसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं, तो इस मॉडल को प्रदेश के अन्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक भी विस्तारित किया जा सकता है।
वन्यजीव संरक्षण और ग्राम पुनर्वास के लिए 2,381 करोड़ रुपये से अधिक की मंजूरी
मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए प्रोजेक्ट टाइगर एवं प्रोजेक्ट एलिफेंट सहित विभिन्न योजनाओं के लिए 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
इस राशि का उपयोग टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान, गांधीसागर अभयारण्य और अन्य संवेदनशील वन क्षेत्रों में वन एवं वन्यजीव संरक्षण कार्यों के लिए किया जाएगा।
इन कार्यों में शामिल होंगे—
- वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण
- जल स्रोतों का विकास
- वन सुरक्षा और अग्नि नियंत्रण व्यवस्था
- वन मार्गों का रखरखाव
- हाथियों के संरक्षण और प्रबंधन की व्यवस्था
- बचाव उपकरण और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता
इसके अलावा संरक्षित क्षेत्रों में आने वाले 94 गांवों के पुनर्वास और प्रभावित परिवारों को मुआवजा प्रदान करने की व्यवस्था भी इसी योजना के अंतर्गत की जाएगी।
श्रमिक कल्याण और औद्योगिक सुरक्षा पर सरकार का विशेष ध्यान
मंत्रि-परिषद ने श्रम विभाग की विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह राशि वर्ष 2026 से 2031 तक पांच वर्षों की अवधि में श्रमिकों के हितों की रक्षा और श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर खर्च की जाएगी।
इसके अंतर्गत श्रम आयुक्त कार्यालय का संचालन, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, श्रम कल्याण निधि, बाल श्रमिक पुनर्वास, बंधुआ मजदूर पुनर्वास और असंगठित श्रमिकों से संबंधित योजनाओं को संचालित किया जाएगा।
जनजातीय विद्यार्थियों की शिक्षा और सुविधाओं को मिलेगा बढ़ावा
राज्य सरकार ने जनजातीय समुदाय के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 687 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है।
इस योजना के तहत प्रदेश के 22 जिलों में संचालित 32 अनुदान प्राप्त संस्थाओं को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इन संस्थाओं के माध्यम से छात्रावास, आश्रम शाला, बालवाड़ी और अन्य शैक्षणिक सेवाओं का संचालन किया जाएगा।
इस पहल से जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
रेशम उद्योग और ग्रामीण रोजगार को मिलेगा प्रोत्साहन
प्रदेश में कुटीर उद्योगों और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने के लिए रेशम उत्पादन संबंधी योजनाओं के लिए 639 करोड़ 25 लाख रुपये की मंजूरी प्रदान की गई है।
इस राशि से रेशम समृद्धि योजना, टसर रेशम विकास कार्यक्रम, क्लस्टर विकास, विपणन अधोसंरचना और उत्पादन से जुड़े अन्य कार्य किए जाएंगे।
इससे रेशम उत्पादकों, बुनकरों और ग्रामीण उद्यमियों की आय बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की संभावना है।
स्थानीय निकायों की वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने की पहल
राज्य सरकार ने स्थानीय निधि संपरीक्षा और विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 492 करोड़ 45 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की है।
यह राशि वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक स्थानीय निकायों की लेखा परीक्षा, वित्तीय पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने में उपयोग की जाएगी।
स्थानीय निधि संपरीक्षा की प्रभावी व्यवस्था से नगर निकायों और अन्य संस्थाओं के वित्तीय प्रबंधन में जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
प्रदेश के विकास मॉडल को मिलेगी नई गति
मंत्रि-परिषद के इन निर्णयों को प्रदेश की दीर्घकालीन विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। बुनियादी ढांचे में निवेश से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जबकि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी योजनाएं सामाजिक विकास को मजबूती देंगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध निगरानी और विभागों के बेहतर समन्वय से इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सकेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक मध्यप्रदेश के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इंदौर मेट्रो के विस्तार से लेकर स्वास्थ्य अधोसंरचना, वन संरक्षण, श्रमिक कल्याण, जनजातीय शिक्षा और ग्रामीण रोजगार तक अनेक क्षेत्रों में बड़े वित्तीय प्रावधान किए गए हैं।
करीब 24 हजार 200 करोड़ रुपये की इन योजनाओं का उद्देश्य आगामी वर्षों में मध्यप्रदेश को अधोसंरचना, सामाजिक विकास और आर्थिक प्रगति के नए स्तर तक पहुंचाना है। योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के नागरिकों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की संभावना है।

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