2047 तक मध्यप्रदेश में स्थापित होंगी 1 करोड़ एमएसएमई इकाइयां, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषित किया बड़ा औद्योगिक विजन
(स्वाति खरे)
भोपाल (साई)। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश को औद्योगिक और आर्थिक रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के उद्देश्य से वर्ष 2047 तक एक करोड़ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को भोपाल स्थित कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘समृद्ध एमएसएमई-विकसित मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम में यह घोषणा करते हुए कहा कि एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की वास्तविक रीढ़ है और यही क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला क्षेत्र बन चुका है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के माध्यम से 900 एमएसएमई इकाइयों को 360 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि वितरित की। इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लाभार्थियों को ऋण, भूमि आवंटन पत्र और स्टार्टअप प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की गई।
एमएसएमई को बताया भारतीय अर्थव्यवस्था का आधार
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग केवल आर्थिक गतिविधियों का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि करोड़ों परिवारों की आजीविका का आधार हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य हर जिले में उद्योग, हर परिवार में रोजगार और प्रत्येक युवा को उद्यमिता का अवसर उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश आर्थिक रूप से लगातार मजबूत हो रहा है और एमएसएमई क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। उन्होंने बीते 12 वर्षों को देश के लिए परिवर्तनकारी काल बताते हुए कहा कि इस अवधि में उद्योग, स्टार्टअप और स्वरोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
900 एमएसएमई इकाइयों को मिला 360 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ
कार्यक्रम की सबसे बड़ी उपलब्धि 900 एमएसएमई इकाइयों को 360 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि का वितरण रही। मुख्यमंत्री ने सिंगल क्लिक के माध्यम से यह राशि जारी की।
इसके अतिरिक्त विभिन्न मदों में भी सहायता प्रदान की गई, जिनमें शामिल हैं:
- 6 ईटीपी (Effluent Treatment Plant) इकाइयों को 2.02 करोड़ रुपये की सहायता।
- विशेष पैकेज के तहत उद्योगों को 1.07 करोड़ रुपये की मंडी शुल्क प्रतिपूर्ति।
- 11 इकाइयों को 3.69 करोड़ रुपये का विद्युत टैरिफ लाभ।
- मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के लाभार्थियों को ऋण सहायता।
- स्टार्टअप नीति 2025 के अंतर्गत उद्यमियों को प्रोत्साहन राशि।
सरकार का मानना है कि इन प्रोत्साहनों से नए निवेश को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी।
24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों ने बदली प्रदेश की तस्वीर
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में 24 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं। इन इकाइयों के माध्यम से सवा करोड़ से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि प्रदेश में छोटे और मध्यम उद्योग रोजगार सृजन के सबसे बड़े स्रोत बन चुके हैं।
विशेष रूप से महिला उद्यमिता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार 4.41 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों का संचालन महिलाएं कर रही हैं, जो महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत उदाहरण है।
अगले ढाई वर्षों में 4500 करोड़ रुपये की सहायता का लक्ष्य
राज्य सरकार ने आगामी ढाई वर्षों के लिए भी बड़ा रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को मजबूत करने के लिए लगभग 4500 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार की औद्योगिक नीतियों के तहत:
- निवेश पर 40 प्रतिशत तक प्रोत्साहन।
- खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को 60 प्रतिशत तक सहायता।
- अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला उद्यमियों को अतिरिक्त 8 प्रतिशत प्रोत्साहन।
इन प्रोत्साहनों का उद्देश्य उद्योग स्थापना की लागत कम करना और नए उद्यमियों को प्रोत्साहित करना है।
औद्योगिक क्षेत्रों का तेजी से हो रहा विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में उद्योगों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। पिछले ढाई वर्षों में:
- 30 नए औद्योगिक क्षेत्र और 14 क्लस्टर स्वीकृत किए गए।
- 1063 से अधिक भूखंड उद्यमियों को आवंटित किए गए।
- आने वाले वर्षों में 60 नए औद्योगिक क्षेत्र और क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
- 6000 से अधिक नए भूखंड उद्यमियों को दिए जाएंगे।
इस पहल का उद्देश्य औद्योगिक निवेश को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाना है ताकि विकास का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे।
स्टार्टअप सेक्टर में मध्यप्रदेश की मजबूत पहचान
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्टार्टअप्स की संख्या 7400 से अधिक हो चुकी है।
इनमें से लगभग:
- 3400 से अधिक स्टार्टअप महिला उद्यमियों द्वारा संचालित हैं।
- हजारों युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है।
- तकनीक आधारित उद्यमों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के माध्यम से पिछले ढाई वर्षों में 23,500 से अधिक युवाओं को 1630 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण उपलब्ध कराया गया है।
स्टार्टअप इंडिया रैंकिंग में मध्यप्रदेश को “लीडर” श्रेणी का सम्मान मिलना भी प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
हर जिले में उद्यमिता को बढ़ावा देने की तैयारी
राज्य सरकार अब उद्यमिता को जिला स्तर तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर जिले में कम से कम एक इन्क्यूबेशन सेंटर विकसित करने की योजना है।
इसके अलावा:
- भोपाल
- इंदौर
- ग्वालियर
- जबलपुर
- उज्जैन
जैसे प्रमुख शहरों में ‘प्लग एंड प्ले’ मॉडल पर आधुनिक को-वर्किंग स्पेस विकसित किए जाएंगे।
इससे स्टार्टअप्स को कम लागत में कार्य प्रारंभ करने का अवसर मिलेगा।
विधानसभा स्तर तक पहुंचेगा एमएसएमई नेटवर्क
प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग राघवेंद्र सिंह ने बताया कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा में कम से कम एक एमएसएमई सेंटर विकसित करना है।
इसके लिए:
- 76 विधानसभा क्षेत्रों में स्थान चिह्नित किए जा चुके हैं।
- 44 नए औद्योगिक क्षेत्र और क्लस्टर प्रस्तावित हैं।
- 20 नई कॉमन फैसिलिटी सेंटर विकसित किए जाएंगे।
- अगले तीन वर्षों में 5000 नए औद्योगिक भूखंड आवंटित किए जाएंगे।
यह रणनीति ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक उद्योगों के विस्तार में मदद करेगी।
उद्योग जगत ने सराहा सरकार का दृष्टिकोण
कार्यक्रम में विभिन्न उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों और उद्यमियों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
उद्योग प्रतिनिधियों का कहना था कि प्रदेश में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और सरल हुई है। कई उद्यमियों ने बताया कि सरकारी सहायता और नीतिगत समर्थन के कारण उनके व्यवसाय को विस्तार देने में मदद मिली।
महिला उद्यमियों ने भी राज्य में बढ़ते अवसरों और सहयोगी वातावरण की सराहना की।
आर्थिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह लक्ष्य?
विशेषज्ञों के अनुसार यदि वर्ष 2047 तक एक करोड़ एमएसएमई इकाइयों का लक्ष्य प्राप्त होता है तो इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है।
संभावित लाभ:
- करोड़ों नए रोजगार के अवसर।
- ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों का विस्तार।
- युवाओं में स्वरोजगार की वृद्धि।
- निर्यात क्षमता में बढ़ोतरी।
- राज्य की जीडीपी में उद्योगों की हिस्सेदारी में वृद्धि।
- महिला उद्यमिता को नई गति।
यह लक्ष्य केवल औद्योगिक विस्तार नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का भी माध्यम बन सकता है।
भविष्य की दिशा: विकसित मध्यप्रदेश की ओर
मध्यप्रदेश सरकार का औद्योगिक रोडमैप स्पष्ट रूप से रोजगार, निवेश और उद्यमिता पर केंद्रित दिखाई देता है। सरकार तकनीक, वित्तीय सहायता, भूमि उपलब्धता और प्रशिक्षण के माध्यम से उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम कर रही है।
यदि घोषित योजनाएं निर्धारित समय सीमा में प्रभावी ढंग से लागू होती हैं तो मध्यप्रदेश देश के अग्रणी औद्योगिक और स्टार्टअप केंद्रों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।
भोपाल में आयोजित ‘समृद्ध एमएसएमई-विकसित मध्यप्रदेश’ कार्यक्रम ने राज्य सरकार की औद्योगिक विकास संबंधी दीर्घकालिक सोच को स्पष्ट किया है। वर्ष 2047 तक एक करोड़ एमएसएमई इकाइयों की स्थापना का लक्ष्य केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि रोजगार, निवेश और आत्मनिर्भरता पर आधारित व्यापक आर्थिक परिवर्तन की परिकल्पना है। 900 एमएसएमई इकाइयों को 360 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता और स्टार्टअप्स को मिले प्रोत्साहन यह संकेत देते हैं कि मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में उद्योग और उद्यमिता के क्षेत्र में नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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