जिस विभाग पर बिजली सुरक्षा की जिम्मेदारी,उसके ही परिसर में चूक ने खड़े किए बड़े सवाल
(चीफ ब्यूरो)
जबलपुर (साई)।जबलपुर में शनिवार शाम हुई एक घटना ने बिजली सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। विडंबना यह है कि जिस विभाग की जिम्मेदारी पूरे प्रदेश में सुरक्षित और निर्बाध विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित करने की है, उसी विभाग के मुख्यालय परिसर स्थित तरंग ऑडिटोरियम में शॉर्ट सर्किट की घटना सामने आई।
प्रसिद्ध अभिनेता आशुतोष राणा के चर्चित नाटक ‘हमारे राम’ के मंचन के दौरान मुख्य विद्युत लाइन में हुए शॉर्ट सर्किट से पूरा सभागार कुछ समय के लिए अंधेरे में डूब गया। तेज धमाके और चिंगारियों के बीच दर्शकों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि समय रहते कर्मचारियों और सुरक्षा अमले की सक्रियता से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने कई असहज सवाल छोड़ दिए हैं।
बिजली विभाग के मुख्यालय में ही सुरक्षा व्यवस्था फेल?
तरंग ऑडिटोरियम बिजली विभाग के स्वामित्व और नियंत्रण वाले परिसर का हिस्सा है। ऐसे में यहां विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन सर्वोच्च स्तर का होना चाहिए था। लेकिन मुख्य विद्युत लाइन में शॉर्ट सर्किट होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि या तो नियमित निरीक्षण में कमी रही या फिर सुरक्षा मानकों के पालन में कहीं न कहीं चूक हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली विभाग के अपने ही परिसर में ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है तो प्रदेश के अन्य सार्वजनिक भवनों, सामुदायिक सभागारों, स्कूलों, अस्पतालों और निजी आयोजनों की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता स्वाभाविक है।
हजारों लोगों की मौजूदगी में हुआ हादसा
घटना उस समय हुई जब ऑडिटोरियम दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था। मंच पर आशुतोष राणा प्रस्तुति दे रहे थे और उनके साथ लगभग 150 कलाकार कार्यक्रम का हिस्सा थे।
अचानक हुए धमाके और बिजली गुल होने से कुछ समय के लिए पूरे सभागार में भ्रम और दहशत का माहौल बन गया। कई लोगों को आग लगने की आशंका हुई। यदि किसी ने घबराकर निकास द्वारों की ओर दौड़ लगा दी होती तो स्थिति भगदड़ में बदल सकती थी।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार भीड़भाड़ वाले बंद सभागारों में बिजली से जुड़ी घटनाएं सबसे अधिक जोखिमपूर्ण मानी जाती हैं क्योंकि ऐसे स्थानों पर आग, धुआं और भगदड़ तीनों का खतरा एक साथ पैदा हो जाता है।
बड़ा सवाल: क्या सुरक्षा ऑडिट सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या सार्वजनिक भवनों में होने वाले विद्युत सुरक्षा ऑडिट वास्तव में प्रभावी हैं या केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं।
यदि मुख्यालय परिसर के ऑडिटोरियम में ही मुख्य लाइन में फॉल्ट की नौबत आ सकती है, तो यह व्यवस्था की कमजोरी का संकेत माना जाएगा। विद्युत विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े आयोजनों से पहले निम्न बिंदुओं की अनिवार्य जांच होनी चाहिए—
- मुख्य विद्युत लाइन की स्थिति
- लोड क्षमता का परीक्षण
- बैकअप बिजली व्यवस्था
- फायर सेफ्टी सिस्टम
- आपातकालीन निकास व्यवस्था
- विद्युत पैनल और केबलिंग की जांच
यदि ये सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त थीं, तो फिर शॉर्ट सर्किट कैसे हुआ? यही जांच का सबसे महत्वपूर्ण विषय माना जा रहा है।
कर्मचारियों की तत्परता से टला बड़ा संकट
घटना के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों ने तत्काल फॉल्ट वाली लाइन को मुख्य सप्लाई से अलग कर दिया। इसके बाद वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए बिजली बहाल की गई।
राहत की बात यह रही कि किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई और न ही आग फैलने की स्थिति बनी। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि प्रतिक्रिया में कुछ मिनटों की भी देरी होती तो परिणाम बेहद गंभीर हो सकते थे।
यानी हादसा भले टल गया हो, लेकिन खतरा वास्तविक था।
जनता के मन में उठ रहे सवाल
घटना के बाद लोगों के बीच एक ही चर्चा सुनाई दे रही है—जब बिजली विभाग के अपने परिसर में ऐसी चूक हो सकती है तो आम नागरिकों के भवनों और छोटे आयोजनों की सुरक्षा का स्तर क्या होगा?
कई लोगों का मानना है कि यह घटना केवल एक तकनीकी खराबी नहीं बल्कि चेतावनी है। यदि संबंधित एजेंसियां इससे सबक नहीं लेतीं तो भविष्य में कहीं और बड़ी दुर्घटना सामने आ सकती है।
जांच से ज्यादा जवाबदेही की जरूरत
अधिकारियों ने शॉर्ट सर्किट के कारणों की जांच शुरू कर दी है। लेकिन केवल जांच पर्याप्त नहीं होगी। यह भी तय होना चाहिए कि सुरक्षा व्यवस्था में यदि कोई कमी रही है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी है।
सार्वजनिक भवनों में सुरक्षा मानकों का पालन केवल निर्देशों और फाइलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जब किसी कार्यक्रम में हजारों लोगों की जान दांव पर लगी हो, तब लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती।
जबलपुर के तरंग ऑडिटोरियम में आशुतोष राणा के ‘हमारे राम’ शो के दौरान हुआ शॉर्ट सर्किट केवल एक तकनीकी घटना नहीं बल्कि व्यवस्था के लिए चेतावनी है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यह घटना उसी विभाग के मुख्यालय परिसर में हुई, जिसकी जिम्मेदारी बिजली सुरक्षा सुनिश्चित करना है। “दिया तले अंधेरा” वाली कहावत इस पूरे मामले पर सटीक बैठती दिखाई देती है। हादसा टल गया, लेकिन इसने सुरक्षा मानकों, निरीक्षण व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं जिनका जवाब केवल जांच रिपोर्ट नहीं, बल्कि ठोस सुधारात्मक कार्रवाई ही दे सकती है।

हर्ष वर्धन वर्मा का नाम टीकमगढ़ जिले में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद एक बार फिर पत्रकारिता में सक्रियता बना रहे हैं हर्ष वर्धन वर्मा . . .
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