(विद्याधर जाधव)
भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बुधवार को हुई कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में उस समय सख्त संदेश देखने को मिला, जब मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। जनसुनवाई के दौरान आत्मदाह और जहर खाने जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने सीधे सवाल किया कि यदि जनता अपनी समस्याओं के समाधान के लिए ऐसे कदम उठा रही है तो इसे सुशासन कैसे माना जा सकता है।
बैठक में प्रशासनिक लापरवाही, अवैध खनन, प्रदूषण, ड्रग्स नेटवर्क, लंबित राजस्व मामले, जल संकट और लोक सेवा गारंटी जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य सचिव ने साफ संकेत दिए कि अब जिलों में कामकाज पुराने ढर्रे पर नहीं चलेगा और हर अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।
जनसुनवाई की घटनाओं ने बढ़ाई सरकार की चिंता
हाल के महीनों में प्रदेश के कई जिलों में जनसुनवाई के दौरान लोगों द्वारा आत्मदाह का प्रयास करने और जहर खाने जैसी घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे। इन्हीं घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अधिकारियों से कहा कि यदि जनता को समय पर न्याय और समाधान नहीं मिलेगा तो सरकार की छवि प्रभावित होगी।
उन्होंने कहा कि जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सरकार और जनता के बीच विश्वास का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि लोग अपनी शिकायतों को लेकर निराश होकर चरम कदम उठा रहे हैं, तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता की कमी को दर्शाता है।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में कहा—
- जनता की शिकायतों का समय पर समाधान करें
- संवेदनहीन व्यवहार से बचें
- जनसुनवाई को प्राथमिकता दें
- शिकायतों की नियमित मॉनिटरिंग करें
- गंभीर मामलों में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करें
अवैध खनन पर सरकार की बड़ी कार्रवाई की तैयारी
कॉन्फ्रेंस में अवैध खनन और अवैध परिवहन सबसे बड़े मुद्दों में शामिल रहा। मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में खनन माफियाओं का मनोबल बढ़ना प्रशासनिक कमजोरी को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर नाराजगी जताई कि कई मामलों में माफिया प्रशासन और पुलिस पर हमला करने तक की हिम्मत कर रहे हैं।
अनुराग जैन ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अब बिना नंबर प्लेट या टूटी नंबर प्लेट वाले वाहनों पर केवल कार्रवाई नहीं होगी, बल्कि उन्हें सीधे राजसात कर नीलाम किया जाएगा।
इसके अलावा पुराने खनन माफियाओं की फाइलें दोबारा खोलने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार यह समीक्षा करेगी कि किन मामलों में अब तक सजा नहीं हो पाई है और कहां कार्रवाई लंबित है।
प्रशासन को दिए गए प्रमुख निर्देश
- अवैध खनन पर संयुक्त अभियान चलाएं
- बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों को तुरंत जब्त करें
- पुराने मामलों की समीक्षा करें
- खनन माफियाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करें
- स्थानीय प्रशासन और पुलिस समन्वय बढ़ाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अब अवैध खनन को केवल राजस्व नुकसान का मामला नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक चुनौती के रूप में देख रही है।
भोपाल और सिंगरौली कलेक्टरों पर विशेष नाराजगी
बैठक के दौरान कई जिलों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई। इसी दौरान भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा को लंबित राजस्व मामलों को लेकर फटकार लगाई गई। जमीनों के नामांतरण और बंटान से जुड़े मामलों में बढ़ती पेंडेंसी पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताई।
सूत्रों के अनुसार समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि कई मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं हुई और मॉनिटरिंग भी कमजोर रही। इस पर मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि राजस्व संबंधी मामलों में देरी सीधे जनता को प्रभावित करती है।
वहीं सिंगरौली कलेक्टर गौरव बैनल को प्रदूषण, पेयजल संकट और कानून व्यवस्था के मुद्दों पर सख्त चेतावनी दी गई। सिंगरौली लंबे समय से औद्योगिक प्रदूषण और जल संकट को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में मुख्य सचिव ने स्थानीय प्रशासन को स्थिति सुधारने के निर्देश दिए।
“हर जिले को अपनी अर्थव्यवस्था विकसित करनी होगी”
मुख्य सचिव अनुराग जैन ने अधिकारियों को यह भी कहा कि अब केवल पारंपरिक प्रशासनिक कामकाज से काम नहीं चलेगा। हर जिले को अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार विकास मॉडल तैयार करना होगा।
उन्होंने कहा कि जिलों में कृषि, उद्योग, उद्यानिकी और स्थानीय संसाधनों के बीच बेहतर तालमेल बनाना जरूरी है। सरकार चाहती है कि जिला प्रशासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित न रहे, बल्कि स्थानीय आर्थिक विकास को भी गति दे।
बैठक में यह जानकारी भी दी गई कि प्रदेश की जीएसडीपी में कृषि का योगदान 37 प्रतिशत से बढ़कर 43 प्रतिशत तक पहुंच गया है। हालांकि अधिकारियों को यह भी बताया गया कि केवल खेती के भरोसे समग्र विकास संभव नहीं है।
सरकार का फोकस इन क्षेत्रों पर
- स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा
- कृषि आधारित प्रोसेसिंग यूनिट
- रोजगार सृजन
- निवेश आकर्षित करना
- जिला स्तरीय आर्थिक मॉडल तैयार करना
लोक सेवा गारंटी और सीएम हेल्पलाइन पर सख्ती
मुख्य सचिव ने लोक सेवा गारंटी, सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई को सरकार की छवि से सीधे जुड़ा बताया। उन्होंने कहा कि इन माध्यमों पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि शिकायतों के निपटारे में संवेदनहीनता या देरी पाई गई तो सीधे कार्रवाई की जाएगी। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार अब शिकायत निवारण प्रणाली को राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से गंभीरता से देख रही है।
ड्रग्स और नारकोटिक्स के खिलाफ विशेष अभियान
बैठक में कानून व्यवस्था और युवाओं में बढ़ते नशे के खतरे पर भी गंभीर चर्चा हुई। डीजीपी कैलाश मकवाना ने सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को स्कूलों और कॉलेजों के आसपास ड्रग्स नेटवर्क खत्म करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि ड्रग फ्री जोन बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही पोक्सो एक्ट और विस्फोटक अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए।
पुलिस विभाग को दिए गए प्रमुख निर्देश
- स्कूल-कॉलेज क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाएं
- नशा तस्करों पर विशेष अभियान चलाएं
- हुड़दंगियों और असामाजिक तत्वों पर कार्रवाई करें
- संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त बढ़ाएं
- युवाओं में जागरूकता अभियान चलाएं
सरकारी हैंडपंपों पर कब्जे हटाने के आदेश
बैठक में यह भी सामने आया कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में 104 सरकारी हैंडपंपों पर निजी कब्जे हैं। इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए कलेक्टरों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने कहा कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं पर कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। सभी जिलों को जल्द से जल्द कब्जे हटाकर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
नरवाई जलाने और पर्यावरणीय मुद्दों पर नाराजगी
नरवाई जलाने की घटनाओं को लेकर जबलपुर और नरसिंहपुर प्रशासन को भी फटकार लगाई गई। सरकार का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण के मामलों में लापरवाही नहीं चलेगी।
इसके अलावा सिंगरौली जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। विशेषज्ञों का मानना है कि पर्यावरणीय मुद्दे अब केवल सामाजिक चिंता नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का हिस्सा बन चुके हैं।
खरीफ सीजन और किसानों के लिए नए निर्देश
खरीफ सीजन को देखते हुए खाद वितरण व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसानों को केवल डीएपी के लिए ही नहीं, बल्कि एनपीके खाद के लिए भी टोकन दिए जाएं।
सरकार का मानना है कि इससे खाद वितरण के दौरान होने वाले विवाद और भीड़भाड़ की स्थिति कम होगी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित खाद उपयोग को बढ़ावा देने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण हो सकता है।
बरगी क्रूज हादसे के बाद सुरक्षा पर फोकस
बैठक में पर्यटन और जलाशयों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चर्चा हुई। बरगी क्रूज हादसे से सबक लेते हुए सभी जिलों को पर्यटन स्थलों और जलाशयों पर सुरक्षा इंतजाम मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों को कहा गया कि—
- लाइफ जैकेट अनिवार्य करें
- सुरक्षा मानकों की नियमित जांच करें
- पर्यटन स्थलों पर निगरानी बढ़ाएं
- आपातकालीन व्यवस्था सुनिश्चित करें
आवास और स्वच्छता योजनाओं की धीमी रफ्तार पर नाराजगी
प्रधानमंत्री आवास योजना की धीमी प्रगति पर भी मुख्य सचिव ने असंतोष जताया। कई जिलों में निर्माण कार्य और लाभ वितरण की गति धीमी पाई गई।
साथ ही ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जल गंगा संवर्धन अभियान के अधूरे कार्य 21 जून से पहले पूरा करने के आदेश भी दिए गए।
प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव का संकेत
राजनीतिक और प्रशासनिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक केवल समीक्षा बैठक नहीं थी, बल्कि प्रदेश प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश भी थी। सरकार अब जवाबदेही आधारित प्रशासनिक मॉडल लागू करना चाहती है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में जिलों की रैंकिंग, शिकायत निवारण, कानून व्यवस्था और विकास कार्यों के आधार पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली का मूल्यांकन और अधिक सख्त हो सकता है।
कलेक्टर-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस में मुख्य सचिव अनुराग जैन की सख्ती ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्यप्रदेश सरकार अब प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता को लेकर गंभीर रुख अपनाने जा रही है। जनसुनवाई से लेकर अवैध खनन, ड्रग्स, प्रदूषण और लोक सेवा गारंटी तक हर क्षेत्र में जवाबदेही तय करने की तैयारी दिखाई दे रही है।
सरकार का फोकस अब केवल योजनाओं की घोषणा पर नहीं बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन और जनता को समय पर राहत देने पर है। आने वाले समय में प्रशासनिक तंत्र की कार्यशैली में बदलाव और अधिक सख्त मॉनिटरिंग देखने को मिल सकती है।

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