आखिर कब तक दुनिया के सामने अमेरिका का मजाक बनवाते रहेंगे डोनाल्ड ट्रंप? ईरान के ‘टोल टैक्स’ दांव ने उड़ाई व्हाइट हाउस की नींद

मार्च 2026 के अंतिम दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव ने एक नया और विचित्र मोड़ ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ‘डिस्ट्रक्शन कूटनीति’ के जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ‘समुद्री टोल टैक्स’ वसूलने का दांव खेलकर वाशिंगटन को सन्न कर दिया है। ट्रंप की विरोधाभासी धमकियों और सहयोगियों के साथ बिगड़ते रिश्तों ने अमेरिका की वैश्विक साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे दुनिया अब इसे एक ‘पॉलिटिकल कॉमेडी’ के रूप में देख रही है।

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चिचा के चोचले – 04, इधर, ट्रंप की पॉलीटिकल कॉमेडी उधर, ईरान का टोल टैक्स का वार
आखिर कब तक दुनिया के सामने अमेरिका का मजाक बनवाते रहेंगे डोनाल्ड ट्रंप!
(लिमटी खरे)

दुनिया के चौधरी अमेरिका के प्रथम नागरिक को विश्व का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता है, और जो सबसे ज्यादा ताकतवर होता है उसका धीर गंभीर और जिम्मेदार व्यक्तित्व का स्वामी होना स्वाभाविक ही होता है। इधर, सबसे शक्तिशाली देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति की हरकतों को दुनिया भर के लोग बिजूका के रूप में ले रहे हैं। बिजूका समझते हैं न, दरअसल बिजूका खेत के बीच टंगे हुए पुतले को कहा जाता है, जिसे देखकर परिंदे तो डरते हैं, पर इंसान उसके मजे लेते हैं। उनकी हरकते ऐसी हैं कि कामेडी किंग मिस्टर बीन भी शरमा जाएं!
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप की। आज हम उनकी उस पॉलिटिकल कॉमेडी का अगला हिस्सा डिकोड करेंगे, जिसने मार्च 2026 के आखिरी चार दिनों में पूरी दुनिया को एक चलता-फिरता सर्कस बना दिया। आज बात होगी उस मुद्दे की, जिसने आग में घी नहीं, बल्कि पेट्रोल डालने का काम किया – ईरान का टोल टैक्स वाला दांव! आपने सही सुना! सड़क पर टोल सुना था, लेकिन समंदर के बीचों-बीच ईरान ने जो वसूली शुरू की, उसने ट्रंप की रातों की नींद उड़ा दी। तो कुर्सी की पेटी बांध लीजिए, क्योंकि आज की ये रिपोर्ट ट्रंप के झूठ, उनके यू-टर्न और उनकी बचकाना कूटनीति की धज्जियां उड़ाने वाली है। अगर आप भी सच को बिना किसी फिल्टर के देखना चाहते हैं, तो अभी उस सब्सक्राईब बटन को दबाएं और इस लालटेन की रोशनी को घर-घर पहुंचाएं!
सबसे पहले बात करे हें डिस्ट्रक्शन का शौक और आब्लिट्रेट वाली धमकी के बारे में, बात शुरू होती है 30 मार्च 2026 की सुबह से। ट्रंप साहब अपने स्मार्टफोन के साथ अवतरित होते हैं। उनके अंगूठे स्क्रीन पर ऐसे नाचते हैं, मानो कोई पियानो बजा रहे हों, लेकिन निकलता है – विनाश का राग! उन्होंने ईरान को सीधी चेतावनी दी कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तुरंत नहीं खुला, तो अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहो।
ट्रंप ने जो लिस्ट जारी की, उसे देखकर लगा कि वे किसी कंस्ट्रक्शन साइट को ढहाने का कॉन्ट्रैक्ट ले रहे हैं। उन्होंने कहा – हम ईरान के बिजली घर, तेल के कुएं, खार्ग द्वीप और यहाँ तक कि पानी साफ करने वाले डीसेलिनेशन प्लांट्स को आब्लिट्रेट यानी नामो-निशान मिटा देंगे!
ट्रंप साहब को शायद लगता है कि दुनिया एक बड़ा मैकडानल्ड्स आउटलेट है, जहाँ वे जब चाहें अपना ऑर्डर बदल सकते हैं। अरे साहब, बिजली और पानी के प्लांट उड़ाने की धमकी? क्या आपको लगता है कि ईरानी लोग मोमबत्ती जलाकर और समंदर का खारा पानी पीकर आपको थैंक यू का ईमेल भेजेंगे? यह युद्ध नहीं, मानवीय त्रासदी की सनक है। लेकिन उनके लिए तो यह सब बस एक हाई-स्टेक वीडियो गेम है, जिसमें वे रिसेट बटन ढूंढ रहे हैं!
अब बात करें, ट्रंप की इस धमकी पर ईरान का मास्टरस्ट्रोक यानी समंदर में वसूली के बारे में, जब ट्रंप बिजली और पानी काटने की धमकी दे रहे थे, तब ईरान ने एक ऐसा कार्ड खेला जिसने पेंटागन के होश उड़ा दिए। ईरान ने घोषणा की कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले हर जहाज को अब ईरानी सुरक्षा शुल्क यानी टोल टैक्स देना होगा!
तर्क बड़ा मासूम था – चूंकि अमेरिका ने हम पर युद्ध थोपा है, इसलिए इस जलमार्ग की सुरक्षा का खर्च अब यहाँ से गुजरने वाले जहाजों को उठाना होगा। ट्रंप साहब को लगा था कि वे अकेले धंधेबाज यानी डीलर हैं, लेकिन ईरान ने दिखा दिया कि वसूली के मामले में वे भी उस्ताद हैं। यह वैसा ही था जैसे मोहल्ले का कोई दबंग सड़क पर गड्ढा खोद दे और फिर वहां से गुजरने वाली साइकिलों से टैक्स वसूलने लगे। ट्रंप के मैक्सिमम प्रेशर के जवाब में ईरान ने मैक्सिमम वसूली शुरू कर दी! सुपरपावर अमेरिका अब एक समंदरी नाके पर खड़ा होकर अपना बटुआ ढूंढ रहा था।
अब चर्चा की जाए इस सबसे दुनिया का मोहभंग हुआ, दुनिया के देश बोले, जंग तुम्हारी, हम क्यों टैक्स भरें?, ईरान के इस कदम ने आग लगा दी, लेकिन अमेरिका में नहीं, बल्कि उन देशों में जो अब तक खामोश थे। चीन, भारत, जापान और यूरोपीय देशों के जहाजों को जब ईरानी टोल का बिल मिला, तो गुस्सा ट्रंप पर फूटा। दुनिया ने पूछा – जंग तुम्हारी, इजरायल के साथ तुम खड़े हो, तो इसकी कीमत हमारा व्यापार क्यों चुकाए?
ईरान का यह दांव मास्टरस्ट्रोक था। उसने दुनिया के सामने अमेरिका को एक ऐसे विलेन की तरह पेश किया जिसकी सनक की वजह से पूरी दुनिया में तेल और सामान महंगा हो रहा है। ट्रंप साहब को लगा था कि जब वे ईरान पर बम बरसाएंगे, तो दुनिया तालियां बजाएगी। लेकिन यहाँ तो उल्टा हो गया! दुनिया उन्हें शांति दूत नहीं, बल्कि महंगाई का दूत मानने लगी। ट्रंप साहब, कूटनीति ट्विटर के फॉलोअर्स बढ़ाने जैसा काम नहीं है, यहाँ असली बिल फटते हैं!
आईए अब बात करते हैं सहयोगियों की क्लास और मर्यादाओं के मर्डर की, 31 मार्च आते-आते ट्रंप को लगा कि वे पूरी पृथ्वी के हेडमास्टर हैं। जब ब्रिटेन और फ्रांस जैसे पुराने दोस्तों ने इस पागलपन में शामिल होने से मना किया, तो ट्रंप ने मर्यादाओं का मर्डर कर दिया। सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा – जाओ और अपना तेल खुद ढूंढो!
ट्रंप की कूटनीति का लॉजिक बड़ा सरल है – अगर तुम मेरी लड़ाई नहीं लड़ोगे, तो मैं तुम्हारा खिलौना तोड़ दूंगा। दशकों पुराने रिश्तों को उन्होंने एक ट्वीट में वैसे ही स्वाहा कर दिया जैसे कोई नाराज बच्चा अपने दोस्तों की गेंद छिपा देता है। उन्होंने दुनिया को बता दिया कि अमेरिका की जिम्मेदारी अब सिर्फ ट्रंप की सनक तक सीमित है।
दुनिया भर में ट्रंप को यू-टर्न के सुल्तान माना जाने लगा है, अब बात करें, 24 घंटे का मायाजाल की, अब बात करते हैं उस अध्याय की, जिसे पढ़कर रक्षा विशेषज्ञों के सिर चकरा गए। ट्रंप ने अपनी ही कही बातों का ऐसा गला घोंटा कि रूह भी कांप जाए।
यू-टर्न नंबर एक, पहले कहा कि जब तक होर्मुज नहीं खुलता, युद्ध विराम नहीं होगा। लेकिन 31 मार्च की रात चुपके से कह दिया – ठीक है, होर्मुज बंद रहे तो भी हम समझौता कर सकते हैं। क्यों? क्योंकि उन्हें 4 हफ्ते में जीत का झंडा गाड़कर चुनाव जो लड़ना था!
यू-टर्न नंबर दो सुबह कहा – बातचीत का वक्त खत्म हो चुका है। शाम को बोले – ग्रेट प्रोग्रेस हो रही है, ईरानी नेतृत्व अब बड़ा रीजनेबल (तर्कसंगत) हो गया है।
ट्रंप की बातों पर यकीन करना वैसा ही है जैसे यह उम्मीद करना कि बिना तेल के पकौड़े तल जाएंगे। सुबह वे आपको गोली मारने की धमकी देंगे और शाम को आपके साथ डिनर पर डील करेंगे। उनके शब्दकोश में सिद्धांत जैसा कोई शब्द नहीं है, वहाँ सिर्फ पब्लिसिटी है!
मजाक करते हैं, कहते हैं कि सब खत्म हो गया, पर मैं फिर भी मारूंगा! 31 मार्च को ट्रंप ने व्हाइट हाउस के लॉन से दावा किया – हमने ईरान की सेना, नौसेना और नेतृत्व को तबाह कर दिया है। लेकिन अगले ही पल बोले – तैयार रहो, हम और भयानक हमले करेंगे! अब कोई इन महाशय से पूछे कि भाई साहब, अगर दुश्मन तबाह हो चुका है, तो फिर आप और हमले किस पर करेंगे? क्या खाली रेगिस्तान में बम फोड़कर दिवाली मनाना चाहते हैं? यह विरोधाभास साफ कह रहा है कि ट्रंप या तो अपनी रिपोर्ट्स नहीं पढ़ते, या फिर उन्हें लगता है कि दुनिया की जनता महामूर्ख है।
मानमानी चरम पर,अंतरराष्ट्रीय कानून? वह क्या होता है? जब संयुक्त राष्ट्र ने याद दिलाया कि बिजली-पानी के प्लांट उड़ाना वार क्राइम है, तो ट्रंप का अंदाज किसी बेपरवाह राजा जैसा था। अंतरराष्ट्रीय कानून को उन्होंने अपनी जेब में रखे उस पुराने रुमाल की तरह समझा जिसे वे जब चाहें फेंक दें। उनकी इस सोच ने अमेरिका को ग्लोबल पुलिस से घटाकर मोहल्ले का बुली अर्थात धौंस दिखाने वाला बना दिया है, जो किसी का भी घर बस इसलिए जला सकता है क्योंकि उसे गुस्सा आ रहा है।
ट्रंप का प्रेशर कुकर मॉडल और असली चेहरा, तो दोस्तों, 28 से 31 मार्च 2026 के बीच हमने क्या देखा? एक ऐसा राष्ट्रपति जो पहले खुद आग लगाता है, फिर उसे बुझाने का नाटक करता है, फिर अपनी ही फायर ब्रिगेड को डांटता है, और अंत में कैमरे के सामने आकर कहता है – देखो, मैंने सबको बचा लिया, मैं ही असली हीरो हूँ! उनकी अधिकतम दबाव रणनीति दरअसल अधिकतम भ्रम की रणनीति है। ईरान के एक टोल टैक्स ने सुपरपावर के ईगो की हवा निकाल दी। ट्रंप ने सोचा था कि वे ग्रेट डील करेंगे, लेकिन अंत में वे खुद एक ऐसी बैड डील में फंस गए जहाँ अमेरिका दुनिया की नजरों में अकेला पड़ गया।
इजरायल अब डरा हुआ है, सहयोगी देश कन्फ्यूज्ड हैं और ईरान अपने समंदर में टैक्स वसूल कर मुस्कुरा रहा है। क्या आपको लगता है कि ईरान का यह टोल दांव ट्रंप की सबसे बड़ी कूटनीतिक हार थी? या ट्रंप अब भी कोई नया ट्विस्ट लेकर आएंगे?
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(लेखक समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के संपादक हैं.)
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