12 दिन में नारकोटिक्स ब्यूरो ने दो छापों में पकड़ा190 किलो गांजा . . .
हर दिशा में टोल नाके फिर भी तस्करों के लिए स्वर्ग से कम नहीं सिवनी का रास्ता,स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह!
(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)। मध्य प्रदेश का सिवनी जिला इन दिनों राष्ट्रीय राजमार्गों पर मादक पदार्थों की तस्करी को लेकर सुर्खियों में है। केंद्र सरकार के नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने जिले की सीमाओं के भीतर महज 12 दिनों के अंतराल में दो बड़ी कार्यवाहियों को अंजाम देते हुए कुल 190 किलो गांजा बरामद करने में सफलता हासिल की है। इस बड़ी सफलता ने न केवल अंतरराज्यीय तस्करी गिरोहों के हौसले पस्त किए हैं, बल्कि स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यक्षमता और उनके ‘इंटेलिजेंस’ पर भी कई तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।
पेंट के डिब्बों में छिपा था‘नशा‘:लखनादौन मेंNCBका बड़ा प्रहार नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) भोपाल की टीम को मुखबिर से एक पुख्ता सूचना प्राप्त हुई थी कि छत्तीसगढ़ के रास्ते मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में मादक पदार्थों की एक बड़ी खेप भेजी जा रही है। सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को बताया कि इस सूचना के आधार पर एनसीबी की टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 44 पर जाल बिछाया। लखनादौन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले टोल प्लाजा के पास जब एक संदिग्ध वाहन को रोककर उसकी तलाशी ली गई, तो अधिकारी भी तस्करों की चतुराई देखकर दंग रह गए।
तस्करों ने गांजे के पैकेटों को छिपाने के लिए पेंट और डिस्टेंपर के डिब्बों का इस्तेमाल किया था। डिब्बों के ऊपरी हिस्से में पेंट भरा था, जबकि उनके नीचे गांजे के पैकेट बड़ी ही सावधानी से पैक किए गए थे ताकि गंध बाहर न आए और न ही किसी को शक हो। हालांकि, एनसीबी की सतर्क टीम ने बारीकी से जांच करते हुए लगभग 114 किलो गांजा बरामद कर लिया। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनसे रायसेन और छत्तीसगढ़ के कनेक्शन खंगाले जा रहे हैं।
12दिनों का घटनाक्रम: तस्करी की चैन का खुलासा यह सिवनी में नशे के खिलाफ पहली कार्रवाई नहीं थी। इससे ठीक कुछ दिन पहले, 19 मार्च 2026 को भी एनसीबी ने लखनादौन और घंसौर थाना क्षेत्र के सीमावर्ती इलाकों में एक बड़ी रेड डाली थी। उस समय 76 किलो गांजा जब्त किया गया था और विदिशा निवासी दो तस्करों को दबोचा गया था। जांच में सामने आया था कि वह खेप ओडिशा से विदिशा ले जाई जा रही थी।
महज 12 दिनों के भीतर 190 किलो गांजे की जब्ती यह स्पष्ट करती है कि सिवनी की सड़कें तस्करों के लिए एक प्रमुख ट्रांजिट रूट बन चुकी हैं। समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को सूत्रों ने यह भी जानकारी दी कि एनसीबी के पास ‘कॉल इंटरसेप्शन’ और आधुनिक ट्रैकिंग तकनीक होने के कारण वे इन तस्करों की हर हरकत पर पैनी नजर रखने में सक्षम हैं।
सिवनी ही क्यों?टोल नाकों की रणनीति NCB के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को एक बेहद रोचक जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि उनकी टीम सिवनी जिले को अपनी कार्रवाई के लिए सबसे ‘मुफीद’ मानती है। इसका भौगोलिक कारण यह है कि सिवनी जिले से किसी भी दिशा में प्रवेश करने या बाहर निकलने के लिए वाहन को कम से कम एक टोल नाके से गुजरना ही पड़ता है। टोल प्लाजा पर वाहनों की गति अनिवार्य रूप से धीमी होती है, जिससे संदिग्ध वाहनों की पहचान करना और उन्हें घेराबंदी कर पकड़ना एनसीबी के लिए आसान हो जाता है।
स्थानीय पुलिस के सूचना तंत्र पर प्रश्नचिन्ह: क्या तंत्र को जंग लग चुका है? NCB की इन लगातार दो सफलताओं ने सिवनी पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि जो गांजा छत्तीसगढ़ और ओडिशा से चलकर सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर सिवनी पहुँच जाता है, उसकी भनक स्थानीय पुलिस को क्यों नहीं लगती?
सिवनी पुलिस जिले भर में वाहन चेकिंग के नाम पर ‘स्टापर’ लगाकर खानापूर्ति तो करती है, लेकिन उनके सूचना संकलन (Information Gathering) की स्थिति चिंताजनक नजर आती है। जब 400 किलोमीटर दूर भोपाल में बैठी एनसीबी की टीम को सिवनी की सड़कों पर गांजा गुजरने की खबर मिल सकती है, तो स्थानीय थाना प्रभारियों और उनके मुखबिर तंत्र को इसकी जानकारी क्यों नहीं होती? क्या स्थानीय स्तर पर तस्करों को किसी प्रकार का मौन संरक्षण प्राप्त है या फिर पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है?
नशा मुक्त भारत2028:अमित शाह का संकल्प और जमीनी हकीकत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में घोषणा की है कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद अब भारत सरकार का अगला लक्ष्य 2028 तक देश को पूरी तरह ड्रग्स और नशे से मुक्त करना है। इस मिशन के तहत केंद्रीय एजेंसियां पूरी तरह सक्रिय हैं। मध्य प्रदेश पुलिस भी व्यापक अभियान चलाने का दावा करती है, लेकिन सिवनी जैसे जिलों में स्थानीय पुलिस की सुस्ती इस राष्ट्रीय संकल्प में बाधा बनती दिख रही है।
हब बनते रायसेन और विदिशा: एक नया खतरा इन दोनों कार्यवाहियों में एक बात समान थी—नशे की अंतिम मंजिल। एक खेप रायसेन जा रही थी तो दूसरी विदिशा। सूत्रों का कहना है कि यह जांच का विषय है कि क्या रायसेन, विदिशा और भोपाल संभाग के आसपास के जिले नशे के नए ‘हब’ (Hub) के रूप में विकसित हो रहे हैं? एनसीबी अब इस बात की तहकीकात कर रही है कि इन जिलों में गांजे की इतनी बड़ी सप्लाई किसे मिलनी थी और इसके पीछे कौन सा बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।
निष्कर्ष सिवनी में 190 किलो गांजे की जब्ती एक बड़ी उपलब्धि है, लेकिन यह केवल ‘हिमशैल का सिरा’ (Tip of the iceberg) हो सकता है। जब तक स्थानीय पुलिस अपने सूचना तंत्र को मजबूत नहीं करती और सड़कों पर केवल ‘स्टापर’ लगाने के बजाय ठोस खुफिया जानकारी पर काम नहीं करती, तब तक सिवनी की सड़कें तस्करों के लिए स्वर्ग बनी रहेंगी। एनसीबी की इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि तस्कर कितने भी शातिर क्यों न हों, केंद्रीय एजेंसियां उन्हें बख्शने वाली नहीं हैं। अब समय है कि स्थानीय प्रशासन भी अपनी नींद तोड़े और गृह मंत्री के ‘ड्रग-फ्री इंडिया’ के सपने को सच करने में सक्रिय भूमिका निभाए।
निष्कर्ष: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की यह कार्रवाई न केवल नशे के खिलाफ एक प्रहार है, बल्कि यह जिला पुलिस के लिए एक चेतावनी भी है। नशे की यह खेप युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने वाली थी, जिसे सही समय पर पकड़ लिया गया। अब उम्मीद है कि एनसीबी की पूछताछ में बड़े मगरमच्छों के नाम सामने आएंगे।

समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के भोपाल ब्यूरो में कार्यरत नंद किशोर लगभग 20 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं, एवं दो दशकों से समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से जुड़े हुए हैं.
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