सिवनी में इलेक्ट्रिक शवदाह गृह निर्माण पर उठे सवाल: 36 माह में 25% काम, 63 लाख भुगतान के बाद ठेकेदार को 4 माह की और मोहलत
मध्यप्रदेश के सिवनी शहर में प्रस्तावित इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के निर्माण को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। यह परियोजना शहर में आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल अंतिम संस्कार व्यवस्था उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इसका काम बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहा है।
जानकारी के अनुसार, इस परियोजना को पूरा करने की समय सीमा 36 माह निर्धारित की गई थी। लेकिन निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी निर्माण कार्य लगभग 25 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। इस बीच सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर सामने आया है कि 2023 में ही ठेकेदार को लगभग 63 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया था।
अब नगर पालिका प्रशासन ने उसी ठेकेदार को काम पूरा करने के लिए अतिरिक्त चार माह का समय दे दिया है। इस निर्णय ने स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक पारदर्शिता, कार्यप्रणाली और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
इलेक्ट्रिक शवदाह गृह की आवश्यकता और उद्देश्य
शहरों में बढ़ती आबादी और पर्यावरणीय चिंताओं को देखते हुए इलेक्ट्रिक शवदाह गृह की आवश्यकता लगातार महसूस की जा रही है। पारंपरिक लकड़ी आधारित दाह संस्कार से जहां बड़ी मात्रा में लकड़ी की खपत होती है, वहीं इससे प्रदूषण भी बढ़ता है।
इलेक्ट्रिक शवदाह गृह के प्रमुख लाभ इस प्रकार माने जाते हैं:
- पर्यावरण प्रदूषण में कमी
• लकड़ी की खपत में कमी
• अंतिम संस्कार की तेज प्रक्रिया
• आधुनिक और स्वच्छ व्यवस्था
इन्हीं उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए सिवनी नगर पालिका द्वारा इलेक्ट्रिक शवदाह गृह निर्माण की योजना शुरू की गई थी।
परियोजना की शुरुआत और प्रारंभिक योजना
सिवनी नगर पालिका द्वारा यह परियोजना कुछ वर्ष पहले स्वीकृत की गई थी। योजना के तहत शहर में एक आधुनिक इलेक्ट्रिक शवदाह गृह का निर्माण किया जाना था, जिससे नागरिकों को सुविधाजनक और पर्यावरण अनुकूल अंतिम संस्कार व्यवस्था मिल सके।
परियोजना के लिए ठेकेदार का चयन कर निर्माण कार्य शुरू किया गया। योजना के अनुसार:
- परियोजना की समय सीमा – 36 माह
• कुल लागत – लगभग एक करोड़ से अधिक का अनुमान
• निर्माण स्थल – नगर पालिका द्वारा चयनित श्मशान परिसर
परंतु शुरुआत के बाद से ही इस परियोजना की गति अपेक्षा से काफी धीमी रही।
36 माह में केवल 25 प्रतिशत काम
नगर पालिका से जुड़े सूत्रों के अनुसार, निर्धारित समय सीमा पूरी होने के बावजूद निर्माण कार्य केवल लगभग 25 प्रतिशत ही पूरा हो पाया है। इस स्थिति ने परियोजना की निगरानी और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
आमतौर पर नगर निकायों की परियोजनाओं में समय सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था होती है। लेकिन इस मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य की धीमी गति पर समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
2023 में ही 63 लाख रुपये का भुगतान
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा भुगतान को लेकर हो रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में ही ठेकेदार को लगभग 63 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया था।
यह भुगतान उस समय किया गया जब परियोजना का काम अभी शुरुआती चरण में ही था। इस भुगतान को लेकर स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठाए जा रहे हैं, जैसे:
- क्या भुगतान कार्य प्रगति के अनुसार किया गया?
• क्या निर्माण की गुणवत्ता और प्रगति का उचित सत्यापन हुआ?
• क्या भुगतान प्रक्रिया में प्रशासनिक मानकों का पालन किया गया?
इन सवालों के जवाब फिलहाल स्पष्ट रूप से सामने नहीं आए हैं।
ठेकेदार को फिर मिली चार माह की अतिरिक्त मोहलत
निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद आम तौर पर नगर निकायों में ठेकेदार पर कार्रवाई या जुर्माना लगाने की व्यवस्था होती है। लेकिन इस मामले में नगर पालिका ने ठेकेदार को चार माह की अतिरिक्त मोहलत दे दी है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार को यह अतिरिक्त समय परियोजना को पूरा करने के लिए दिया गया है। हालांकि इस निर्णय ने कई लोगों को हैरान किया है, क्योंकि परियोजना पहले ही निर्धारित समय से काफी पीछे चल रही है।
राजनीतिक संदर्भ और आरोप-प्रत्यारोप
इस पूरे मामले में राजनीतिक पहलू भी सामने आने लगे हैं। वर्ष 2023 में जब ठेकेदार को भुगतान किया गया था, उस समय नगर पालिका में कांग्रेस का शासन था। अब वर्तमान में सत्ताधारी भाजपा से जुड़े प्रतिनिधियों पर भी सवाल उठ रहे हैं कि उन्होंने इस मुद्दे पर सक्रियता क्यों नहीं दिखाई।
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों का मानना है कि इस परियोजना में प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल
शहरी विकास परियोजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। विशेष रूप से जब परियोजना सार्वजनिक धन से संचालित हो रही हो, तब उसकी निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है।
इस मामले में मुख्य सवाल निम्नलिखित हैं:
- परियोजना की नियमित समीक्षा क्यों नहीं हुई?
• निर्माण कार्य की धीमी गति पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
• भुगतान प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका रही?
इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी।
नागरिकों की प्रतिक्रिया
सिवनी के कई नागरिकों ने इस मामले पर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि शहर में आधुनिक सुविधाओं की आवश्यकता है और ऐसे प्रोजेक्ट समय पर पूरे होने चाहिए।
कुछ स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि परियोजनाएं वर्षों तक अधूरी पड़ी रहती हैं तो इससे न केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी होती है बल्कि शहर के विकास की गति भी प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों की राय
शहरी विकास से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नगर निकायों की परियोजनाओं में समय सीमा का पालन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग होनी चाहिए
• भुगतान कार्य प्रगति के अनुसार होना चाहिए
• देरी होने पर ठेकेदार पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए
यदि इन प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन किया जाए तो ऐसी स्थितियों से बचा जा सकता है।
आगे क्या हो सकता है?
अब जब ठेकेदार को चार माह की अतिरिक्त मोहलत दी गई है, तो आने वाले समय में इस परियोजना की प्रगति पर सभी की नजरें रहेंगी।
संभावित रूप से आगे निम्न स्थितियां सामने आ सकती हैं:
- निर्धारित अतिरिक्त समय में परियोजना पूरी हो सकती है
• निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच हो सकती है
• प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा या जांच की मांग उठ सकती है
यदि परियोजना तय समय में पूरी नहीं होती है तो नगर पालिका को कड़े निर्णय लेने पड़ सकते हैं।
निष्कर्ष
सिवनी में इलेक्ट्रिक शवदाह गृह निर्माण परियोजना का मामला केवल एक अधूरी परियोजना का नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बन गया है। 36 माह की समय सीमा के बाद भी केवल 25 प्रतिशत कार्य पूरा होना और इसके बावजूद ठेकेदार को बड़ी राशि का भुगतान तथा अतिरिक्त समय दिया जाना कई सवाल खड़े करता है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले चार महीनों में निर्माण कार्य किस गति से आगे बढ़ता है और क्या यह परियोजना अंततः अपने उद्देश्य को पूरा कर पाती है या नहीं। शहर के नागरिकों की अपेक्षा यही है कि सार्वजनिक हित से जुड़ी योजनाएं समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरी हों, ताकि शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं में वास्तविक सुधार हो सके।

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