(दीपक अग्रवाल)
मुंबई (साई)।बॉलीवुड में इन दिनों दो बड़े नाम चर्चा में हैं—एक ओर 69 वर्ष की उम्र में भी अपनी ऊर्जा से सबको चौंकाने वाले Anil Kapoor, तो दूसरी ओर जमानत पर रिहा होने के बाद फिर से काम पर लौटे Rajpal Yadav।
फिल्म ‘सुबेदार’ को लेकर निर्देशक Suresh Triveni ने हाल ही में अनिल कपूर के पेशेवर रवैये और उनके अनुशासन पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि अनिल कपूर ने फिल्म के लिए तुरंत हामी भर दी, लेकिन वे अपने पुराने काम की याद दिलाना पसंद नहीं करते।
‘सुबेदार’ के लिए तुरंत हां, बिना देर किए फैसला
निर्देशक सुरेश त्रिवेणी ने एक बातचीत में बताया कि जब उन्होंने ‘सुबेदार’ का एक लाइन का आइडिया अनिल कपूर को सुनाया, तो अभिनेता ने बिना किसी हिचक के हामी भर दी।
निर्देशक के अनुसार, फोन पर हुई उस बातचीत में अनिल कपूर का पहला जवाब था—“कब बनाना है?”
यह प्रतिक्रिया न केवल फिल्म के प्रति उनके उत्साह को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि वे नई कहानियों और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।
‘बीते कल की बात मत कीजिए’
सुरेश त्रिवेणी ने एक दिलचस्प पहलू साझा करते हुए कहा कि अनिल कपूर अपने पिछले काम की चर्चा सेट पर पसंद नहीं करते।
उनके शब्दों में, “अनिल सर कहते हैं—आज और कल की बात कीजिए, बीते कल की नहीं।”
यह दृष्टिकोण उनके व्यक्तित्व की उस विशेषता को दर्शाता है, जो उन्हें लगातार प्रासंगिक बनाए रखता है। वे अपने करियर की सफलताओं पर टिके रहने के बजाय वर्तमान और भविष्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं।
अनुशासन और तैयारी: 44 दिनों में पूरी हुई शूटिंग
निर्देशक ने बताया कि अनिल कपूर अपने किरदार को लेकर बेहद सजग रहते हैं।
उनकी तैयारी की कुछ खास बातें:
- किरदार से जुड़ी हर छोटी जानकारी की नोटबुक में एंट्री
- हेयर और मूंछों की ग्रोथ तक का रिकॉर्ड
- अलग से डायरी में कैरेक्टर डेवलपमेंट नोट्स
- सेट पर समय की पाबंदी
इस स्तर की पेशेवर प्रतिबद्धता के कारण फिल्म की शूटिंग केवल 44 दिनों में पूरी हो सकी।
फिल्म इंडस्ट्री में जहां अक्सर शूटिंग शेड्यूल लंबा खिंच जाता है, वहां यह उपलब्धि अनुशासन और स्पष्ट योजना का परिणाम मानी जा रही है।
69 की उम्र में भी ऊर्जा का राज
हाल ही में अनिल कपूर ने एक इंटरव्यू में स्वीकार किया कि असुरक्षा की भावना ही उनकी ऊर्जा का रहस्य है। उनका मानना है कि खुद को लगातार बेहतर साबित करने की इच्छा ही उन्हें सक्रिय रखती है।
उनकी यह सोच आज की युवा पीढ़ी के लिए भी प्रेरणादायक मानी जा रही है, जहां प्रतिस्पर्धा और निरंतर बदलाव आम बात है।
‘सुबेदार’ की कहानी और किरदार
फिल्म ‘सुबेदार’ एक रिटायर्ड आर्मी ऑफिसर की कहानी पर आधारित है, जो वर्दी के बाद के जीवन में खुद को ढालने की कोशिश करता है।
फिल्म में अनिल कपूर के साथ अभिनेत्री Radhika Madan भी नजर आएंगी।
निर्देशक ने बताया कि किरदार की प्रेरणा अनिल कपूर की 1980 के दशक की भूमिकाओं से मिली, लेकिन कहानी पूरी तरह समकालीन संदर्भ में रची गई है।
यह फिल्म भावनात्मक गहराई और यथार्थवादी प्रस्तुति के लिए जानी जा सकती है।
राजपाल यादव की वापसी, ‘वेलकम टू द जंगल’ की शूटिंग शुरू
दूसरी ओर, राजपाल यादव ने तिहाड़ जेल से जमानत पर रिहा होने के बाद दोबारा काम शुरू कर दिया है। चेक बाउंस मामले में जमानत मिलने के बाद वे जल्द ही फिल्म ‘Welcome To The Jungle’ की शूटिंग में शामिल होने जा रहे हैं।
मुंबई में 28 फरवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि राजपाल यादव की कॉमिक टाइमिंग और लोकप्रियता उन्हें जल्द ही फिर से मुख्यधारा में स्थापित कर सकती है।
इंडस्ट्री में पेशेवर संस्कृति का संदेश
अनिल कपूर और राजपाल यादव से जुड़ी ये दोनों घटनाएं फिल्म इंडस्ट्री के दो अलग-अलग पहलुओं को सामने लाती हैं।
एक ओर जहां अनुशासन, निरंतर मेहनत और वर्तमान पर फोकस सफलता की कुंजी है, वहीं दूसरी ओर कानूनी और व्यक्तिगत चुनौतियों के बावजूद पेशेवर वापसी भी संभव है।
यह संदेश खासतौर पर युवा कलाकारों और तकनीशियनों के लिए महत्वपूर्ण है।
दर्शकों की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर अनिल कपूर के अनुशासन और ऊर्जा की सराहना की जा रही है। कई प्रशंसकों का कहना है कि 69 वर्ष की उम्र में भी उनका समर्पण प्रेरणादायक है।
राजपाल यादव की वापसी को लेकर भी मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, लेकिन बड़ी संख्या में दर्शक उनकी वापसी का स्वागत कर रहे हैं।
भविष्य की संभावनाएं
‘सुबेदार’ को लेकर उम्मीद की जा रही है कि यह फिल्म कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा की श्रेणी में एक मजबूत उदाहरण पेश करेगी।
यदि फिल्म को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है, तो यह अनिल कपूर के करियर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ सकती है।
राजपाल यादव के लिए भी आने वाले महीने निर्णायक साबित हो सकते हैं। उनकी अगली परियोजनाएं तय करेंगी कि वे इंडस्ट्री में किस तरह अपनी स्थिति मजबूत करते हैं।
निष्कर्ष
‘सुबेदार’ को लेकर अनिल कपूर का तुरंत फैसला और उनका अतीत पर चर्चा से बचना यह दर्शाता है कि वे अपने करियर को नए दृष्टिकोण से देखते हैं। अनुशासन, तैयारी और वर्तमान पर फोकस उनकी सफलता का आधार है।
वहीं, राजपाल यादव की वापसी यह संकेत देती है कि चुनौतियों के बाद भी नए सिरे से शुरुआत संभव है।
दोनों घटनाएं बॉलीवुड इंडस्ट्री में पेशेवर प्रतिबद्धता और पुनरुत्थान की कहानी कहती हैं, जो आने वाले समय में दर्शकों और कलाकारों दोनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकती हैं।

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