(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)।सिवनी जिले में शनिवार 14 फरवरी 2026 को शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में आयोजित कृषि विज्ञान मेला किसानों के लिए नई ऊर्जा और विश्वास का केंद्र बना। आत्मा योजना अंतर्गत आयोजित इस मेले में जिलेभर से बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया और आधुनिक, वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती से जुड़ी नवीनतम जानकारियां प्राप्त कीं।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं से किसानों को मिल रहे प्रत्यक्ष लाभों को रेखांकित करते हुए कहा कि वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है।
किसान कल्याण वर्ष 2026: नीति से लेकर जमीन तक बदलाव
सांसद ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य खेती को टिकाऊ, लाभकारी और तकनीक आधारित बनाना है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 55 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचित हो रही है और आने वाले वर्षों में इसे और विस्तारित करने का लक्ष्य है।
उनके अनुसार:
- ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा
- उन्नत बीजों का वितरण
- ड्रोन आधारित छिड़काव प्रणाली
- मृदा परीक्षण को अनिवार्य प्रोत्साहन
- वैज्ञानिक सलाह के माध्यम से फसल विविधीकरण
इन पहलों का उद्देश्य लागत घटाना और उत्पादन बढ़ाना है।
आधुनिक खेती की ओर बढ़ता सिवनी
मेले में किसानों को यह संदेश दिया गया कि समय की मांग पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर ज्ञान आधारित खेती की है। विधायक दिनेश राय ने किसानों से संवाद करते हुए कहा कि फसल चयन से पहले भूमि की उर्वरता, जलधारण क्षमता और बाजार की मांग का अध्ययन करना आवश्यक है।
उन्होंने समन्वित खेती मॉडल पर जोर देते हुए कहा कि:
- पशुपालन
- दुग्ध उत्पादन
- बागवानी
- मधुमक्खी पालन
- मत्स्य पालन
को फसल उत्पादन के साथ जोड़कर आय के स्रोत बढ़ाए जा सकते हैं। इससे जोखिम कम होगा और सालभर आय सुनिश्चित होगी।
प्राकृतिक खेती: भविष्य की दिशा
विधायक कमल मर्सकोले ने कहा कि सरकार खेती को मजबूरी नहीं बल्कि लाभकारी व्यवसाय बनाना चाहती है। उन्होंने खाद और बीज की समय पर उपलब्धता, वितरण प्रणाली की मजबूती और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को प्रमुख उपलब्धि बताया।
पूर्व सांसद ढालसिंह बिसेन ने हरित क्रांति के बाद रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए प्राकृतिक और जैविक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताया। उनके अनुसार प्राकृतिक खेती केवल कृषि पद्धति नहीं बल्कि जीवनशैली में परिवर्तन है।
उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों की मांग बढ़ रही है और सरकार किसानों को प्रशिक्षण, प्रोत्साहन और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य कर रही है।
योजनाओं से आर्थिक मजबूती
सांसद कुलस्ते ने किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से किसानों के खाते में सीधे सहायता पहुंच रही है।
सरकारी योजनाओं का प्रभाव:
- खेती में निवेश की क्षमता बढ़ी
- बीज, उर्वरक और उपकरणों की खरीद आसान
- तकनीकी नवाचार अपनाने में आत्मविश्वास
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गति
इन पहलों से छोटे और सीमांत किसानों को विशेष राहत मिली है।
विभागीय स्टॉल रहे आकर्षण का केंद्र
मेले में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य और ग्रामीण आजीविका मिशन सहित विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए।
इन स्टॉलों पर किसानों को जानकारी दी गई:
- प्राकृतिक एवं जैविक खेती
- पराली प्रबंधन तकनीक
- फार्मर रजिस्ट्री
- ई-विकास प्रणाली
- उन्नत कृषि यंत्र
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड
कृषि वैज्ञानिकों ने परिचर्चा के माध्यम से किसानों की समस्याओं का समाधान किया। जैविक एवं प्राकृतिक हाट बाजार विशेष आकर्षण रहा।
सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
कृषि विज्ञान मेले जैसे आयोजन ग्रामीण समाज में जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बन रहे हैं। इससे:
- किसानों में तकनीकी समझ विकसित होती है
- युवाओं का खेती की ओर रुझान बढ़ता है
- महिला स्व-सहायता समूहों को बाजार से जुड़ने का अवसर मिलता है
- स्थानीय उत्पादों को पहचान मिलती है
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रशिक्षण और विपणन सहायता नियमित रूप से उपलब्ध हो, तो ग्रामीण क्षेत्रों में आय दोगुनी करने का लक्ष्य व्यवहारिक रूप से संभव है।
आंकड़ों के आधार पर बदलती तस्वीर
प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार, सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं में वृद्धि और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण प्रणाली ने कृषि क्षेत्र की संरचना को मजबूत किया है।
55 लाख हेक्टेयर से अधिक सिंचित भूमि यह संकेत देती है कि जल प्रबंधन की दिशा में ठोस प्रयास हुए हैं। यदि इसमें सौर ऊर्जा आधारित पंप और जल संरक्षण तकनीकों को जोड़ा जाए, तो दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सकती है।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की सहभागिता
कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डेहरिया, जिला भाजपा अध्यक्ष मीना बिसेन, पूर्व विधायक राकेश पाल तथा कलेक्टर शीतला पटले सहित अन्य जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रशासनिक स्तर पर यह संदेश स्पष्ट रहा कि योजनाओं को गांव स्तर तक पहुंचाना प्राथमिकता है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार संपर्क की प्रक्रिया निरंतर जारी रहे।
भविष्य की संभावनाएं
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि:
- ड्रोन और डिजिटल तकनीक का उपयोग
- मौसम आधारित फसल सलाह
- जैविक उत्पादों का ब्रांडिंग
- किसान उत्पादक संगठनों (FPO) की मजबूती
आने वाले वर्षों में कृषि क्षेत्र को नई दिशा दे सकते हैं।
यदि किसान कल्याण वर्ष के तहत घोषित कार्यक्रम जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो इससे आय वृद्धि और कृषि स्थिरता दोनों संभव हैं।
निष्कर्ष
सिवनी में आयोजित कृषि विज्ञान मेला केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि किसानों के लिए ज्ञान, तकनीक और आत्मविश्वास का मंच साबित हुआ। केन्द्र और राज्य सरकार की योजनाओं से आर्थिक संबल मिलने के साथ-साथ आधुनिक एवं प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ता कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
किसान कल्याण वर्ष 2026 के तहत यदि प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता और बाजार सुविधा निरंतर मिलती रही, तो खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदलने का लक्ष्य साकार हो सकता है। सिवनी का यह आयोजन इस परिवर्तन की सकारात्मक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

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