(वाय.के. पाण्डेय)
नई दिल्ली (साई)। देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर ज्ञान, साहित्य और विचारों की राजधानी बन गई है। बहुप्रतीक्षित विश्व पुस्तक मेला पूरे भव्य स्वरूप में शुरू हो चुका है। प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन ने पहले ही दिन यह स्पष्ट कर दिया कि डिजिटल युग के बावजूद पुस्तकों का आकर्षण आज भी बरकरार है। हजारों की संख्या में पहुंचे पाठक, लेखक, शिक्षक, विद्यार्थी और प्रकाशक इस बात के गवाह बने कि पुस्तकें आज भी समाज की बौद्धिक रीढ़ हैं।
उद्घाटन के साथ साहित्यिक माहौल जीवंत
विश्व पुस्तक मेले का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति और शिक्षा से जुड़े प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया। उद्घाटन समारोह में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक और डिजिटल माध्यमों के विस्तार के बावजूद पुस्तकों का महत्व कम नहीं हुआ है। बल्कि अच्छे, जिम्मेदार और विचारोत्तेजक साहित्य की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।
उद्घाटन के साथ ही भारत मंडपम परिसर में साहित्यिक उत्साह देखने लायक था। हर ओर पुस्तकों से सजे स्टॉल, लेखकों के पोस्टर और पाठकों की चहल-पहल ने आयोजन को उत्सव का रूप दे दिया।
देश-विदेश के प्रकाशकों की व्यापक भागीदारी
इस वर्ष के विश्व पुस्तक मेले में देश के लगभग सभी प्रमुख प्रकाशकों की भागीदारी देखने को मिल रही है। इसके साथ ही कई अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन संस्थान भी अपने नवीन और लोकप्रिय प्रकाशनों के साथ उपस्थित हैं।
हिंदी और अंग्रेज़ी के अलावा उर्दू, संस्कृत, मराठी, तमिल, तेलुगु, बंगाली, गुजराती सहित अनेक भारतीय भाषाओं की पुस्तकें पाठकों को आकर्षित कर रही हैं। यह बहुभाषी स्वरूप भारतीय साहित्यिक विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से प्रस्तुत करता है।
हर वर्ग के पाठकों के लिए विशाल संग्रह
विश्व पुस्तक मेले की खासियत यह है कि यहां हर आयु और हर रुचि के पाठकों के लिए सामग्री उपलब्ध है।
प्रमुख श्रेणियां इस प्रकार हैं:
- शैक्षणिक और संदर्भ पुस्तकें
- प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से जुड़ा साहित्य
- बाल साहित्य और चित्र पुस्तिकाएं
- इतिहास, राजनीति और समाजशास्त्र
- समकालीन कथा, कविता और आलोचना
यह विविधता पुस्तक मेले को केवल साहित्य प्रेमियों तक सीमित नहीं रहने देती, बल्कि इसे आम नागरिकों के लिए भी उपयोगी बनाती है।
युवाओं और छात्रों की उत्साहपूर्ण भागीदारी
विश्व पुस्तक मेले में सबसे अधिक उत्साह छात्रों और युवाओं में देखने को मिल रहा है। स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थी समूहों में पहुंचकर प्रतियोगी परीक्षाओं, करियर गाइडेंस और अकादमिक पुस्तकों की खरीदारी कर रहे हैं।
युवाओं के लिए लेखक संवाद, पुस्तक हस्ताक्षर कार्यक्रम और प्रेरक सत्र विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से युवाओं में पढ़ने-लिखने की आदत मजबूत होती है और बौद्धिक विकास को दिशा मिलती है।
लेखक संवाद और साहित्यिक विमर्श
मेले के दौरान प्रतिदिन साहित्यिक गतिविधियों की लंबी श्रृंखला आयोजित की जा रही है। इनमें शामिल हैं:
- लेखक संवाद
- कविता पाठ और कहानी सत्र
- पुस्तक विमोचन
- विचार गोष्ठियां
इन सत्रों में प्रसिद्ध लेखक, पत्रकार और विचारक समकालीन समाज, राजनीति, तकनीक, शिक्षा और संस्कृति जैसे विषयों पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि विश्व पुस्तक मेला केवल व्यावसायिक आयोजन नहीं, बल्कि वैचारिक संवाद का भी बड़ा मंच है।
डिजिटल युग में पुस्तकों की प्रासंगिकता पर चर्चा
इस वर्ष मेले का एक प्रमुख विमर्श डिजिटल युग में मुद्रित पुस्तकों की भूमिका को लेकर है। ई-बुक और ऑडियो बुक के बढ़ते चलन के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या कागज़ की किताबें पीछे छूट जाएंगी।
विशेषज्ञों का मत है कि डिजिटल माध्यम सुविधाजनक जरूर हैं, लेकिन गहन अध्ययन, एकाग्रता और वैचारिक समझ के लिए मुद्रित पुस्तकें आज भी अपरिहार्य हैं। इसी संतुलन को लेकर मेले में कई विचार सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
बाल साहित्य पर विशेष फोकस
विश्व पुस्तक मेले में बच्चों के लिए विशेष पवेलियन आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां कहानी सत्र, चित्रकला, रचनात्मक लेखन और संवादात्मक गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं।
अभिभावकों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित होती है और वे मोबाइल व डिजिटल स्क्रीन से कुछ समय के लिए दूर रहते हैं। यह बाल विकास की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्थाएं
आयोजकों द्वारा सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं। प्रवेश व्यवस्था, पार्किंग, स्वच्छता और मार्गदर्शन के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए स्वयंसेवकों और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है, जिससे आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सामाजिक दृष्टि से भी यह आयोजन महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समाज के विभिन्न वर्गों को एक साझा बौद्धिक मंच प्रदान करता है।
पुस्तक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण मंच
विश्व पुस्तक मेला प्रकाशन उद्योग के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां नए लेखकों को पहचान मिलती है, छोटे प्रकाशकों को पाठकों तक पहुंचने का अवसर मिलता है और पुस्तक बाजार की दिशा तय होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से पुस्तक उद्योग को नई ऊर्जा मिलती है और साहित्यिक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।
जनता की प्रतिक्रिया और माहौल
मेले में पहुंचे पाठकों की प्रतिक्रिया उत्साहजनक रही है। कई लोगों ने इसे “ज्ञान का उत्सव” बताया, तो कुछ ने इसे परिवार के साथ समय बिताने का सार्थक माध्यम कहा। यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि पुस्तक मेला आज भी सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
भविष्य की संभावनाएं
विश्व पुस्तक मेला आने वाले दिनों में और अधिक भीड़ और गतिविधियों का केंद्र बनने की संभावना रखता है। नए सत्र, चर्चाएं और पुस्तक विमोचन पाठकों को लगातार आकर्षित करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आयोजन भविष्य में भी पुस्तक संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।
Conclusion /निष्कर्ष
दिल्ली का विश्व पुस्तक मेला एक बार फिर यह सिद्ध कर रहा है कि पुस्तकें आज भी समाज की बौद्धिक और सांस्कृतिक धुरी हैं। लेखकों, पाठकों और प्रकाशकों के इस संगम ने राजधानी को कुछ दिनों के लिए ज्ञान और विचारों का केंद्र बना दिया है। डिजिटल दौर में भी पुस्तक संस्कृति को जीवंत रखने वाला यह आयोजन नई पीढ़ी को साहित्य से जोड़ने की दिशा में एक मजबूत और प्रेरक कदम माना जा रहा है।

हर्ष वर्धन वर्मा का नाम टीकमगढ़ जिले में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद एक बार फिर पत्रकारिता में सक्रियता बना रहे हैं हर्ष वर्धन वर्मा . . .
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