(विजय सिंह राजपूत)
इंदौर (साई)।इंदौर में भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण 21 लोगों की मौत के बाद शहर में राजनीतिक उथल-पुथल तेज हो गई है। इस घटना ने न केवल नगर निगम और जल विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि आम जनता में भी भय और आक्रोश का माहौल बना दिया है। इसी पृष्ठभूमि में रविवार 11 जनवरी को कांग्रेस पार्टी ने एक बड़ा जनआंदोलन खड़ा करते हुए ‘न्याय यात्रा’ का आयोजन किया। यह यात्रा बड़ा गणपति चौराहा से शुरू होकर ऐतिहासिक राजबाड़ा तक पहुंची।

इस यात्रा में प्रदेश कांग्रेस के लगभग सभी वरिष्ठ नेता मौजूद रहे, जिसने इसे एक बड़े राजनीतिक कार्यक्रम का रूप दे दिया। कांग्रेस का स्पष्ट कहना है कि यह यात्रा केवल विरोध नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में पहला कदम है।
दूषित पानी से21मौत—राजनीति में मचा बवाल
भागीरथपुरा में गंदे और विषैले पानी की सप्लाई के चलते 21 लोगों की जान चली गई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से पानी में बदबू और बदरंगपन की शिकायतें दी जा रही थीं, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने किसी तरह की कार्रवाई नहीं की।
घटना सामने आने के बाद कांग्रेस ने इसे प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक उदासीनता का नतीजा बताया।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि “मानव निर्मित त्रासदी” है। ऐसी त्रासदी, जिसे थोड़ी-सी संवेदनशीलता और समय पर कार्रवाई से टाला जा सकता था।
कांग्रेस की‘न्याय यात्रा’—क्या था उद्देश्य?
बड़ा गणपति चौराहा से शुरू हुई यात्रा के तीन मुख्य उद्देश्य थे:
- पीड़ित परिवारों के लिए1करोड़ रुपये का मुआवजा
- दोषियों के खिलाफ आपराधिक (हत्या) का केस दर्ज करना
- जल आपूर्ति प्रणाली में व्यापक सुधार और पारदर्शिता की मांग
कांग्रेस का कहना है कि सरकार वास्तविक मौतों की संख्या छुपा रही है और जांच में गंभीरता नहीं दिखा रही है। इसीलिए पार्टी ने इसे जनहित का मुद्दा बताते हुए सड़क पर उतरने का फैसला किया।
प्रदेश के बड़े नेताओं की विशाल उपस्थिति—राजनैतिक संदेश स्पष्ट
न्याय यात्रा में प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, राष्ट्रीय सचिव उषा नायडू, संजय दत्त, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता शामिल रहे।
उनकी उपस्थिति से यह संकेत स्पष्ट था कि कांग्रेस इस मुद्दे को मिशन मोड में आगे बढ़ाने जा रही है।
यात्रा का नेतृत्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने किया।
वहीं संचालन पार्षद राजू भदौरिया और लोकेश हार्डिया ने किया।
यह भी उल्लेखनीय है कि यात्रा में बड़ी संख्या में महिला कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल थीं, जो गंदे पानी से हुई मौतों को लेकर विशेष रूप से आक्रोशित दिखीं।
नारे,तख्तियां और जनता की भावनाएं—सड़क पर उमड़ा गुस्सा
यात्रा में शामिल लोगों के हाथों में लिखी तख्तियां जनता की पीड़ा और सरकार के प्रति रोष को सीधे शब्दों में बयां कर रही थीं। इनमें उल्लेखित कुछ प्रमुख नारे थे:
- “नर्मदा के अमृत में मिला दिया मानव मल-मूत्र का ज़हर”
- “पानी मांगा था—ज़हर पिला दिया”
- “1लाख करोड़ का हिसाब दो”
- “बीजेपी सरकार एक गिलास साफ पानी भी नहीं दे सकी”
ये नारे केवल विरोध नहीं बल्कि प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल उठाते दिखाई दिए।
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह कार की छत पर चढ़े—माहौल हुआ गरमागर्म
यात्रा के दौरान एक प्रमुख क्षण तब सामने आया जब पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भीड़ को संबोधित करने के लिए चलते हुए वाहन की छत पर चढ़ गए।
दिग्विजय सिंह ने कहा:
“इंदौर में पार्षद से लेकर संसद तक बीजेपी का नियंत्रण है,फिर भी लोगों को साफ पानी नहीं मिल पा रहा। यह लंबी लड़ाई है और हमें हर घर जाकर लोगों को जागरूक करना होगा।”
वहीं उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार मौतों की संख्या छुपा रही है और जरूरत है कि जनता को सच बताया जाए।
बीजेपी पर तीखे प्रहार—‘अब कहां हैं भगवाधारी?’
न्याय यात्रा में उमंग सिंघार ने बीजेपी पर तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने कहा:
“बांग्लादेश में मारे गए हिंदुओं की चिंता करने वाली बीजेपी भागीरथपुरा में मरे हिंदुओं पर खामोश क्यों है?अब सारे भगवाधारी कहां गए?इस मुद्दे पर आवाज क्यों नहीं उठा रहे?”
उनके इस बयान ने भीड़ में उत्साह के साथ-साथ राजनीतिक तापमान भी बढ़ा दिया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का बड़ा ऐलान—वाटर ऑडिट अभियान शुरू होगा
जीतू पटवारी ने इस दौरान कहा:
“बीजेपी धार्मिक ध्रुवीकरण के सहारे वोट ले रही है,लेकिन जनता को साफ पानी तक नहीं दे पाई। कांग्रेस अब पूरे शहर में वाटर ऑडिट अभियान चलाएगी और हर क्षेत्र में पानी की जांच कर बताएगी कि पानी साफ है या नहीं।”
उन्होंने जनता से अपील की कि वे कांग्रेस के साथ खड़े होकर वास्तविक मुद्दों पर लड़ाई को मजबूत करें।
जनता की भावनाएं—डर,आक्रोश और उम्मीद
भागीरथपुरा त्रासदी के बाद इंदौर में आम नागरिकों के मन में डर बैठ गया है। कई परिवारों ने बताया कि वे अब नल के पानी का उपयोग करने से पहले सौ बार सोचते हैं।
स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं:
- पानी की सप्लाई लाइन की संपूर्ण जांच
- दूषित पानी के स्रोत की पहचान
- जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित कर कड़ी कार्रवाई
- मृतकों के परिवारों के लिए उचित मुआवजा
कांग्रेस की न्याय यात्रा ने इन आवाज़ों को और मजबूती दी है।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव—इंदौर में बढ़ती असहजता
भागीरथपुरा कांड अब केवल स्थानीय घटना नहीं बल्कि राज्य-स्तरीय राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
सरकार पर दबाव बढ़ रहा है कि वह:
- मौतों के वास्तविक आंकड़े सामने लाए
- जांच को तेज करे
- दोषियों पर FIR दर्ज करे
- जल आपूर्ति प्रणाली को दुरुस्त करे
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति में बड़ा प्रभाव डाल सकता है।
भविष्य की संभावनाएं—क्या यह आंदोलन लंबा चलेगा?
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि न्याय यात्रा केवल शुरुआत है।
अगले चरण में:
- वाटर ऑडिट अभियान
- घर-घर जनसंवाद
- शहर स्तरीय जनजागरूकता अभियान
- विस्तृत तथ्य-finding रिपोर्ट
जैसी गतिविधियाँ चलाई जाएंगी।
यदि सरकार ने समय पर ठोस कार्रवाई न की, तो यह आंदोलन और मजबूत हो सकता है।
8️⃣ निष्कर्ष (Conclusion)
भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों ने इंदौर की प्रशासनिक व्यवस्थाओं और राजनीतिक प्राथमिकताओं पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस की न्याय यात्रा ने इस मुद्दे को प्रदेश स्तर पर बड़ा रूप दे दिया है। 1 करोड़ रुपये के मुआवजे और आपराधिक केस की मांग के साथ कांग्रेस ने साफ संदेश दिया है कि यह लड़ाई केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी है। आने वाले दिनों में इस आंदोलन का स्वरूप और असर दोनों बढ़ सकते हैं, और प्रशासन की अगली कार्रवाई ही तय करेगी कि पीड़ित परिवारों को कितना वास्तविक न्याय मिल पाता है।

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