❄️ ठंड के कारण स्कूलों का समय बदला, नर्सरी से आठवीं तक की कक्षाएं अब 9:30 बजे के बाद

सिवनी जिले में बढ़ती ठंड और गिरते तापमान को देखते हुए जिला प्रशासन ने नर्सरी से आठवीं तक की कक्षाओं का समय बदल दिया है। अब ये कक्षाएं सुबह 9:30 बजे से पहले संचालित नहीं होंगी। यह निर्णय बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

(अखिलेश दुबे)

सिवनी (साई)।मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में ठंड का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। तापमान में गिरावट का सीधा असर आम जनजीवन के साथ-साथ स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए स्कूल समय में बदलाव किया है।

कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सिवनी श्रीमती शीतला पटेल द्वारा जारी आदेश के अनुसार जिले के सभी शासकीय, अशासकीय, सीबीएसई, आईसीएसई, अनुदान प्राप्त एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों में नर्सरी से आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई सुबह 9:30 बजे से पहले नहीं होगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

यह निर्णय न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से भी इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा।

हर वर्ष सर्दियों के मौसम में तापमान में गिरावट के साथ बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार और सांस संबंधी बीमारियों की शिकायत बढ़ जाती है। विशेषकर छोटे बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, जिससे सुबह के समय ठंड में स्कूल जाना उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।

पिछले कुछ वर्षों में कई जिलों में ठंड या लू के कारण स्कूल समय में बदलाव किया जाता रहा है। इसी क्रम में सिवनी जिला प्रशासन ने भी मौसम की गंभीरता को देखते हुए यह निर्णय लिया।

इस आदेश के पीछे मुख्य उद्देश्य है —
बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करना और बीमारियों के जोखिम को कम करना।

दिनांक 5 जनवरी 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि —

  • नर्सरी से कक्षा 8वीं तक की कक्षाएं सुबह 9:30 बजे से पहले संचालित नहीं होंगी।
  • आदेश जिले के सभी प्रकार के स्कूलों पर लागू होगा — शासकीय, निजी, सीबीएसई, आईसीएसई और अनुदान प्राप्त।
  • परीक्षाएं और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां पूर्व निर्धारित समयानुसार ही संचालित होंगी।
  • आदेश आगामी निर्देश तक प्रभावशील रहेगा।

इस आदेश की सूचना सभी संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रबंधन तक पहुंचा दी गई है ताकि इसका तत्काल पालन सुनिश्चित हो सके।

प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव

इस निर्णय का प्रशासनिक स्तर पर यह प्रभाव पड़ेगा कि स्कूलों को अपने समय-सारिणी में परिवर्तन करना होगा। बस सेवाओं, शिक्षकों की उपस्थिति और परीक्षा कार्यक्रमों में भी समन्वय की आवश्यकता होगी।

सामाजिक स्तर पर यह निर्णय अभिभावकों और बच्चों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। सुबह की कड़ाके की ठंड में बच्चों को स्कूल भेजने की चिंता कम होगी और बीमारियों की संभावना भी घटेगी।

यह फैसला यह दर्शाता है कि प्रशासन केवल अकादमिक नहीं बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी निर्णय ले रहा है।

आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण

सर्दियों में बच्चों में होने वाली आम समस्याएं:

  • सर्दी और खांसी
  • बुखार
  • गले में संक्रमण
  • सांस लेने में तकलीफ
  • एलर्जी और अस्थमा की समस्या

चिकित्सकीय आंकड़ों के अनुसार सर्दियों में बच्चों के बीमार पड़ने की दर लगभग 20–30% तक बढ़ जाती है। ऐसे में सुबह के समय स्कूल जाना उनके स्वास्थ्य पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

प्रशासन का यह निर्णय स्वास्थ्य जोखिम को कम करने की दिशा में एक निवारक कदम माना जा सकता है।

आम जनता पर असर

अभिभावकों के लिए यह निर्णय सकारात्मक है क्योंकि:

  • बच्चों की नींद पूरी होगी।
  • सुबह की ठंड से बचाव होगा।
  • बीमार पड़ने का खतरा कम होगा।

हालांकि कुछ माता-पिता के लिए कार्य समय और स्कूल समय में तालमेल बिठाना चुनौती हो सकता है, लेकिन अधिकांश लोग इस निर्णय को बच्चों के हित में मान रहे हैं।

स्कूल प्रबंधन के लिए यह निर्णय संचालनात्मक बदलाव लेकर आया है, लेकिन छात्रों के स्वास्थ्य के लिए इसे आवश्यक समझा जा रहा है।

भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?

यदि ठंड का प्रकोप और बढ़ता है तो भविष्य में:

  • स्कूल समय और आगे बढ़ाया जा सकता है।
  • छुट्टियों या ऑनलाइन कक्षाओं पर भी विचार किया जा सकता है।
  • प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए विशेष दिशानिर्देश जारी हो सकते हैं।

प्रशासन मौसम की स्थिति के अनुसार आगे भी आवश्यक निर्णय ले सकता है।

8️⃣ निष्कर्ष / Conclusion

सिवनी जिले में स्कूल समय में किया गया यह परिवर्तन प्रशासन की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी को दर्शाता है। बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए लिया गया यह निर्णय न केवल वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप है बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी सराहनीय है।

यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि शिक्षा की निरंतरता बनी रहे, लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं। आने वाले समय में भी ऐसे संतुलित निर्णय प्रशासन और समाज के बीच विश्वास को मजबूत करेंगे।