(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)।भोपाल के लोक भवन में रविवार की शाम एक महत्वपूर्ण शासकीय और वैचारिक संवाद देखने को मिला, जब राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सौजन्य भेंट की। यह भेंट केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें प्रदेश के विकास, किसानों के कल्याण, उद्योग और संस्कृति जैसे व्यापक विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री को सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर बधाई दी, वहीं मुख्यमंत्री ने राज्यपाल को शासन की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तकें भेंट कर प्रदेश की विकास यात्रा से अवगत कराया।
मध्यप्रदेश में वर्तमान सरकार के दो वर्ष पूर्ण होना केवल एक प्रशासनिक उपलब्धि नहीं, बल्कि शासन के कार्यों की समीक्षा का भी अवसर है। इन दो वर्षों में राज्य सरकार ने कृषि, उद्योग, ऊर्जा, रोजगार और संस्कृति के क्षेत्र में कई योजनाएं प्रारंभ की हैं।
सरकार ने वर्ष 2025 को “उद्योग एवं रोजगार वर्ष” के रूप में मनाया था, जिसका उद्देश्य प्रदेश में निवेश आकर्षित करना और युवाओं को रोजगार देना था। इसके बाद वर्ष 2026 को “कृषि वर्ष” घोषित किया गया है, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
वर्तमान स्थिति / Latest Developments
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राज्यपाल को बताया कि वर्ष 2026 की थीम “समृद्ध किसान –समृद्ध प्रदेश” रखी गई है। इसके तहत सभी विभाग मिलकर कृषि से जुड़े नवाचारों और योजनाओं को लागू करेंगे।
मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- किसान कल्याण और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता
- उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा
- पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्र में निवेश
- सहकारिता और पंचायत स्तर पर भागीदारी
- अक्षय ऊर्जा आधारित कृषि योजनाएं
दावोस सम्मेलन और वैश्विक मंच पर मध्यप्रदेश
मुख्यमंत्री ने बताया कि 18 से 23 जनवरी 2026 के बीच स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक होगी। इस मंच पर मध्यप्रदेश की औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र की उपलब्धियों को वैश्विक निवेशकों के सामने रखा जाएगा।
विशेष रूप से प्रस्तुत किए जाएंगे:
- पीथमपुर ऑटो क्लस्टर
- ओंकारेश्वर फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट
- रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर प्रोजेक्ट
इससे राज्य में निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी।
प्रशासनिक और सामाजिक प्रभाव
सरकारी योजनाओं का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। कृषि वर्ष की घोषणा से किसानों में उम्मीद जगी है कि उन्हें तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और बेहतर बाजार मिलेगा।
सामाजिक स्तर पर:
- ग्रामीण युवाओं को नए अवसर
- किसानों की आय में संभावित वृद्धि
- स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन
- आत्मनिर्भर ग्राम पंचायतों की दिशा
आंकड़े, तथ्य और विश्लेषण
प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना के अंतर्गत:
- 33,000 किसानों के खेतों में सोलर पंप के कार्यादेश जारी
- 34,600 लेटर ऑफ अवॉर्ड वितरित
- 52,000 किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य
यह दर्शाता है कि राज्य सरकार नवीकरणीय ऊर्जा और कृषि को जोड़कर दीर्घकालिक समाधान की ओर बढ़ रही है।
सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियां
मुख्यमंत्री ने जबलपुर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय रामायण सम्मेलन की जानकारी भी दी। इसमें 120 विद्वानों के व्याख्यान, 28 हजार सुंदरकांड पाठ और 25 सत्र आयोजित किए गए।
साथ ही गीता भवनों के निर्माण से सांस्कृतिक चेतना को संस्थागत रूप दिया जा रहा है।
आम जनता पर असर
इन सभी योजनाओं और आयोजनों का प्रभाव केवल प्रशासन तक सीमित नहीं है। इससे:
- किसानों को नई तकनीक मिलेगी
- युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे
- सांस्कृतिक पहचान मजबूत होगी
- प्रदेश की छवि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरेगी
भविष्य की संभावनाएं / आगे क्या?
आगामी वर्षों में सरकार का फोकस होगा:
- कृषि आधारित उद्योग
- हरित ऊर्जा का विस्तार
- ग्रामीण पर्यटन
- सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन
- निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन
यदि योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो मध्यप्रदेश आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तर पर मजबूत हो सकता है।
निष्कर्ष / Conclusion
राज्यपाल और मुख्यमंत्री की यह सौजन्य भेंट केवल औपचारिक नहीं, बल्कि प्रदेश की दिशा तय करने वाला संवाद था। इसमें कृषि, उद्योग, ऊर्जा और संस्कृति को जोड़कर समग्र विकास की रूपरेखा सामने आई। यदि योजनाएं जमीन पर सफल होती हैं, तो यह प्रदेश को समृद्धि और स्थिरता की ओर ले जाएंगी।

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