जब संपादक बोले “कम शब्दों में लिखो” और रिपोर्टर ने इतिहास रच दिया!

कभी विस्तार, कभी संक्षेप— पत्रकारिता की इसी उलझन पर आधारित है यह मज़ेदार हास्य लेख। जहां संपादक की सलाह और रिपोर्टर की “क्रिएटिविटी” मिलकर ऐसा समाचार बनाती है कि हंसी रोकना मुश्किल हो जाए।

पत्रकारिता एक गंभीर पेशा माना जाता है,
लेकिन कभी-कभी यही गंभीरता
हंसी का सबसे बड़ा कारण बन जाती है।

एक प्रेस रिपोर्टर था,
जिसे खबर लिखने का बड़ा शौक था—
विस्तार से, पूरे मसाले के साथ।
घटना छोटी हो या बड़ी,
खबर ऐसी कि लगे उपन्यास पढ़ रहे हों।

संपादक जी परेशान हो गए।
एक दिन बुलाकर बोले—
“भाई, खबर कम से कम शब्दों में लिखा करो।
आजकल पाठक के पास टाइम नहीं है!”

रिपोर्टर ने बात गांठ बांध ली।

📰 अगली खबर और पत्रकारिता का कमाल

अगले ही दिन रिपोर्टर ने जो समाचार भेजा,
उसे पढ़कर संपादक भी चुप हो गए।

समाचार कुछ यूं था—
स्थानीय तेल कंपनी के एक कर्मचारी ने
माचिस जलाकर यह देखने के लिए
कि पेट्रोल है या नहीं,
पेट्रोल की टंकी में झाँका।
पेट्रोल था। आयु पच्चीस वर्ष।

बस।
ना भूमिका, ना पृष्ठभूमि,
ना बयान, ना प्रतिक्रिया!

😂 दफ्तर में गूंजती हंसी

  • संपादक: “भाई, यह क्या है?”
  • रिपोर्टर: “सर, आपने कहा था कम शब्दों में!”

पूरे न्यूज़रूम में ठहाके लग गए।

🤣कुछ और मज़ेदार जोक संवाद

बॉसकर्मचारी

बॉस: रिपोर्ट इतनी छोटी क्यों है?
कर्मचारी: सर, खबर बड़ी नहीं थी, सबक बड़ा था।

टीचरस्टूडेंट

टीचर: निबंध इतना छोटा क्यों?
स्टूडेंट: मैडम, आज ‘संक्षेप में लिखो’ वाला मूड था।

पतिपत्नी

पत्नी: आज इतना कम क्यों बोले?
पति: ऑफिस में ट्रेनिंग मिली है।

दोस्तदोस्त

दोस्त: भाई, आज शांत क्यों है?
दूसरा दोस्त: खबर लिखने की प्रैक्टिस कर रहा हूं।

😄 सीख भी,हंसी भी

इस जोक में छुपा है
पत्रकारिता का वो सच,
जहां शब्दों की संख्या नहीं,
समझदारी मायने रखती है।

8️ Conclusion (निष्कर्ष)

यह हास्य लेख हमें बताता है कि
कभी-कभी “कम शब्द”
ज़्यादा असर छोड़ जाते हैं।

आख़िरी पंचलाइन:
“खबर छोटी थी,
पर सीख लंबी—
और हंसी सबसे बड़ी!” 😄

एक प्रेस रिपोर्टर को समाचार बड़े विस्तार के साथ लिखकर भेजने की आदत थी। उसके संपादक ने उसे कहा कि वह समाचार कम से कम शब्दों में लिखकर भेजा करे। अगली बार प्रेस रिपोर्टर ने निम्न समाचार भेजा।

स्थानीय तेल कंपनी के एक कर्मचारी ने माचिस जलाकर यह देखने के लिए पेट्रोल है या नहीं,पेट्रोल की टंकी में झाँका। पेट्रोल था। आयु पच्चीस वर्ष।

(साई फीचर्स)