(नन्द किशोर)
भोपाल (साई)।मध्यप्रदेश की निर्वाचन प्रणाली को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO MP) श्री संजीव कुमार झा ने मंगलवार को प्रदेश के सभी 55 जिलों के उप जिला निर्वाचन अधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक की। यह बैठक मुख्य रूप से एसआईआर (SIR – Systematic Information Recording), मतदाता सूची शुद्धिकरण, नो-मैपिंग क्षेत्रों की समीक्षा, और डिजिटाइजेशन कार्य में तेजी लाने पर केंद्रित रही।
बैठक में श्री झा ने कहा कि आगामी चुनावों की दृष्टि से मतदाता सूची का पूरी तरह शुद्ध होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सभी उप जिला निर्वाचन अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मैपिंग और डिजिटाइजेशन कार्य को जल्द से जल्द100%पूर्ण किया जाए, ताकि अगले चरण की प्रक्रियाओं को समयसीमा में आगे बढ़ाया जा सके।
बैठक का मुख्य एजेंडा—मतदाता सूची की शुद्धता सर्वोपरि
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती मतदाता सूची की सटीकता पर निर्भर करती है। अगर सूची त्रुटिरहित होगी, तो चुनावी प्रक्रिया भी निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।
उन्होंने अधिकारियों से कहा—
- किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न छूटे।
- मृत, स्थानांतरित या दोहरे नामों को हटाने में तेजी लाई जाए।
- बीएलओ द्वारा प्राप्त गणना पत्रकों (Form) को तत्परता से सत्यापित किया जाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि मतदाता सूची त्रुटिरहित हो,यह जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
एसआईआर कार्यों की गहन समीक्षा,अधिकारियों के काम की सराहना
बैठक के दौरान श्री झा ने एसआईआर कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। कई जिलों ने डिजिटल मैपिंग, बूथ स्तर के आंकड़ों और मतदाता जानकारी के अपडेट में अच्छा प्रदर्शन किया है।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने ऐसे जिलों को सराहते हुए कहा कि—
“आप सभी ने अब तक जो कार्य किया है वह प्रशंसनीय है। लेकिन यह समय बेहतर से बेहतरीन करने का है। समयसीमा को ध्यान में रखते हुए शेष कार्यों को तेजी से पूर्ण करना अनिवार्य है।”
कुछ जिलों को सुधार की दिशा में विशेष सुझाव भी दिए गए।
बीएलए और वालेंटियर—चुनावी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण सहयोगी
बैठक में श्री झा ने बीएलए (Booth Level Agents) और वालेंटियरों की भूमिका पर भी जोर दिया।
मतदाताओं को जागरूक करने के निर्देश
उन्होंने कहा—
- बीएलए का उपयोग बूथ स्तर पर जन-जागरूकता बढ़ाने में किया जाए।
- वालेंटियरों को मतदाता सूची जांच एवं फॉर्म भरवाने में सक्रिय किया जाए।
- मतदान केंद्रों के आसपास सूचना सामग्री का व्यापक प्रसार हो।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मतदाताओं को एसआईआर और सूची सुधार प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी देना इस पूरे अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गणना पत्रकों का समय पर संग्रह—बड़ी चुनौती,स्पष्ट निर्देश
एक महत्वपूर्ण बिंदु जिस पर बैठक में विस्तृत चर्चा हुई, वह था गणना पत्रकों (Enumeration Forms) का संग्रह।
श्री झा ने कहा—
“गणना पत्रक जितनी जल्दी संग्रहित होंगे, उतनी ही जल्दी उनका डिजिटाइजेशन व सत्यापन कार्य पूरा होगा। विलंब से समूची प्रक्रिया प्रभावित होती है।”
उन्होंने सभी जिलों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए—
- गणना पत्रक संग्रह में किसी भी स्तर पर देरी न हो।
- फॉर्म की गुणवत्ता, पूर्णता और सत्यता की जांच सख्ती से की जाए।
- असंकलित फॉर्म (UEF) को तुरंत कम करने की रणनीति अपनाई जाए।
‘नो-मैपिंग’और‘असंकलित गणना पत्रक’क्षेत्रों पर विशेष ध्यान
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बैठक में विशेष रूप से “नो-मैपिंग” क्षेत्रों और “UEF” पर चर्चा की। इन क्षेत्रों में मतदाताओं की सूची या रिकॉर्ड अभी पूर्ण रूप से उपलब्ध नहीं होते, जिससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
निर्देश
- नो-मैपिंग क्षेत्रों की पहचान कर एक सप्ताह के भीतर अपडेट भेजें।
- ऐसे सभी क्षेत्रों को प्राथमिकता देकर 100% डेटा एंट्री सुनिश्चित करें।
- असंकलित पत्रकों को शून्य के स्तर तक लाने का लक्ष्य रखें।
उन्होंने कहा कि इन दोनों श्रेणियों में सुधार पूरे निर्वाचन तंत्र को मजबूत करेगा।
डिजिटाइजेशन—चुनावी प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम
निर्वाचन आयोग लगातार तकनीक आधारित प्रक्रियाओं को बढ़ावा दे रहा है। डिजिटाइजेशन न केवल डेटा को सुरक्षित बनाता है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और पारदर्शिता भी बढ़ाता है।
श्री झा ने कहा—
- सभी जिलों में डिजिटाइजेशन तेजी से आगे बढ़े।
- डाटा एंट्री के दौरान त्रुटि सुधार (Error Rectification) पर विशेष ध्यान दिया जाए।
- जमा किए गए फॉर्म का डिजिटल रिकॉर्ड भी अद्यतन रहे।
उन्होंने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर डेटा रहने से मतदाता सूची अपडेट, सत्यापन और भविष्य की प्रक्रियाएँ अधिक सरल, सुरक्षित और तेज हो जाएँगी।
जिलों से मिली प्रगति रिपोर्ट—कुछ बेहतर,कुछ को सुधार की आवश्यकता
बैठक में जिलों ने अपनी-अपनी प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। कुछ जिलों—जैसे इंदौर, भोपाल, जबलपुर और सागर—ने मैपिंग, डिजिटाइजेशन और एसआईआर कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दिखाई है।
वहीं कुछ जिलों में अभी भी—
- फॉर्म संग्रह में देरी
- नो-मैपिंग क्षेत्रों की अधिक संख्या
- डिजिटाइजेशन में धीमी रफ्तार
जैसी चुनौतियाँ बनी हुई हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने ऐसे जिलों के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
चुनावी तैयारी—2025के लिए मजबूत हो रही बुनियाद
दिसंबर 2025 में यह समीक्षा बैठक आगामी चुनावों की तैयारी का एक अहम चरण है।
इस बैठक के माध्यम से आयोग ने स्पष्ट संकेत दिया है कि—
- तकनीक आधारित चुनावी व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी
- मतदाता सूची में कोई भी त्रुटि सहन नहीं की जाएगी
- हर जिले को 100% मैपिंग व डिजिटाइजेशन का लक्ष्य अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा
प्रदेश में आगामी चुनावों के लिए एक मजबूत, पारदर्शी और भरोसेमंद बेस तैयार किया जा रहा है।
बैठक में उपस्थित वरिष्ठ अधिकारी
बैठक के दौरान निर्वाचन कार्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें—
- संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री राम प्रताप सिंह जादौन
- उप मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्रीमती सुरभि तिवारी
- अधिकारी श्री राजेश यादव
और अन्य प्रमुख अधिकारी शामिल थे।
इन अधिकारियों ने जिलों के कार्यों की तकनीकी व प्रशासनिक समीक्षा भी की।
जनता के लिए महत्वपूर्ण संदेश
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने नागरिकों के लिए भी संदेश जारी किया—
- अपने मतदाता पहचान दस्तावेज़ की जांच करें
- यदि कोई त्रुटि मिले तो तुरंत सुधार के लिए आवेदन करें
- बीएलओ को सही जानकारी प्रदान करें
- परिवार में नए मतदाताओं का नाम जरूर जुड़वाएँ
उन्होंने कहा कि जागरूक मतदाता ही लोकतंत्र को मजबूत बनाते हैं।
🏁 Conclusion (निष्कर्ष)
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा की यह वर्चुअल बैठक मध्यप्रदेश की चुनावी तैयारी को नई दिशा देने वाली साबित हुई।
बैठक का मुख्य फोकस—
- 100% मैपिंग
- डिजिटाइजेशन
- एसआईआर की समीक्षा
- त्रुटिरहित मतदाता सूची
- असंकलित पत्रकों को समाप्त करना
रहा।
स्पष्ट है कि प्रदेश अब डिजिटल और पारदर्शी निर्वाचन प्रणाली की ओर तेजी से बढ़ रहा है। अधिकारियों को दिए गए निर्देश यदि समयसीमा में लागू हुए, तो आगामी चुनाव और अधिक व्यवस्थित, सुरक्षित और निष्पक्ष रूप में संपन्न होंगे।

हर्ष वर्धन वर्मा का नाम टीकमगढ़ जिले में जाना पहचाना है. पत्रकारिता के क्षेत्र में लंबे समय तक सक्रिय रहने के बाद एक बार फिर पत्रकारिता में सक्रियता बना रहे हैं हर्ष वर्धन वर्मा . . .
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