तकनीकी चेतावनी के बाद एयरबस विमानों का ऑपरेशन प्रभावित
(दीपक अग्रवाल)
मुंबई (साई)। दुनियाभर में एयरबस के हजारों विमानों को अचानक ग्राउंड करना पड़ा जब कंपनी ने चेतावनी जारी की कि सोलर रेडिएशन (Solar Radiation) कुछ मॉडलों के फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर को प्रभावित कर सकता है। यह समस्या उच्च ऊंचाई पर उड़ान के दौरान गंभीर खतरा पैदा कर सकती थी।
कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, लगभग 6,000विमान, विशेष रूप से A320सीरीज़, इस संभावित खतरे से प्रभावित थे।
तकनीकी समस्या क्या थी?
एयरबस ने बताया कि फ्लाइट कंप्यूटर का वह सॉफ्टवेयर जो विमान की ऊंचाई (Elevation) तय करता है, वह सूर्य द्वारा छोड़ी जाने वाली तीव्र रेडिएशन तरंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हो सकता था।
इससे उड़ान के दौरान:
- ऊंचाई के आंकड़े गलत दिख सकते थे
- विमान अस्थिर हो सकता था
- पायलट को मैनुअल कंट्रोल पर स्विच करना पड़ सकता था
इसी जोखिम को देखते हुए आपातकालीन कदम उठाते हुए हजारों विमानों को अस्थायी रूप से ग्राउंड कर दिया गया।
सॉफ्टवेयर अपडेट ने बचाई स्थिति
फ्रांस स्थित एयरबस हेडक्वार्टर की टीम ने तुरंत समाधान जारी किया। कंपनी ने बताया कि प्रभावित 6,000 में से करीब 5,100 विमानों को एक सरल सॉफ्टवेयर अपडेट से ठीक किया जा सकता है।
कैसे हुआ समाधान?
- इंजीनियरों ने रातभर काम कर उपकरणों में अपडेट लागू किए
- अधिकांश विमानों में बिना हार्डवेयर बदले अपडेट इंस्टॉल कर दिया गया
- करीब 900पुराने विमानों में हार्डवेयर कंप्यूटर बदलने की आवश्यकता बताई गई
फ्रांस के परिवहन मंत्री फिलिप टैबारो ने कहा कि 5000से अधिक विमानों में अपडेट “बेहद सुचारू तरीके” से पूरा हुआ है।
दुनिया के प्रमुख एयरपोर्ट्स पर कितना प्रभाव पड़ा?
फ्रांस
पेरिस के चार्ल्स डी गॉल एयरपोर्ट पर शुरुआती घंटों में कुछ उड़ानें प्रभावित हुईं।
Air France ने सुबह तक कुछ देरी और रद्दीकरण की पुष्टि की।
अमेरिका
अमेरिका में यह समस्या Thanksgiving सप्ताहांत के दौरान सामने आई, जो कि साल का सबसे व्यस्त ट्रैवल पीरियड होता है।
- American Airlines के 340विमान प्रभावित
- कंपनी ने कहा कि कुछ परिचालन देरी संभव है
- Delta Airlines ने प्रभाव को “सीमित” बताया
ब्रिटेन
ब्रिटेन के बड़े एयरपोर्ट्स की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही।
- Heathrow पर कोई रद्द उड़ान नहीं
- Gatwick ने “कुछ व्यवधान” की जानकारी दी
- Manchester Airport पूरी तरह सामान्य रहा
British Airways पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ा।
एशिया और ऑस्ट्रेलिया
Jetstar Australia ने करीब 90 उड़ानें रद्द कीं।
काम का बड़ा हिस्सा पूरा हो जाने के बावजूद, कंपनी ने कहा कि सप्ताहांत में व्यवधान की संभावना बनी रह सकती है।
भारत में संचालन अधिकतर सामान्य रहा।
Air India और अन्य एयरलाइंस पर इसका प्रभाव बेहद सीमित बताया गया।
समस्या कैसे सामने आई? JetBlueघटना ने खतरे का संकेत दिया
यह पूरा मामला तब सामने आया जब अक्टूबर मेंJetBlue Airwaysकी एक उड़ान अमेरिका और मैक्सिको के बीच अचानक ऊंचाई खो बैठी।
इस घटना में:
- विमान को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी
- 15 से अधिक लोग घायल हुए
- जांच में पाया गया कि कंप्यूटर की Elevation Calculation प्रणाली में त्रुटि आई थी
सौर विकिरण (Solar Radiation) ही वह प्रमुख कारण था जिसने सिस्टम को प्रभावित किया।
कौन-कौन से विमान मॉडल थे प्रभावित?
एयरबस की A320 सीरीज के अलावा निम्न मॉडल शामिल थे:
- Airbus A318
- Airbus A319
- Airbus A321
लगभग 900 पुराने विमानों में कंप्यूटर सिस्टम अपग्रेड की आवश्यकता बताई गई है।
H3:क्या यात्री सुरक्षा पर असर पड़ा था?
हालांकि समस्या गंभीर थी, लेकिन एयरबस और वैश्विक एविएशन एजेंसियों ने इसे समय रहते पहचान लिया।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम का बैकअप मौजूद रहता है
- पायलट ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए प्रशिक्षित होते हैं
- अधिकांश विमानों में खतरे को नियंत्रित कर लिया गया था
इसके बावजूद बड़ी संख्या में विमानों को ग्राउंड करना जरूरी था।
अब स्थिति क्या है?फ्लाइट्स धीरे-धीरे सामान्य
शनिवार सुबह तक अधिकांश एयरलाइंस ने अपडेट पूरा कर लिया।
यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व में संचालन सामान्य रहा।
EasyJet, Wizz Air और कई अन्य एयरलाइंस ने पुष्टि की कि उनकी उड़ानें “सामान्य” रूप से चल रही हैं।
यात्रियों के लिए क्या सलाह?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगले 24–48 घंटों में स्थिति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी।
यात्रियों को सलाह दी गई है:
- एयरलाइन की ऐप या मैसेजिंग अपडेट चेक करें
- एयरपोर्ट पर थोड़ा अतिरिक्त समय लेकर पहुंचें
- प्रभावित क्षेत्रों में कनेक्टिंग फ्लाइट्स की जानकारी पहले ही ले लें
Conclusion (निष्कर्ष)
एयरबस के फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम में संभावित सोलर रेडिएशन दखल को लेकर जारी चेतावनी ने वैश्विक स्तर पर उड़ानों को अस्थायी रूप से प्रभावित किया। हालांकि एयरबस ने तेज़ी से प्रतिक्रिया देते हुए अधिकांश विमानों में रातभर में सॉफ्टवेयर अपडेट लागू कर स्थिति को संभाल लिया।
कुछ देशों में शुरुआती देरी जरूर हुई, लेकिन अब दुनिया भर में फ्लाइट संचालन सामान्य हो चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना आधुनिक विमानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल और त्वरित तकनीकी प्रतिक्रिया की क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

कर्नाटक की राजधानी बंग्लुरू में समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के ब्यूरो के रूप में कार्यरत श्वेता यादव ने नई दिल्ली के एक ख्यातिलब्ध मास कम्यूनिकेशन इंस्टीट्यूट से पोस्ट ग्रेजुएशन की उपाधि लेने के बाद वे पिछले लगभग 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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