🔹 एक बार फिर समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया की खबर पर लगी मुहर . . .
(अखिलेश दुबे)
सिवनी (साई)।मध्य प्रदेश के सिवनी जिले में एक हवाला कारोबार से जुड़ा सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामला इतना गंभीर है कि इसमें 9पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एसडीओपी सिवनी पूजा पांडेय के खिलाफ भी कार्यवाही की सिफारिश की गई है।
सूत्रों का दावा है कि कटनी से महाराष्ट्र के जालना जा रहे लगभग तीन करोड़ रुपये की रकम को सिवनी पुलिस ने जब्त किया था, लेकिन इस रकम को “खुर्द-बुर्द” करने का आरोप अब उसी पुलिसकर्मियों पर लग रहा है, जिन्होंने जब्ती की थी।
🔹 पूरा घटनाक्रम: कब, कहाँ और कैसे?
08और 09अक्टूबर की दरमियानी रात, बंडोल थाना पुलिस को सूचना मिली कि कटनी से महाराष्ट्र के जालना जा रही एक गाड़ी में हवाला की बड़ी रकम ले जाई जा रही है।
सूचना पर सक्रिय हुई बंडोल पुलिस ने थाना क्षेत्र से बाहर जाकर गाड़ी एमएच13ईके3430 को शीलादेही इलाके में पकड़ लिया।
जब वाहन की तलाशी ली गई तो उसमें से 1.45करोड़ रुपये नकद बरामद हुए। गाड़ी में जालना निवासी सोहन परमार सहित चार लोग सवार थे। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।
🔹 हवाला की रकम या कारोबारी लेनदेन?
पुलिस को मिली टीप (गोपनीय सूचना) में बताया गया था कि वाहन में हवाला की रकम है। हालांकि, पकड़े गए व्यक्तियों ने दावा किया कि यह रकम उनके वैध व्यवसाय से संबंधित थी और वे इसे जालना स्थित व्यापारिक फर्मों को देने जा रहे थे।
यहीं से मामला उलझ गया। पहले 2.25करोड़ रुपये की जब्ती की बात सामने आई, लेकिन बाद में पुलिस ने बताया कि केवल 1.45करोड़ रुपये जब्त किए गए।
यानी लगभग 80लाख रुपये का अंतर सवाल बन गया कि वह रकम आखिर कहाँ गई?
🔹 पुलिस पर गंभीर आरोप – “रकम खुर्द-बुर्द करने का प्रयास”
समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया को मिले पुलिस सूत्रों के अनुसार, रकम जब्त करने के बाद कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों ने कथित रूप से इस रकम को पचाने या कम दिखाने का प्रयास किया।
बताया गया कि पुलिस ने आरोपियों से रकम जब्त कर उन्हें छोड़ दिया था। बाद में जब आरोपी अपनी रकम वापस लेने या पूरी जब्ती की कार्रवाई दर्ज कराने पहुंचे, तो मामला खुल गया।
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस के अंदर ही दो गुट बन गए —
एक गुट ने रकम की पूरी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी, जबकि दूसरा गुट इसे “आंतरिक मामला” बताकर दबाने की कोशिश करता रहा।
🔹 सवालों के घेरे में पुलिस – “मोबाइल नागपुर कैसे पहुँचा?”
इस पूरे प्रकरण में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि आरोपी सोहन परमार और उसके साथियों के मोबाइल फोन, जो पुलिस कस्टडी में थे, नागपुर तक पहुँच गए।
यह सवाल अब पूरे विभाग के लिए सिरदर्द बन गया है कि पुलिस कस्टडी से सबूत जैसी वस्तुएं नागपुर तक कैसे चली गईं?
🔹 मुख्यमंत्री कार्यालय की सख्ती
मामला मीडिया में उछलने और प्रशासनिक स्तर पर रिपोर्ट पहुँचने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने जबलपुर के पुलिस महानिरीक्षक (IG)प्रमोद वर्मा से रिपोर्ट मांगी।
IG वर्मा ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीओपी सिवनी कार्यालय और बंडोल थाने के नौ पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
🔹 निलंबित अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची
निलंबन की कार्रवाई में शामिल पुलिस कर्मी इस प्रकार हैं:
उप निरीक्षक अर्पित भैरम, थाना प्रभारी बण्डोल, सिवनी,
प्रधान आरक्षक 203 माखन, एसडीओपी कार्यालय सिवनी,
प्रधान आरक्षक 447 रविन्द्र उईके, रीडर-एसडीओपी कार्यालय सिवनी,
आरक्षक 803 जगदीश यादव, एसडीओपी कार्यालय सिवनी,
आरक्षक 306 योगेन्द्र चौरसिया, एसडीओपी कार्यालय सिवनी,
आरक्षक चालक 582 रितेश, ड्राइवर एसडीओपी कार्यालय सिवनी,
आरक्षक 750 नीरज राजपूत, थाना बण्डोल, सिवनी,
आरक्षक 610 केदार, गनमैन-एसडीओपी सिवनी, 8वीं वाहिनी विसबल छिन्दवाड़ा,
आरक्षक 85 सदाफल, गनमैन-एसडीओपी सिवनी, 8वीं वाहिनी विसबल छिन्दवाड़ा।
सूत्रों की मानें तो थाना प्रभारी बण्डोल एवं उप निरीक्षक अर्पित भैरम, एसडीओपी कार्यालय के प्रधान आरक्षक 203, माखन, एसडीओपी कार्यालय के आरक्षक 803 जगदीश यादव, आरक्षक योगेंद्र चौरसिया, वाहन चालक 852 रीतेश, थाना बण्डोल के आरक्षक 750 नीरज राजपूत, एसडीओपी के गनमेन विशेष सशस्त्र बल की छटवीं बटालियन के आरक्षक 610 केदार, आरक्षक 85 सदाफल को निलंबित कर दिया है।
🔹 जिले में भ्रष्टाचार पर उठे सवाल
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि यह घटना सिवनी जिले की पुलिस प्रणाली में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक झलक मात्र है।
लोगों का कहना है कि पिछले डेढ़-दो दशकों से जिले में बिना“चढ़ावे”के कोई कार्रवाई नहीं होती। शराब तस्करी, नशीले पदार्थों का व्यापार और अवैध धंधे खुलेआम चल रहे हैं, लेकिन पुलिस अक्सर “मौन दर्शक” बनी रहती है।
इस घटना ने जनता के बीच यह धारणा और मजबूत कर दी कि कानून व्यवस्था का तंत्र खुद बेईमानी की जकड़ में है।
🔹राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
मामला सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि पुलिस विभाग में लंबे समय से “मिलिभगत संस्कृति” पनप रही है, जिसका यह मामला सबसे बड़ा उदाहरण है।
सोशल मीडिया पर भी लोग सिवनी पुलिस की “ईमानदारी पर तंज” कस रहे हैं।
कुछ स्थानीय सामाजिक संगठनों ने CBIजांच की मांग की है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
🔹कानूनी विशेषज्ञों की राय
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जब्ती प्रक्रिया में धांधली साबित होती है, तो यह भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,भारतीय दंड संहिता की धारा409 (अभिकर्ता द्वारा आपराधिक विश्वासघात) और धारा420 (धोखाधड़ी) के अंतर्गत गंभीर अपराध है।
ऐसे मामलों में सजा के साथ-साथ विभागीय निष्कासन भी संभव है।
🔹जनता का भरोसा और पुलिस की चुनौती
यह घटना न केवल सिवनी बल्कि पूरे मध्य प्रदेश की पुलिस पर सवालिया निशान छोड़ गई है।
जहाँ पुलिस आम जनता की सुरक्षा की गारंटी है, वहीं जब पुलिस खुद घोटाले में फंसती दिखे, तो जनता का भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए पुलिस विभाग को चाहिए कि:
- निलंबन के साथ-साथ आंतरिक सतर्कता जांच करे।
- प्रत्येक थाने में CCTVफुटेज निगरानी व्यवस्था अनिवार्य हो।
- भ्रष्टाचार की शिकायतों पर लोकायुक्त के माध्यम से स्वतंत्र जांच हो।
🔹 “हवाला”क्या है और क्यों खतरनाक है?
हवाला एक अवैध धन हस्तांतरण प्रणाली है, जिसमें बिना बैंकिंग चैनल के देश-विदेश में पैसा स्थानांतरित किया जाता है।
यह प्रणाली आतंकवाद,ड्रग तस्करी और कर चोरी से जुड़ी होती है।
भारत में हवाला लेन-देन विदेशी मुद्रा अधिनियम (FEMA) और प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के अंतर्गत गंभीर अपराध माना जाता है।
इसलिए, सिवनी जैसे छोटे जिले में हवाला की इतनी बड़ी रकम का पकड़ा जाना अपने आप में एक गंभीर चेतावनी है।
🧩निष्कर्ष (Conclusion)
सिवनी जिले में उजागर हुआ यह हवाला घोटाला केवल 3 करोड़ रुपये या कुछ निलंबित पुलिसकर्मियों का मामला नहीं है। यह उस सिस्टम की सच्चाई दिखाता है, जहाँ ईमानदारी अक्सर ताक पर रख दी जाती है।
नौ पुलिसकर्मियों का निलंबन और एसडीओपी पूजा पांडेय पर कार्रवाई की सिफारिश प्रशासनिक सख्ती का संकेत है, लेकिन असली चुनौती अब निष्पक्ष जांच और दोषियों को सजा दिलाने की है।
यदि इस प्रकरण की जांच पारदर्शी ढंग से नहीं हुई, तो यह केवल एक और “फाइल बंद मामला” बनकर रह जाएगा।
लेकिन यदि सरकार और पुलिस प्रशासन इसे सुधार की दिशा में उदाहरण बनाते हैं, तो यह घटना मध्य प्रदेश पुलिस व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर बन सकती है।

लगभग 16 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया के सिवनी ब्यूरो के रूप में लगभग 12 सालों से कार्यरत हैं.
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