क्या सांसदों की चुप्पी से सिवनी व आदिवासी क्षेत्र से छूट गई अमृत भारत ट्रेन? जानिए ‘रेल का पूरा खेल’

15 सितंबर से शुरू हुई अमृत भारत ट्रेन जबलपुर होकर उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ रही है। मगर सवाल उठ रहा है कि यह ट्रेन सिवनी–छिंदवाड़ा–नैनपुर मार्ग से क्यों नहीं गुजारी गई? यदि यह मार्ग चुना जाता तो दूरी भी घटती और आदिवासी बहुल जिलों को बड़ी सौगात मिलती।

सांसद बंटी साहू,भारती पारधी और फग्गन सिंह कुलस्ते अगर दम मारते तो अमृत भारत ट्रेन गुजरती सिवनी से होकर!

फिलहाल नागपुर से इटारसी होकर जबलपुर के व्यस्ततम व लंबे मार्ग से होकर गुजर रही यह रेलगाड़ी . . .

(लिमटी खरे)

🚆 अमृत भारत ट्रेन: मध्यप्रदेश को मिली नई सौगात

भारतीय रेलवे ने 15 सितंबर 2025 से अमृत भारत ट्रेन (16601/16602) का संचालन शुरू कर दिया है। यह ट्रेन तमिलनाडु के इरोड जंक्शन से बिहार के जोगबनी तक चलेगी और रास्ते में मध्यप्रदेश के जबलपुर होकर गुज़रेगी। रेलवे का दावा है कि इससे पहली बार मध्यप्रदेश को दक्षिण भारत से सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी।

लेकिन इस बीच एक बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है – आखिर यह ट्रेन नागपुर–इटारसी–जबलपुर के व्यस्ततम मार्ग से क्यों गुज़ारी गई, जबकि नागपुर–छिंदवाड़ा–सिवनी–नैनपुर–जबलपुर मार्ग ज्यादा छोटा और कम भीड़भाड़ वाला था?

📏 दूरी और दबाव का गणित

  • नागपुर–इटारसी–जबलपुर मार्ग: 542 किलोमीटर, जहाँ पहले से ही रेल यातायात बहुत भारी है।
  • नागपुर–सिवनी–नैनपुर–जबलपुर मार्ग: मात्र 414 किलोमीटर, और यहाँ से 24 घंटे में मुश्किल से 10–12 ट्रेनें ही गुजरती हैं।

यानी अगर अमृत भारत ट्रेन को सिवनी मार्ग से गुजारा जाता तो 128 किलोमीटर कम दूरी तय करनी पड़ती और नागपुर–इटारसी रेलखंड पर बोझ भी घटता।

🌍 उपेक्षित आदिवासी क्षेत्र

यह फैसला विशेषकर आदिवासी बहुल जिलों छिंदवाड़ा,सिवनी,बालाघाट और मंडला के लिए निराशाजनक रहा।

  • इन जिलों के लोग वर्षों से लंबी दूरी की ट्रेनों के ठहराव की मांग कर रहे हैं।
  • अभी यहाँ सिर्फ पेंचव्हेली फास्ट पैसेंजर और पातालकोट एक्सप्रेस जैसी सीमित ट्रेनें ही चलती हैं।
  • ब्रॉडगेज लाइन बनने के बावजूद रेलवे ने अब तक लंबी दूरी की प्रमुख ट्रेनों को इस मार्ग से नहीं चलाया।

यदि अमृत भारत ट्रेन इस रूट से गुजरती तो सौंसर,छिंदवाड़ा,सिवनी,केवलारी,नैनपुर और घंसौर जैसे स्टेशन भी सीधे राष्ट्रीय रेल नक्शे पर आ जाते।

🏛️ सांसदों की भूमिका पर सवाल

रेल मार्ग का निर्धारण पूरी तरह केंद्र सरकार के अधीन होता है। ऐसे में स्थानीय सांसदों की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने क्षेत्र के लिए रेल सुविधाएँ सुनिश्चित करें।

  • छिंदवाड़ा से विवेक बंटी साहू
  • बालाघाट से भारती पारधी
  • मंडला से फग्गन सिंह कुलस्ते

रेलवे बोर्ड सूत्रों का कहना है कि अगर इन सांसदों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के सामने मजबूती से अपनी बात रखी होती तो ट्रेन को सिवनी मार्ग से गुजारना संभव हो सकता था।

🚉 अमृत भारत ट्रेन की विशेषताएँ

यह ट्रेन साप्ताहिक है और यात्रियों की सुविधा को देखते हुए इसमें कुल 22कोच लगाए गए हैं:

  • 8 कोच स्लीपर क्लास
  • 11 कोच सामान्य श्रेणी
  • 1 पेंट्री कार
  • 2 एसएलआर कोच

इससे यात्रियों को लंबी दूरी की आरामदायक और सुरक्षित यात्रा उपलब्ध होगी।

🔎 सवाल यह भी…

  1. ब्रॉडगेज का फायदा कहाँ गया?
    अप्रैल 2023 में सिवनी रेलखंड पर ब्रॉडगेज लाइन पूरी हो चुकी थी। लेकिन दो साल बाद भी यहाँ गिनती की ही गाड़ियाँ चल रही हैं।
  2. नीतिगत उपेक्षा क्यों?
    छिंदवाड़ा–सिवनी–नैनपुर मार्ग को जानबूझकर नज़रअंदाज किया जा रहा है।
  3. आदिवासी अंचल से कटाव
    मंडला, बालाघाट और सिवनी जिले देश के सबसे पिछड़े जिलों में गिने जाते हैं। रेल संपर्क से विकास की संभावना बढ़ सकती थी, मगर यह मौका चूक गया।

📢 जनता की नाराज़गी

स्थानीय नागरिक संगठनों और यात्री संघों ने इस फैसले पर नाराज़गी जताई है। उनका कहना है कि:

  • अगर अमृत भारत ट्रेन सिवनी होकर जाती तो हजारों लोगों को सीधा लाभ मिलता।
  • इससे पर्यटन और व्यापार को भी बढ़ावा मिलता।
  • फिलहाल, यह ट्रेन लंबा और व्यस्त मार्ग चुनकर सिर्फ चुनिंदा क्षेत्रों तक ही लाभ पहुँचा रही है।

📰 मीडिया और विशेषज्ञों की राय

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यात्री दबाव कम करने और दूरी घटाने के लिहाज से भी सिवनी मार्ग ज्यादा उपयुक्त था। लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभाव की कमी के कारण यह विकल्प अपनाया नहीं गया।

🏁 निष्कर्ष

अमृत भारत ट्रेन ने जबलपुर को जरूर उत्तर और दक्षिण भारत से जोड़ा है, लेकिन आदिवासी बहुल छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट और मंडला जिलों के लोग अब भी लंबी दूरी की ट्रेनों से वंचित हैं।
यदि स्थानीय सांसद बंटी साहू, भारती पारधी और फग्गन सिंह कुलस्ते प्रभावी तरीके से अपनी बात रखते तो आज यह ट्रेन सिवनी होकर गुजरती और विकास की नई राहें खोलती।

रेलवे के इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या राजनीति और लापरवाही के कारण आदिवासी क्षेत्र हमेशा उपेक्षित रहेंगे?

देश के हृदय प्रदेश का सिवनी जिला भले ही भारतीय रेल के ब्राडगेज के नक्शे पर आ चुका हो, पर आज भी यह सवारी रेलगाड़ियों को तरसता ही दिख रहा है। पेंचव्हेली फास्ट पैसेंजर एवं पातालकोट एक्सप्रेस ट्रेन ही इसकी झोली में आकर गिरी हैं, यह भी नीतिगत फैसलों के चलते! रेल चलाना चूंकि केंद्र का मसला है इसलिए सांसदों के कंधों पर यह जवाबदेही आहूत होती है कि वे नागपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, नैनपुर जबलपुर मार्ग को रेलगाड़ियों से समृद्ध बनाएं।

हाल ही में 15 सितंबर से आरंभ हुई अमृत भारत ट्रेन के जरिए मध्य प्रदेश के जबलपुर अंचल को सीधे सीधे उत्तर और दक्षिण भारत से कनेक्टिविटी तो मिल गई है पर इसमें आदिवासी बाहुल्य छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट और मण्डला जिलों की उपेक्षा साफ तौर पर दिखाई ही दे रही है।

15 सितंबर से आरंभ हुई 16601 एवं 16602 अमृत भारत ट्रेन भले ही सप्ताह में एक दिन ही चल रही हो पर तमिलनाडू के इरोड जंक्शन से बिहार के जोगबनी तक चलने वाली इस रेलगाड़ी को वर्तमान समय में नागपुर से जबलपुर के बीच गाडरवाड़ा, पिपरिया, इटारसी, घोड़ाडोंगरी, बैतूल, वाले पुराने रेल्वे ट्रेक से होकर गुजारा जा रहा है।

नागपुर से इटारसी होकर जबलपुर का रेलखण्ड पर यातायात का दबाव बहुत ज्यादा रहता है और यहां से नागपुर और जबलपुर के बीच की दूरी 542 किलोमीटर पड़ती है। वहीं दूसरी और नागपुर से छिंदवाड़ा, सिवनी, नैनपुर होकर जबलपुर का रेलखण्ड पूरी तरह खाली माना जा सकता है क्योंकि चौबीस घंटों में इस रेलखण्ड से होकर महज एक दर्जन रेलगाड़ियां ही गुजरती हैं, और यह दूरी 414 किलोमीटर है। इस तरह अगर अमृत भारत को इटारसी के बजाए सिवनी के रास्ते गुजारा जाता तो इस रेलखण्ड में यातायात का दबाव भी नहीं के बराबर ही मिलता।

इस अमृत भारत रेलगाड़ी में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेन में कुल 22 कोच लगाए जाएंगे। इनमें शामिल हैं इसमें 8 कोच स्लीपर क्लास के, 11 कोच सामान्य श्रेणी के, एक पेंट्री कार एवं 2 कोच एसएलआर श्रेणी के हैं, इससे यात्रियों को आरामदायक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।

रेलवे बोर्ड के सूत्रों ने समाचार एजेंसी ऑफ इंडिया से चर्चा के दौरान कहा कि नागपुर से बरास्ता छिंदवाड़ा, सिवनी, नैनपुर जबलपुर के रेलखण्ड में यातयात का दबाव नहीं होने की बात अगर छिंदवाड़ा के सांसद विवेक बंटी साहू, बालाघाट की सांसद भारती पारधी एवं मण्डला के सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते के द्वारा पुरजोर तरीके से रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के समक्ष वजनदारी से रखी जाती तो निश्चित तौर पर तमिलनाडू के इरोड जंक्शन से बिहार के जोगबनी तक चलने वाली अमृत भारत ट्रेन को छिंदवाड़ा संसदीय क्षेत्र के सौंसर, छिंदवाड़ा, चौरई, बालाघाट संसदीय क्षेत्र के सिवनी, भोमा, मण्डला संसदीय क्षेत्र के कान्हीवाड़ा, केवलारी, नैनपुर, घंसौर के रास्ते जबलपुर तक जाने के मार्ग प्रशस्त हो जाते। अगर ऐसा होता तो इस रेलगाड़ी का ठहराव सौंसर, छिंदवाड़ा, सिवनी, केवलारी, नैनपुर एवं घंसौर में भी प्रस्तावित किया जा सकता था।

विडम्बना ही कही जाएगी कि महाकौशल अंचल के लोकसभा सदस्यों के द्वारा अपने अपने संसदीय क्षेत्रों को रेल सुविधाओं से परिपूर्ण करने में कहीं न कहीं कोताही अवश्य ही बरती जाती प्रतीत हो रही है। यही कारण है कि 24 अप्रैल 2023 से ब्राडगेज पर सवारी रेलगाड़ी आरंभ होने के ढाई साल बाद भी इस मार्ग पर आज भी उतनी ही रेलगाड़ियों का परिचालन हो रहा है जितनी रेलगाड़ियों का परिचालन इसके आरंभ में हो रहा था।

(साई फीचर्स)