सिवनी के श्री माता राजराजेश्वरी मंदिर में नवरात्र पर 651 मनोकामना कलश स्थापित, 30 सितम्बर को भव्य शोभा यात्रा

सिवनी स्थित श्री सिद्ध पीठ माता राजराजेश्वरी मंदिर में शारदीय नवरात्र पर्व पर 651 भक्तों द्वारा मनोकामना कलश स्थापित किए गए। मंदिर में आकर्षक साज-सज्जा, दुर्गा सप्तशती पाठ और प्रतिदिन विशेष आरती का आयोजन हो रहा है। 30 सितम्बर को भव्य कलश विसर्जन शोभा यात्रा निकाली जाएगी।

 (अशोक सोनी)

सिवनी (साई)। शारदीय नवरात्र का पावन पर्व पूरे देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसी क्रम में सिवनी स्थित श्री सिद्ध पीठ माता राजराजेश्वरी मंदिर में इस बार एक विशेष आयोजन देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर में 651 श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु मनोकामना कलश स्थापित किए हैं।

मंदिर का महत्व

श्री माता राजराजेश्वरी मंदिर को सिवनी जिले का प्रमुख सिद्ध पीठ माना जाता है। यहां पर नवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजन, अर्चन और अनुष्ठान का आयोजन सदियों से होता आया है। मान्यता है कि मां भगवती के दरबार में सच्चे मन से की गई प्रार्थना अवश्य पूरी होती है।

नवरात्र पर्व की शुरुआत और साज-सज्जा

नवरात्र पर्व के प्रारंभ होते ही मंदिर को आकर्षक विद्युत सजावट,पुष्पमालाओं और देवी की झांकियों से सजाया गया है।

  • मुख्य पुजारी श्री मथुरा प्रसाद दुबे, सहायक पुजारी श्री रमेश शर्मा और श्री सतीश सेन ने मिलकर मंदिर की अद्भुत सजावट की है।
  • प्रतिदिन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आरती और दर्शन व्यवस्था की गई है।
  • भक्त सुबह और शाम को बड़ी संख्या में माता के दर्शन कर आशीर्वाद ले रहे हैं।

धार्मिक अनुष्ठान और पूजा विधि

नवरात्र के नौ दिनों में मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन हो रहा है।

  • प्रतिदिन सुबह 6:00बजे सहस्त्रआंचन (सहस्त्र नामों से माता का अभिषेक) किया जा रहा है।
  • रात 9:00बजे महाआरती का आयोजन होता है, जिसमें भक्तों की बड़ी भीड़ शामिल होती है।
  • 11आचार्यों द्वारा दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रतिदिन किया जा रहा है।
  • मां भगवती की आराधना में लगातार भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

भक्तों की भीड़ और श्रद्धा

नवरात्र के इन दिनों में मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं का मेला सा लगा हुआ है। दूर-दराज से आने वाले भक्त भी यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंच रहे हैं।

  • परिवार सहित भक्त माता के चरणों में प्रसाद,चुनरी,नारियल और कलश अर्पित कर रहे हैं।
  • कई श्रद्धालु अपने बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना लेकर यहां पहुंचे हैं।
  • माता के दरबार में गूंजते जयकारे और घंटे-घड़ियाल की ध्वनि वातावरण को भक्तिमय बना रहे हैं।

651 मनोकामना कलश – विशेष महत्व

इस बार कुल 651भक्तों ने मनोकामना कलश स्थापित कराए हैं।

  • यह कलश भक्तों की व्यक्तिगत मनोकामनाओं और पारिवारिक सुख-समृद्धि के प्रतीक हैं।
  • प्रत्येक कलश में जल, नारियल, आम्रपल्लव, सुपारी और लाल वस्त्र रखकर माता की पूजा की जा रही है।
  • आयोजन समिति का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में कलश स्थापना मंदिर के इतिहास में एक अनूठा उदाहरण है।

कलश विसर्जन शोभा यात्रा – 30 सितम्बर 2025

मंदिर में स्थापित कलशों का विसर्जन 30सितम्बर 2025,मंगलवार शाम 4:00बजे भव्य शोभा यात्रा के रूप में किया जाएगा।

  • यह यात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर दलसागर तालाब तक जाएगी।
  • शोभा यात्रा में सैकड़ों भक्तजन, महिलाएं और बच्चे शामिल होंगे।
  • कलश धारण करने वाली माता बहनों को विशेष स्मृति चिन्ह और श्रृंगार सामग्री प्रसादी स्वरूप वितरित की जाएगी।
  • धार्मिक संगीत, ढोल-नगाड़े और भजन मंडलियों के साथ यात्रा का दृश्य अत्यंत भव्य और श्रद्धामय होगा।

आयोजन समिति का आह्वान

सिद्ध पीठ श्री माता राजराजेश्वरी धर्मार्थ ट्रस्ट ने सभी सनातन धर्मावलंबियों, भक्तजनों और कलश स्थापित करने वाले परिवारों से अनुरोध किया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस शोभा यात्रा में शामिल होकर धर्म लाभ प्राप्त करें।

सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

भारत की संस्कृति में नवरात्र पर्व का विशेष महत्व है। यह पर्व शक्ति की उपासना और साधना का पर्व है।

  • मां दुर्गा की उपासना से जीवन में साहस,शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • कलश स्थापना का महत्व यह है कि यह शक्ति,समृद्धि और शुभ फल का प्रतीक है।
  • शोभा यात्रा धार्मिक एकता और सामूहिक भक्ति का परिचायक है।

निष्कर्ष

सिवनी के श्री माता राजराजेश्वरी मंदिर में इस वर्ष का नवरात्र पर्व विशेष बन गया है। 651मनोकामना कलश की स्थापना, प्रतिदिन की विशेष पूजा-अर्चना,दुर्गा सप्तशती पाठ,सहस्त्रआंचन और महाआरती ने भक्तों को अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव प्रदान किया है।

30 सितम्बर को होने वाली कलश विसर्जन शोभा यात्रा इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होगी। इस यात्रा में भाग लेकर श्रद्धालु न केवल अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करेंगे, बल्कि सामूहिक भक्ति और सांस्कृतिक धरोहर का भी अनुभव करेंगे।

यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि आस्था और भक्ति के मिलन से ही समाज में धार्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार होता है।