(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने ‘अपराजिता कार्यक्रम’ का शुभारंभ किया। यह पहल मिशन शक्ति के तहत बेटी बचाओ‑बेटी पढ़ाओ योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के हिस्से के रूप में आयोजित की गई। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री मनोज लारोकर और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम ने 30 सितंबर से 14 अक्टूबर 2026 तक 15 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया, जिसका उद्देश्य बालिकाओं के आत्मविश्वास, आत्मरक्षा, नेतृत्व और खेल कौशल को बढ़ावा देना था।
प्रशिक्षण का विवरण और सहभागिता
प्रशिक्षण सिवनी शहरी, सिवनी ग्रामीण‑01, सिवनी ग्रामीण‑02, लखनादौन, घंसौर, केवलारी, बरघाट, कुरई, धनौरा और छपारा परियोजना क्षेत्रों में समान रूप से वितरित किया गया। चयनित बालिकाओं ने शारीरिक फिटनेस, आत्मरक्षा तकनीक, टीम‑बिल्डिंग, सार्वजनिक बोलना और रचनात्मक कला जैसे विविध मॉड्यूल में भाग लिया। प्रत्येक सत्र में अनुभवी प्रशिक्षकों ने इंटरैक्टिव कार्यशालाओं के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी क्षमताओं की पहचान करने और उन्हें निखारने के अवसर प्रदान किए।
सुरक्षा, नेतृत्व और खेल में नई पहल
कार्यक्रम के दौरान आत्मरक्षा के लिए विशेष मार्शल आर्ट सत्र आयोजित किए गए, जिससे बालिकाओं को व्यक्तिगत सुरक्षा के मूल सिद्धांत समझ में आए। नेतृत्व विकास के लिए समूह चर्चा, समस्या‑समाधान खेल और प्रोजेक्ट‑आधारित कार्यों को शामिल किया गया। खेल विभाग ने एथलेटिक्स, कबड्डी और रचनात्मक खेलों के माध्यम से टीम भावना को प्रोत्साहित किया, और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बालिकाओं को जिला‑स्तर पर प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए चयनित किया गया। इस पहल ने न केवल शारीरिक सशक्तिकरण बल्कि सामाजिक आत्मविश्वास भी बढ़ाया।
प्रमुख बिंदु
• कार्यक्रम: अपराजिता कार्यक्रम
• आयोजन तिथि: 30 सितंबर‑14 अक्टूबर 2026 (15 दिन)
• स्थान: सिवनी (शहरी एवं ग्रामीण‑01,‑02, लखनादौन, घंसौर, केवलारी, बरघाट, कुरई, धनौरा, छपारा)
• मुख्य उद्देश्य: बालिकाओं का आत्मविश्वास, आत्मरक्षा, नेतृत्व एवं खेल प्रतिभा विकास
• प्रमुख संकल्प: सशक्त, आत्मनिर्भर एवं सुरक्षित बालिकाएँ बनाना
• लक्ष्य: प्रशिक्षण के बाद जिला‑स्तर पर प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन
अपराजिता कार्यक्रम ने सिवनी की बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया है। निरंतर प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और नियमित मूल्यांकन के माध्यम से महिला एवं बाल विकास विभाग का लक्ष्य है कि प्रत्येक प्रतिभागी को भविष्य में सामाजिक और आर्थिक प्रगति में योगदान करने के लिए तैयार किया जाए। इस प्रकार की पहलें सतत विकास और सामाजिक समावेशिता को सुदृढ़ करती हैं, जिससे प्रदेश की समग्र प्रगति में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।