(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)। 12 अक्टूबर 2026 को संभागीय कार्यालय जबलपुर की एक विशेष जांच टीम ने सिवनी नगरीय क्षेत्र के जलप्रदाय परियोजना पर स्थल निरीक्षण किया। टीम में श्री सत्यम जाट (अधिकारी), सहायक यंत्री श्री योगेन्द्र बाथरी, उपयंत्री श्री अमित श्रीवास्तव, तथा टीम लीडर श्री धमेन्द्र परमार शामिल थे। नगर पालिका के सीएमओ सुश्री दिशा डेहरिया और कई पार्षदों की उपस्थिति में यह जांच आयोजित हुई, जिसका उद्देश्य निर्माण की गुणवत्ता, वित्तीय लेन‑देनों की वैधता और परियोजना की समयसीमा की पुष्टि करना था।
जांच का विस्तृत विवरण
जांच दल ने परियोजना के स्वीकृत डिजाइन‑ड्राइंग, कार्य आदेश, भुगतान रसीदें और प्रगति रिपोर्ट सहित सभी अभिलेखों का क्रमबद्ध परीक्षण किया। स्थल पर किए गए निरीक्षण में पाया गया कि कई संरचनात्मक तत्व डीपीआर में निर्दिष्ट मानकों से विचलित थे, जैसे कि कंक्रीट की मिश्रण अनुपात, स्टील की गुणवत्ता और जल निकासी प्रणाली की असंगतता। टीम ने इन विसंगतियों को दस्तावेज़ीकरण के साथ नोट किया और संबंधित ठेकेदार को सुधारात्मक कार्यवाही के लिए नोटिस जारी किया।
सुरक्षा एवं गुणवत्ता के पहलू
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि घटिया निर्माण न केवल परियोजना की दीर्घकालिक स्थिरता को प्रभावित करेगा, बल्कि जल आपूर्ति की सुरक्षा भी खतरे में डाल सकता है। टीम ने सुझाव दिया कि भविष्य में सभी कार्यों के लिए स्वतंत्र गुणवत्ता नियंत्रण एजेंसियों को शामिल किया जाए और भुगतान प्रक्रिया को डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर लाकर पारदर्शिता बढ़ाई जाए। इन उपायों से अनियमित भुगतान की संभावना कम होगी और नागरिकों को विश्वसनीय जल सेवा सुनिश्चित होगी।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: सिवनी जलप्रदाय परियोजना (नगर पालिका)
• आयोजन: विस्तृत तकनीकी एवं वित्तीय जांच
• स्थान: सिवनी, मध्य प्रदेश
• मुख्य उद्देश्य: निर्माण गुणवत्ता एवं भुगतान की वैधता की पुष्टि
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: सुधारात्मक कार्यवाही, स्वतंत्र गुणवत्ता नियंत्रण, डिजिटल भुगतान प्रणाली
• लक्ष्य: समय पर, सुरक्षित और पारदर्शी जल आपूर्ति सुनिश्चित करना
जांच टीम ने यह रेखांकित किया कि नियमित निरीक्षण, आधुनिक तकनीकी मानकों का पालन और वित्तीय पारदर्शिता परियोजना की सफलता के मुख्य स्तंभ हैं। यदि सिवनी जलप्रदाय परियोजना में सुझाए गए सुधार समय पर लागू किए जाते हैं, तो यह न केवल नागरिकों की जल सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि अन्य सार्वजनिक‑संकाय परियोजनाओं के लिए एक मानक स्थापित करेगा। भविष्य में ऐसी नियमित समीक्षाएँ सतत विकास और संचालन उत्कृष्टता की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।