(ब्यूरो कार्यालय)
सिवनी (साई)सिवनी के बुधवारी बाजार में स्थित ‘स्वामी फर्नीचर’ का संस्थापक सुमित चैनानी ने 26 सितंबर को मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत प्राप्त 8 लाख रुपये के ऋण से अपना फर्नीचर व्यवसाय शुरू किया। बी.ए. तक की पढ़ाई के बाद नौकरी की तलाश छोड़कर उन्होंने इस योजना को अपनाया, जिससे न केवल स्वयं को आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली बल्कि तीन अन्य युवाओं को रोजगार भी मिला। इस कदम को स्थानीय उद्योग विकास और युवा सशक्तिकरण के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया है।
व्यवसाय की प्रगति और तकनीकी पहल
उधार प्राप्त राशि का उपयोग कर सुमित ने बुधवारी बाजार में 150 वर्ग मीटर की दुकान स्थापित की और फर्नीचर व दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बिक्री शुरू की। उन्होंने आधुनिक डिज़ाइन, टिकाऊ सामग्री और डिजिटल मार्केटिंग को अपनाकर ग्राहकों की विविध मांगों को पूरा किया। ऑनलाइन ऑर्डर प्रणाली और सोशल मीडिया प्रचार ने बिक्री में 30% की वृद्धि की, जिससे वार्षिक आय लगभग 5 लाख रुपये तक पहुँच गई। इस सफलता ने स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं के साथ सहयोग को भी सुदृढ़ किया, जिससे सप्लाई चेन में पारदर्शिता और लागत में कमी आई।
रोजगार सृजन और सामाजिक प्रभाव
स्वामी फर्नीचर ने आज तीन स्थानीय युवाओं को स्थायी वेतनभोगी पद प्रदान किए हैं। इन कर्मचारियों को कौशल प्रशिक्षण, सुरक्षा मानकों और व्यावसायिक विकास के अवसर मिल रहे हैं, जिससे उनके आय स्तर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सुमित का मानना है कि रोजगार सृजन से न केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि समुदाय में उद्यमिता की भावना भी जागृत होगी। उन्होंने भविष्य में दो और युवा को जोड़ने की योजना बनाई है, जिससे स्थानीय बेरोजगारी दर घटाने में योगदान मिलेगा।
खबर के प्रमुख बिंदु
• कंपनी: स्वामी फर्नीचर
• आयोजन: उद्यम क्रांति योजना के तहत ऋण स्वीकृति और व्यवसाय शुरू
• स्थान: सिवनी, मध्यप्रदेश
• मुख्य उद्देश्य: आत्मनिर्भर व्यवसाय स्थापित करना और स्थानीय रोजगार सृजन
• प्रमुख संकल्प/घोषणाएं: 3 युवाओं को स्थायी रोजगार, भविष्य में 2 अतिरिक्त नौकरियां
• लक्ष्य: वार्षिक आय 5 लाख रुपये से अधिक, स्थानीय आर्थिक विकास में योगदान
सुमित चैनानी की कहानी दर्शाती है कि सही नीति समर्थन, व्यक्तिगत दृढ़ संकल्प और आधुनिक तकनीक के संगम से छोटे उद्यम भी स्थायी विकास की राह पर चल सकते हैं। निरंतर कौशल उन्नयन, वित्तीय अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ ऐसे मॉडल भारत के अन्य क्षेत्रों में भी दोहराए जा सकते हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर रोजगार सृजन और आर्थिक समावेशिता को बढ़ावा मिलेगा।